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बैंक खाते से राशि उड़ाकर निशान नहीं छोड़ता बिंगो मोड : डाॅ. मयंक
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सिरसा। साइबर ठगों ने अब बिंगो मोड का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। यह वायरस न केवल मोबाइल डिवाइस में प्रवेश कर उपयोगकर्ता की बैंकिंग जानकारी चुराता है, बल्कि खाते से पैसे निकालने के बाद खुद को भी नष्ट कर देता है। इससे कोई डिजिटल सबूत तक नहीं बचता। पुलिस अधीक्षक (एसपी) सिरसा डॉ. मयंक गुप्ता ने जिला वासियों से साइबर अपराध से सतर्क रहने की अपील की है।
एसपी ने बताया कि यह वायरस आमतौर पर मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर में भेजे गए संदिग्ध लिंक जैसे कि व्हाट्सएप, एसएमएस, ईमेल या सोशल मीडिया मैसेज के माध्यम से प्रवेश करता है। जैसे ही यूजर क्लिक करता है, यह वायरस सक्रिय हो जाता है और डिवाइस की संवेदनशील जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंचा देता है।
दूर बैठे किसी भी डिवाइस को नियंत्रित कर सकते हैं ठग
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस एक अत्याधुनिक एंड्रॉयड रिमोट एक्सेस ट्रोजन है। इसकी मदद से साइबर अपराधी दूर बैठे किसी भी डिवाइस को पूरी तरह नियंत्रित कर सकते हैं। यह वायरस स्क्रीनशॉट ले सकता है, लाइव स्क्रीन को मॉनिटर कर सकता है और 40 से अधिक खतरनाक कमांड को निष्पादित कर सकता है। यह वायरस डिवाइस को फैक्टरी रिसेट मोड में ले जाकर खुद को मिटा देता है। इससे उपयोगकर्ता को पता ही नहीं चलता कि उसके साथ कब और कैसे धोखाधड़ी हुई। इसे सेल्फ डिस्ट्रक्टिव मैलवेयर भी कहा जा रहा है क्योंकि यह वायरस किसी भी डिजिटल सबूत को पीछे नहीं छोड़ता।
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इन सुझावों का पालन करें :
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह किसी भी माध्यम व्हाट्सएप , एसएमएस ईमेल, फेसबुक आदि से आया हो। ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। फोन में थर्ड-पार्टी एप्स या संदिग्ध एपीके फाइल्स डाउनलोड करने से बचें। मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा अपडेट एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें।
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एसपी ने बताया कि यह वायरस आमतौर पर मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर में भेजे गए संदिग्ध लिंक जैसे कि व्हाट्सएप, एसएमएस, ईमेल या सोशल मीडिया मैसेज के माध्यम से प्रवेश करता है। जैसे ही यूजर क्लिक करता है, यह वायरस सक्रिय हो जाता है और डिवाइस की संवेदनशील जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंचा देता है।
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दूर बैठे किसी भी डिवाइस को नियंत्रित कर सकते हैं ठग
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस एक अत्याधुनिक एंड्रॉयड रिमोट एक्सेस ट्रोजन है। इसकी मदद से साइबर अपराधी दूर बैठे किसी भी डिवाइस को पूरी तरह नियंत्रित कर सकते हैं। यह वायरस स्क्रीनशॉट ले सकता है, लाइव स्क्रीन को मॉनिटर कर सकता है और 40 से अधिक खतरनाक कमांड को निष्पादित कर सकता है। यह वायरस डिवाइस को फैक्टरी रिसेट मोड में ले जाकर खुद को मिटा देता है। इससे उपयोगकर्ता को पता ही नहीं चलता कि उसके साथ कब और कैसे धोखाधड़ी हुई। इसे सेल्फ डिस्ट्रक्टिव मैलवेयर भी कहा जा रहा है क्योंकि यह वायरस किसी भी डिजिटल सबूत को पीछे नहीं छोड़ता।
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इन सुझावों का पालन करें :
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह किसी भी माध्यम व्हाट्सएप , एसएमएस ईमेल, फेसबुक आदि से आया हो। ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। फोन में थर्ड-पार्टी एप्स या संदिग्ध एपीके फाइल्स डाउनलोड करने से बचें। मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा अपडेट एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें।