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कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के दोनों धड़े अब हुए एक

Fri, 16 Oct 2020 10:54 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2020 10:54 PM IST
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Both groups of farmers are now one in opposition to agricultural laws
किसानों को बाबा भूमणशाह चौक पर रोकते अधिकारी। - फोटो : Sirsa
केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के दोनों धड़े अब एक हो गए। दोनों धड़ों को शुक्रवार को गुरुद्वारा चिल्ला साहिब की प्रबंधन कमेटी ने एकजुट करवाया। साथ ही आंदोलन को चलाने के लिए 12 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। इससे पहले लघु सचिवालय के पास धरने पर बैठे किसान बाबा भूमणशाह चौक पर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला व बिजली मंत्री रणजीत सिंह के घर का घेराव करने पहुंचे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें चौक पर ही रोक लिया। किसानों ने करीब एक घंटा चौक पर ही प्रदर्शन किया।
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दोपहर करीब ढाई बजे लघु सचिवालय में धरने पर बैठे जसबीर सिंह भाटी गुट के किसान डिप्टी सीएम व बिजली मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन करने के लिए बाबा भूमणशाह चौक पर पहुुंचे। पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इसके बाद किसानों ने वहीं पर ही डिप्टी सीएम व बिजली मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने एक घंटे तक प्रदर्शन किया। इसके बाद किसान वापस लघु सचिवालय में धरने पर आ गए।
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बाबा नींदर सिंह व प्रकाश सिंह साहुवाला पहुंचे धरनास्थल पर
गुरुद्वारा चिल्ला साहिब से बाबा नींदर सिंह व प्रकाश सिंह साहुवाला शाम को शहीद भगत सिंह स्टेडियम पर चल रहे पक्का मोर्चा किसानों के धरने पर पहुंचे। बाबा नींदर सिंह व प्रकाश सिंह साहुवाला ने कहा कि कुछ लोग हमारे साथ दूसरे धरने पर बैठे हैं। अब इस धरने को एक करना है। इसलिए उनके इस धरने पर पहुंचने पर उनका स्वागत किया जाएगा। इसके बाद पक्का मोर्चा धरने से प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा व अन्य किसान लघु सचिवालय में जसबीर सिंह भाटी के धरने पर पहुंचे। वहां किसानों को साथ लेकर पक्का मोर्चा किसानों के धरने पर लेकर पहुंचे। पक्का मोर्चा धरने पर पहुंचे किसान नेताओं के गले में हार डालकर उनका स्वागत किया। इस मौके पर किसान नेता लखविंद्र सिंह औलख ने कहा कि छह अक्तूबर को प्रदर्शन में जो राजनीति के कारण फूट पड़ी थी, अब इस धरने पर केवल किसानी के बारे में चर्चा होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक बयानबाजी नहीं करने दी जाएगी। हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए तीनों कानूनों के विरोध में उन्होंने प्रदेश के 17 किसान संगठनों के बैनर तले राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन चलाया हुआ है। भारूखेड़ा ने बताया कि शुरू से ही उन्होंने ये एलान किया था कि आंदोलन को बिना किसी हिंसा के शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा, लेकिन छह अक्तूबर को उपमुख्यमंत्री व बिजली मंत्री के घेराव कार्यक्रम के दौरान कुछ शरारती तत्वों ने आंदोलन की दिशा को बदलने का प्रयास किया। किसानों के मामले पर सभी एक मंच पर इकट्ठे हैं।
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12 सदस्यीय कमेटी में ये हैं शामिल
अब किसान पक्का मोर्चा धरनास्थल पर ही इस लड़ाई को एक साथ मिलकर लड़ेंगे। धरने के लिए 12 किसान नेताओं की एक प्रबंधक कमेटी बनाई गई है, जोकि सारा सिस्टम संभालेगी। जिसमें कि जसबीर सिंह भाटी, प्रह्लाद भारूखेड़ा, गुरदास सिंह लकड़ावाली, गुरदीप सिंह झिड़ी ,प्रकाश ममेरां, जगदेव जम्मू, नवदीप सिंह मल्लेकां, हरजिंदर रानियां, दीवान चोपटा, गुरनाम सिंह झब्बर, लखविंदर सिंह, एसपी सिंह मसीता को शामिल किया गया हैं।

गांव संतनगर और सुखचैन में भी नेताओं के प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध
रानियां के संतनगर और सुखचैन गांव में भी ग्रामीणों ने राजनेताओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। डबवाली के विधायक अमित सिहाग ने शुक्रवार को गांवों का दौरा करना था, लेकिन गांवों में राजनेताओं के विरोध को देखते हुए उन्होंने अपना दौरा रद्द दिया। बता दें कि इससे पहले देसूजोधा गांव में भी जेजेपी नेता दिग्विजय चौटाला को किसानों के विरोध के चलते अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था। ग्रामीणों ने किसी भी राजनेता के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।

चौक पर धरना लगाए बैठे किसान।

चौक पर धरना लगाए बैठे किसान।- फोटो : Sirsa

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