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World Music Day: शास्त्रीय संगीत की साधना से बेटियों को निपुण बनाने में जुटे ‘भगवान’

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jun 2022 11:06 PM IST
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'Bhagwan' engaged in making daughters adept by the practice of classical music
घर पर बेटियों को शास्त्रीय संगीत सिखाते हुए भगवानस्वरूप शर्मा। संवाद - फोटो : Sirsa
बलविंद्र स्वामी
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सिरसा। हर वर्ष 21 जून को विश्व संगीत दिवस मनाया जाता है। आधुनिकता के दौर में पॉप म्यूजिक का जमाना है, लेकिन इसके बावजूद शास्त्रीय संगीत का अपना महत्व है। आज भी शास्त्रीय संगीत के शौकीन भटके नहीं हैं। सिरसा के भगवान स्वरूप ने भी शास्त्रीय संगीत में अपनी धाक जमाई है। वे अब तक 10 से ज्यादा देशों में शास्त्रीय संगीत की कला दिखाकर सिरसा का नाम रोशन कर चुके हैं। अब वे अपनी बेटियों को शास्त्रीय संगीत की तालीम दे रहे हैं।
न्यू हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी भगवान स्वरूप शर्मा का परिवार शिक्षित होने के साथ-साथ शास्त्रीय संगीत में काफी रुचि रखता है। भगवान स्वरूप को बचपन से ही संगीत का शौक था। 17 वर्ष की उम्र से बतौर गायक अपना कॅरिअर शुरू किया। समय के साथ-साथ आवाज में निखार आने लगा। देखते ही देखते संगीत प्रेमियों की तादाद भी बढ़ती गई। भगवान स्वरूप बताते हैं कि 1992 में महामंडलेश्वर गुरु अवधेशानंद महाराज सिरसा में आयोजित कार्यक्रम में आए। उनके सामने उन्होंने भजन प्रस्तुत किया। अवधेशानंद महाराज को उनका भजन इतना पसंद आया कि वे इन्हें अपने साथ ही ले गए। अवधेशानंद महाराज का देश व विदेश में जहां भी कार्यक्रम होता है तो वे अपने साथ लेकर जाते हैं। केवल दसवीं तक शिक्षा हासिल किए भगवान स्वरूप शर्मा संगीत में इतने निपुण हैं कि हर कोई इनका मुरीद हो जाता है। संवाद
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10 देशों की यात्रा कर चुके भगवान स्वरूप शर्मा
भगवान स्वरूप 1992 से लेकर अब तक 10 देशों में शास्त्रीय संगीत की कला बिखेर चुके हैं। भगवान स्वरूप शर्मा का कहना है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को विदेशों में भी काफी पसंद किया जाता है। उन्होंने बताया कि थाईलैंड, यूएसए, मलेशिया, यूरोपीय देश, सिंगापुर, इटली व साउथ अफ्रीका में आयोजित कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति दे चुके हैं, जिसे काफी सराहा गया।
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पिता रहे ग्लैमर से दूर तो बेटी ने पाया राज्य स्तर पर सम्मान
भगवान स्वरूप शर्मा अपने जीवन काल में व्यक्ति तौर पर किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए, देखा जाए तो वे ग्लैमर की दुनिया से अलग ही रहे हैं। हां स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज की टीम में शामिल होकर अनेक स्थानों पर अपनी प्रस्तुति दी है। उनकी चार बेटियां कुसुम बीए द्वितीय, सुमन बीए प्रथम, कोमल 11वीं व कृति सातवीं कक्षा में अध्ययन करने के साथ-साथ शास्त्रीय संगीत की भी शिक्षा ले रही हैं। कोमल राज्य स्तर तक सम्मानित की जा चुकी है। इसमें पहली बार हिसार में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। इसके बाद कुरुक्षेत्र में प्रथम, गुड़गांव में प्रथम व दूसरी बार हिसार में ही आयोजित प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान हासिल किया। सुमन भी विभिन्न कार्यक्रम में हिस्सा लेकर शास्त्रीय संगीत कला में जिला स्तर पर सम्मानित हो चुकी है।

बेटियों ने कहा- पापा की शास्त्रीय संगीत कला से मिले संस्कार
कुसुम, सुमन, कोमल व कृति ने कहा हमारे पापा धार्मिक विचारों के हैं। जिन्होंने कभी भी हम भाई व बहनों में बेटा या बेटी की तुलना नहीं की। पढ़ने की आजादी के साथ-साथ अपने तरीके से रहने का अधिकार दिया है। लेकिन पापा के शास्त्रीय संगीत की वजह से हमें संस्कार तो मिले ही है, वहीं उनकी प्रेरणा से आज राज्य स्तर तक सम्मान मिला है। उनकी वाणी की मधुरता और उनके मुख से गाए जाने वाले संगीत से मन को एक सुकून मिलता है।
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