Sirsa: दुग्गल की कटी टिकट, 52 दिन पहले पार्टी में आए अशोक तंवर प्रत्याशी, पढ़ें तंवर का सियासी सफरनामा
15 साल से सिरसा में सक्रियता और मजबूत दलित चेहरा होना टिकट मिलने का आधार बना है। दो बार हारने के बाद भी संसदीय क्षेत्र को नहीं छोड़ा। अशोक तंवर जनता से जुड़े रहे हैं।
विस्तार
हरियाणा के सिरसा में सांसद सुनीता दुग्गल का टिकट काटते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सिरसा लोकसभा सीट से डॉ. अशोक तंवर को प्रत्याशी बनाया है। 52 दिन पहले आम आदमी पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तंवर के टिकट मिलने का बड़ा कारण क्षेत्र में उनकी सक्रियता और अनुसूचित जाति का बड़ा चेहरा होना है। इसके अलावा तंवर का जुझारूपन और हार के बावजूद सिरसा क्षेत्र में सक्रिय बना रहना भी टिकट का आधार माना जा रहा है।
2019 के आम चुनावों में कांग्रेस की टिकट पर डॉ. अशोक तंवर का सांसद सुनीता दुग्गल से कड़ा मुकाबला था। मौजूदा सांसद को लेकर भाजपा के कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी, जो लंबे समय से सामने आ रही थी। इसीलिए सिरसा सीट से प्रत्याशी में बदलाव होना तय माना जा रहा था। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस लंबे समय से भाजपा के उम्मीदवार घोषित होने पर नजर जमाए हुए थी। ऐसे में मैदान में कुमारी सैलजा को उतारे जाने की उम्मीद प्रबल हो गई है।
ये बातें रही डॉ. अशोक तंवर के पक्ष में
- सिरसा का बड़ा दलित चेहरा होना और राजनीति में सक्रिय रहना।
- 15 साल से अपनी लोकसभा क्षेत्र में ही बने रहना।
- दो बार चुनाव हारने के बाद भी संसदीय क्षेत्र में लगातार सक्रियता
- कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने की क्षमता रखना।
- युवा वर्ग को जोड़ने की क्षमता और आधार वोटर। कार्यकर्ताओं से सीधा कनेक्शन।
नुकसान
- भाजपा को डॉ. अशोक तंवर को टिकट देने से कोई नुकसान नहीं होगा।
सांसद सुनीता का टिकट कटने का कारण
- लोकसभा के जमीनी मुद्दों के समाधान में ज्यादा रूचि न दिखा पाना।
- संसदीय क्षेत्र के लोगों से कम जुड़ाव।
- स्थानीय भाजपा नेताओं के साथ तालमेल न स्थापित कर पाना।
- सांसद के खिलाफ कार्यकर्ताओं में विरोध की लहर।
दुग्गल का प्लस प्वाइंट
- भाजपा में केंद्रीय स्तर पर एक्टिव रहना। पार्टी का समर्पित चेहरा।
- दलित महिला चेहरे के रूप में सिरसा ही नहीं, राष्ट्रव्यापी पहचान बनाना।
- केंद्र की योजनाओं खासकर रेल और सड़क परिवहन का भरपूर लाभ दिलाया।
डाॅ. अशोक तंवर का सियासी सफरनामा
डाॅ. अशोक तंवर हरियाणा की सियासत के प्रमुख किरदारों में शुमार हैं। संगठन एवं चुनाव प्रबंधन का लंबा अनुभव है। वे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। 2009 में सिरसा से सांसद रह चुके डाॅ. अशोक तंवर सिरसा लोकसभा से तीन चुनाव लड़ चुके हैं। वे युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अलावा हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे हरियाणा की कई सीटों पर प्रभाव रखते हैं। एक असरकारक और ऊर्जावान नेता हैं। युवाओं सहित सभी वर्गों में उनकी प्रभावी पैठ है। विशेष बात यह है कि वे 24 घंटे में से 16 घंटे तक सक्रिय रहते हैं।
तंवर का प्रोफाइल
डॉ. अशोक तंवर का जन्म 12 फरवरी 1976 को झज्जर के गांव चिमनी में हुआ। डाॅ. तंवर के पिता भारतीय सेना में रहे हैं। एक साधारण परिवार में जन्मे डाॅ. तंवर शुरू से ही काबिल व मेहनती रहे हैं। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से इतिहास में एमए, एमफिल और पीएचडी की डिग्री हासिल की। साल 1999 में उन्हें एनएसयूआई का सचिव और साल 2003 में प्रधान बनाया गया। 29 बरस की आयु में वे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने और इसके बाद युवा कांग्रेस ने देश की सियासत में एक नया आयाम स्थापित किया। उन्होंने युवाओं को राजनीति से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए। 2009 में कांग्रेस ने सिरसा से उम्मीदवार बनाया था। तब इन्होंने चौटाला के गढ़ में इनेलो के डाॅ. सीताराम को 35001 वोटों से हरा दिया था। इसके बाद डाॅ. तंवर ने सिरसा को अपनी कर्मभूमि बनाया। सिरसा में ही अपना घर बना लिया। कांग्रेस हाईकमान ने फरवरी 2014 में डाॅ. तंवर को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया। करीब दो दशक तक कांग्रेस की सियासत में सक्रिय रहने के बाद 5 अक्तूबर 2019 को उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया।
वर्ष 2019 के आंकड़ों के अुनसार सिरसा में जातिगत स्थिति
- साढ़े 7 लाख के करीब अनुसूचित जाति (मजहबी सिख, चमार, वाल्मीकि, धाणक व बाजीगर)
- 7 लाख 25 हजार जाट समुदाय के लोग
- 3 लाख 25 हजार जट सिख
- 1 लाख 82 हजार पंजाबी समुदाय (खत्री, अरोड़ा, मेहता)
- 1 लाख 11 हजार बनिया
- 87 हजार कंबोज
- 85 हजार ब्राह्मण
- 55 हजार बिश्नोई
- 48 हजार पिछड़ा वर्ग (कुम्हार, सैनी, अहीर, गुर्जर, खाती, सुनार)
- 1 लाख 30 हजार अन्य (मुस्लिम, क्रिश्चियन, जैन आदि)
सिरसा से अब तक जीते सांसद
- 1962 में कांग्रेस के दलजीत सिंह ने सिरसा की सीट जीती थी
- 1967 और 1971 में कांग्रेस के दलबीर सिंह यहां से चुनाव जीते।
- 1977 में भारतीय लोकदल के चंद्रराम ने जीत हासिल की।
- 1980 और 1984 में कांग्रेस के दलबीर सिंह सिंह फिर यहां से जीत का परचम लहराया।
- 1988 के चुनाव में लोकदल के हेतराम ने जीत हासिल की।
- 1989 में जनता दल के हेतराम चुनाव जीते।
- 1991 और 1996 में कांग्रेस की कुमारी सैलजा विजयी रही।
- 1998 में हरियाणा लोकदल राष्ट्रीय के सुशील कुमार ने जीत दर्ज की।
- 1999 में इनेलो से सुशील कुमार चुनाव जीते।
- 2004 में कांग्रेस के आत्म सिंह गिल जीते।
- 2009 में कांग्रेस के अशोक तंवर ने जीत दर्ज की।
- 2014 में इनेलो के चरणजीत सिंह रोडी जीते।
- 2019 में भाजपा से सुनीता दुग्गल ने जीत दर्ज की।