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Sirsa News: रास्ते में उतार रहीं बसें, नुकीले तार व बैरिकेड पैदल करने पड़ रहे पार
Thu, 15 Feb 2024 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 15 Feb 2024 11:49 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। किसान आंदोलन के चलते जिला प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से हाईवे पर नाकेबंदी व कीलेबंदी कर रखी हैं। इसके चलते रास्ते बाधित हैं और लोगों को लिंक रोड से होकर गुजरना पड़ता है। घग्गर नदी पर की गई नाकेबंदी के खैरेकां गांव के अड्डे पर राजस्थान और डबवाली की बसें यात्रियों को उतार देती है। ऐसे में अपने बीमार बच्चों और बुजुर्गों को दवा दिलाने के लिए नाके की दीवारों और नुकीली कीलों को पार कर सिरसा शहर की तरफ आना पड़ रहा है।
ऐसा ही नजारा वीरवार को देखने को मिला। किसानों को रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेड से ही आमजन व ग्रामीणों को आवागमन के लिए रास्ता बने हैं। लोगों को इन ऊपर ही गुजरकर ही रास्ता पार करना पड़ता है। इतना ही नहीं, रेलवे ट्रक पर चलकर लोग अपनी जान जोखिम में डालकर घग्गर पार रहे हैं। कई बाइक सवार रेलवे ट्रैक पर बाइक चलाकर अपनी जान जोखिम में डालने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।
बॉक्स
मेरा बेटा बीमार है। बेटे को दवाई दिलाना बेहद जरूरी है। अस्पताल से दवाई दिलवाकर लौटी हुई। पुल पाकर अपने गांव को जाउंगी। हमें तो समझ नहीं आ रहा है कि यहां चल क्या रहा है। - महिला प्रकाश कौर।
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गांव चौटाला से सिरसा शहर जाने के लिए निकले थे। रोडवेज बस ने हाईवे बंद होने के कारण गांव खैरेका बस स्टैंड पर ही उतार दिया। अब पैदल इन बैरिकेड को पार करके आए हैं। रिश्तेदार की शादी है , इसलिए जाना भी जरूरी है।
संजू, गांव चौटाला।
मेरा खेत घग्गर के दूसरी तरह पड़ता हैं। दो दिनों से इन्हीं बैरीकेड को पार अपने खेतों में जा रहा हूं।
अमन, गांव खैरेकां।
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सिरसा। किसान आंदोलन के चलते जिला प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से हाईवे पर नाकेबंदी व कीलेबंदी कर रखी हैं। इसके चलते रास्ते बाधित हैं और लोगों को लिंक रोड से होकर गुजरना पड़ता है। घग्गर नदी पर की गई नाकेबंदी के खैरेकां गांव के अड्डे पर राजस्थान और डबवाली की बसें यात्रियों को उतार देती है। ऐसे में अपने बीमार बच्चों और बुजुर्गों को दवा दिलाने के लिए नाके की दीवारों और नुकीली कीलों को पार कर सिरसा शहर की तरफ आना पड़ रहा है।
ऐसा ही नजारा वीरवार को देखने को मिला। किसानों को रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेड से ही आमजन व ग्रामीणों को आवागमन के लिए रास्ता बने हैं। लोगों को इन ऊपर ही गुजरकर ही रास्ता पार करना पड़ता है। इतना ही नहीं, रेलवे ट्रक पर चलकर लोग अपनी जान जोखिम में डालकर घग्गर पार रहे हैं। कई बाइक सवार रेलवे ट्रैक पर बाइक चलाकर अपनी जान जोखिम में डालने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।
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मेरा बेटा बीमार है। बेटे को दवाई दिलाना बेहद जरूरी है। अस्पताल से दवाई दिलवाकर लौटी हुई। पुल पाकर अपने गांव को जाउंगी। हमें तो समझ नहीं आ रहा है कि यहां चल क्या रहा है। - महिला प्रकाश कौर।
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गांव चौटाला से सिरसा शहर जाने के लिए निकले थे। रोडवेज बस ने हाईवे बंद होने के कारण गांव खैरेका बस स्टैंड पर ही उतार दिया। अब पैदल इन बैरिकेड को पार करके आए हैं। रिश्तेदार की शादी है , इसलिए जाना भी जरूरी है।
संजू, गांव चौटाला।
मेरा खेत घग्गर के दूसरी तरह पड़ता हैं। दो दिनों से इन्हीं बैरीकेड को पार अपने खेतों में जा रहा हूं।
अमन, गांव खैरेकां।