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दूसरी बार टूटी कालूआना माइनर, गेहूं की फसल में भरा पानी
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जेसीबी के माध्यम से नहर को पाटने का कार्य करते हुए जलदाय विभाग के कर्मचारी व किसान।
- फोटो : Sirsa
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गोरीवाला। कालूआना माइनर दूसरी बार मोगा नंबर 156 के पास से गंगा रकबा में शुक्रवार रात को टूटने से गेहूं की फसल में पानी भर गया। माइनर में करीब 25 फुट की दरार आ गई।
किसान बिंदर सिंह, अमृत पाल, रमेश कुमार, हरबंस सिंह, गोपी राम, ओमप्रकाश जगदीश चंद्र, नानकराम, कुलदीप सिंह आदि ने बताया कि कालूआना माइनर दो बार इसी जगह से टूट चुकी है। इसके टूटने से गंगा रकबा के 10 एकड़ में चार फुट के करीब पानी भर गया। वहीं पानी भरने के कारण ट्यूबवेल भी खराब हो गए। जहां से माइनर टूटी है उस जगह से सिंचाई विभाग द्वारा बनाए गई खाल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। किसानों ने बताया कि इससे पहले भी गंगा रकबा के किसानों की नरमे की फसल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। माइनर के फिर से टूटने के अंदेशे को भांपते हुए इस बारे में विभाग को अवगत करवाया गया था। जिस समय पहली बार माइनर में दरार आई थी। उस समय भी विभाग द्वारा लीपापोती की गई थी। किसानों ने उस समय भी विभाग के समक्ष इसकी आशंका जाहिर की थी। परंतु सिंचाई विभाग ने किसानों की बात को नजरअंदाज कर दिया। जिसका खामियाजा किसानों को दूसरी बार भुगतना पड़ा है।
आरोप- लीपापोती कर रहा विभाग
किसानों का आरोप है कि अब भी विभाग द्वारा माइनर को पाटने का जो कार्य किया जा रहा है, वह भी केवल लीपापोती है। क्योंकि जिस दिशा से माइनर में दरार आई है। विभाग द्वारा उस तरफ किसी भी प्रकार का कोई स्थायी बंदोबस्त नहीं किया जा रहा। लीपापोती कर किसानों को आश्वस्त करने का कार्य किया जा रहा है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि शीघ्र ही माइनर को सही ढंग से सही करवाया जाए। जिससे कि भविष्य में उनको मुश्किलों का सामना न करना पडे़। प्रशासन से मांग है कि जिन किसानों का नुकसान हुआ है, उसकी विशेष गिरदावरी करवाकर मुआवजा दिलवाया जाए।
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जेई जगदीप सिंह ने बताया की लगातार दो-तीन दिन से बारिश होने के कारण पीछे से आउटलेट बंद कर दिए गए थे। जिस वजह से माइनर में दरार आ गई है। माइनर को सही करने का कार्य किया जा रहा है। शीघ्र ही ठीक कर पानी सुचारू रूप से चलवा दिया जाएगा।
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किसान बिंदर सिंह, अमृत पाल, रमेश कुमार, हरबंस सिंह, गोपी राम, ओमप्रकाश जगदीश चंद्र, नानकराम, कुलदीप सिंह आदि ने बताया कि कालूआना माइनर दो बार इसी जगह से टूट चुकी है। इसके टूटने से गंगा रकबा के 10 एकड़ में चार फुट के करीब पानी भर गया। वहीं पानी भरने के कारण ट्यूबवेल भी खराब हो गए। जहां से माइनर टूटी है उस जगह से सिंचाई विभाग द्वारा बनाए गई खाल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। किसानों ने बताया कि इससे पहले भी गंगा रकबा के किसानों की नरमे की फसल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। माइनर के फिर से टूटने के अंदेशे को भांपते हुए इस बारे में विभाग को अवगत करवाया गया था। जिस समय पहली बार माइनर में दरार आई थी। उस समय भी विभाग द्वारा लीपापोती की गई थी। किसानों ने उस समय भी विभाग के समक्ष इसकी आशंका जाहिर की थी। परंतु सिंचाई विभाग ने किसानों की बात को नजरअंदाज कर दिया। जिसका खामियाजा किसानों को दूसरी बार भुगतना पड़ा है।
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आरोप- लीपापोती कर रहा विभाग
किसानों का आरोप है कि अब भी विभाग द्वारा माइनर को पाटने का जो कार्य किया जा रहा है, वह भी केवल लीपापोती है। क्योंकि जिस दिशा से माइनर में दरार आई है। विभाग द्वारा उस तरफ किसी भी प्रकार का कोई स्थायी बंदोबस्त नहीं किया जा रहा। लीपापोती कर किसानों को आश्वस्त करने का कार्य किया जा रहा है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि शीघ्र ही माइनर को सही ढंग से सही करवाया जाए। जिससे कि भविष्य में उनको मुश्किलों का सामना न करना पडे़। प्रशासन से मांग है कि जिन किसानों का नुकसान हुआ है, उसकी विशेष गिरदावरी करवाकर मुआवजा दिलवाया जाए।
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जेई जगदीप सिंह ने बताया की लगातार दो-तीन दिन से बारिश होने के कारण पीछे से आउटलेट बंद कर दिए गए थे। जिस वजह से माइनर में दरार आ गई है। माइनर को सही करने का कार्य किया जा रहा है। शीघ्र ही ठीक कर पानी सुचारू रूप से चलवा दिया जाएगा।