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Sirsa News: राजस्थान की सीमाओंं पर लंपी पर पहरा, पशुपालन विभाग बरत रहा सतर्कता
Sat, 12 Sep 2026 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 12 Sep 2026 11:51 PM IST
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- रोहतक, पानीपत और झज्जर से मंगवाई 18 हजार डोज
सुनील बैनीवाल
सिरसा। लंपी वायरस के मामले भले ही जिले में अब तक सामने नहीं आए हैं। दोनों ओर राजस्थान और पंजाब की सीमाएं होने के कारण हाईअलर्ट पर पशुपालन विभाग है। खासतौर पर 70 किलोमीटर से लंबी राजस्थान की सीमा पर लंपी को लेकर पहरा दिया जा रहा है।
पहरे को लेकर पंचायतों का सहयोग लिया जा रहा है। पंचायतों की मदद से राजस्थान से आने वाले पशुओं को लेकर नजर रखी जा रही है ताकि लंपी वायरस से ग्रस्त कोई पशु जिले में न आ सके। इससे अब तक पूरी तरह से सुरक्षित जिले में लंपी जैसी बीमारी न फैल सके।
वहीं, पशुपालन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि अब तक कोई लंपी संक्रमित पशु नहीं मिला है। यहां तक किसी भी पशु में शुरुआती लक्षण तक नहीं पाए गए हैं। इसलिए अब तक जिला के 2 लाख 35 हजार पशु पूरी तरह से इस बीमारी से सुरक्षित हैं।
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इस बीमारी की रोकथाम को लेकर पहले ही विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया था जिसके तहत 1,60,000 पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। बड़े स्तर पर पशुओं को पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सक कवर कर चुके हैं जबकि बचे हुए पशुओं को लेकर डोज मंगवाई गई है जो जल्द ही आ जाएगी।
वीएस से लेकर पशु अटेंडेंट तक हाई अलर्ट पर
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, लंपी की प्रदेश की स्थिति और साथ लगते राजस्थान के हालात को देखते हुए हाईअलर्ट हैं। विभाग के वेटनरी सर्जन, वीएलडीए, पशु अटेंडेंट तक को अलर्ट मोड में रखा हुआ है। वे अपने-अपने स्तर पर अपने एरिया की पंचायतों से संपर्क बनाए हुए हैं। इतना ही नहीं, 200 से ज्यादा गोशालाओं का सर्वे भी लगातार जारी है। 90 प्रतिशत से ज्यादा गोशालाओं को कवर किया जा चुका है मगर कोई केस नहीं मिला है। इन गोशाला संचालकों के साथ बैठक कर उन्हें पशुओं को शुरुआती लक्षण नजर आने पर तुरंत संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं। जिससे कि यह बीमारी पशुओं में न फैल सके। कालांवाली जैसे एरिया में लगने वाले पशु मेलों पर रोक लगा दी गई है।
दूसरे जिलों से लेकर आज आएंगे 15 हजार डोज
अधिकारियों के अनुसार, बचे हुए पशुओं को वैक्सीनेट करने के लिए झज्जर, पानीपत और रोहतक जिलों से डोज लेने के लिए टीम गई है। इन जिलों में डोज का अतिरिक्त स्टॉक था। ऐसे में 18 हजार डोज रविवार को पहुंच जाएगी और सोमवार से अभियान शुरू हो जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि तेजी से बचे हुए पशुओं को डोज लगाई जाए। इमरजेंसी के लिए कुछ डोज को रखा जाएगा ताकि कोई केस आता है तो तुरंत दवा का प्रयोग किया जा सके। लंपी संबंधी दवाओं की कोई कमी अभी नहीं है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, जिले में 235000 पशु यानी गोवंश हैं। इनमें से 2 लाख 3 हजार पशु को कवर किया जाना है। छोटे और बुजुर्ग गोवंशों को यह डोज नहीं लगाई जाएगी।
गांवों की सीमाएं लगती हैं राजस्थान से, पशुपालक रहें अलर्ट
पंचायतों के सहयोग से पशुपालकों को अलर्ट किया जा रहा है क्योंकि चोपटा, ऐलनाबाद, डबवाली जिले की सीमा बड़े स्तर पर राजस्थान से लगती है। खेतों से लेकर कच्चे रास्तों से वाहनों का आना-जाना है। पशुओं के बड़े-बड़े ग्रुप लेकर पशुपालक सिरसा क्षेत्र में हरियाली के चलते आते हैं। ऐसे में लंपी के फैलने की आशंका बनी रहती है। शहर में डेयरी बनाकर पशुपालन करने वाले लोग भी सस्ते पशुओं के चक्कर में लेकर आते हैं। इसलिए पुलिस की मदद से राजस्थान से आने वाले वाहनों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि पशुओं की जांच की जा सके। वहीं, गांव वालों का सहयोग लिया जा रहा है कि कोई कच्चे रास्तों से बीमार पशुओं को क्षेत्र में न छोड़कर जा सके। संवाद
कोट्स
लंपी को लेकर पूरी तरह से सतर्कता बरती जा रही है। एक लाख 60 हजार पशुओं को डोज लग चुकी है। पुलिस और पंचायतों के सहयोग से राजस्थान से आने वाले पशुओं पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, गोशालाओं और पशुपालकों के पशुओं को कवर लगभग किया जा चुका है। रविवार को 18 हजार डोज और आ जाएगी जिसके बाद अभियान चलाया जाएगा। अभी तक कोई मामला लंपी का नहीं आया है और न पशुओं में लक्षण मिले हैं।
-डॉ. राजकुमार बैनीवाल, उप निदेशक पशुपालन विभाग सिरसा।
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सुनील बैनीवाल
सिरसा। लंपी वायरस के मामले भले ही जिले में अब तक सामने नहीं आए हैं। दोनों ओर राजस्थान और पंजाब की सीमाएं होने के कारण हाईअलर्ट पर पशुपालन विभाग है। खासतौर पर 70 किलोमीटर से लंबी राजस्थान की सीमा पर लंपी को लेकर पहरा दिया जा रहा है।
पहरे को लेकर पंचायतों का सहयोग लिया जा रहा है। पंचायतों की मदद से राजस्थान से आने वाले पशुओं को लेकर नजर रखी जा रही है ताकि लंपी वायरस से ग्रस्त कोई पशु जिले में न आ सके। इससे अब तक पूरी तरह से सुरक्षित जिले में लंपी जैसी बीमारी न फैल सके।
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वहीं, पशुपालन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि अब तक कोई लंपी संक्रमित पशु नहीं मिला है। यहां तक किसी भी पशु में शुरुआती लक्षण तक नहीं पाए गए हैं। इसलिए अब तक जिला के 2 लाख 35 हजार पशु पूरी तरह से इस बीमारी से सुरक्षित हैं।
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इस बीमारी की रोकथाम को लेकर पहले ही विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया था जिसके तहत 1,60,000 पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। बड़े स्तर पर पशुओं को पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सक कवर कर चुके हैं जबकि बचे हुए पशुओं को लेकर डोज मंगवाई गई है जो जल्द ही आ जाएगी।
वीएस से लेकर पशु अटेंडेंट तक हाई अलर्ट पर
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, लंपी की प्रदेश की स्थिति और साथ लगते राजस्थान के हालात को देखते हुए हाईअलर्ट हैं। विभाग के वेटनरी सर्जन, वीएलडीए, पशु अटेंडेंट तक को अलर्ट मोड में रखा हुआ है। वे अपने-अपने स्तर पर अपने एरिया की पंचायतों से संपर्क बनाए हुए हैं। इतना ही नहीं, 200 से ज्यादा गोशालाओं का सर्वे भी लगातार जारी है। 90 प्रतिशत से ज्यादा गोशालाओं को कवर किया जा चुका है मगर कोई केस नहीं मिला है। इन गोशाला संचालकों के साथ बैठक कर उन्हें पशुओं को शुरुआती लक्षण नजर आने पर तुरंत संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं। जिससे कि यह बीमारी पशुओं में न फैल सके। कालांवाली जैसे एरिया में लगने वाले पशु मेलों पर रोक लगा दी गई है।
दूसरे जिलों से लेकर आज आएंगे 15 हजार डोज
अधिकारियों के अनुसार, बचे हुए पशुओं को वैक्सीनेट करने के लिए झज्जर, पानीपत और रोहतक जिलों से डोज लेने के लिए टीम गई है। इन जिलों में डोज का अतिरिक्त स्टॉक था। ऐसे में 18 हजार डोज रविवार को पहुंच जाएगी और सोमवार से अभियान शुरू हो जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि तेजी से बचे हुए पशुओं को डोज लगाई जाए। इमरजेंसी के लिए कुछ डोज को रखा जाएगा ताकि कोई केस आता है तो तुरंत दवा का प्रयोग किया जा सके। लंपी संबंधी दवाओं की कोई कमी अभी नहीं है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, जिले में 235000 पशु यानी गोवंश हैं। इनमें से 2 लाख 3 हजार पशु को कवर किया जाना है। छोटे और बुजुर्ग गोवंशों को यह डोज नहीं लगाई जाएगी।
गांवों की सीमाएं लगती हैं राजस्थान से, पशुपालक रहें अलर्ट
पंचायतों के सहयोग से पशुपालकों को अलर्ट किया जा रहा है क्योंकि चोपटा, ऐलनाबाद, डबवाली जिले की सीमा बड़े स्तर पर राजस्थान से लगती है। खेतों से लेकर कच्चे रास्तों से वाहनों का आना-जाना है। पशुओं के बड़े-बड़े ग्रुप लेकर पशुपालक सिरसा क्षेत्र में हरियाली के चलते आते हैं। ऐसे में लंपी के फैलने की आशंका बनी रहती है। शहर में डेयरी बनाकर पशुपालन करने वाले लोग भी सस्ते पशुओं के चक्कर में लेकर आते हैं। इसलिए पुलिस की मदद से राजस्थान से आने वाले वाहनों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि पशुओं की जांच की जा सके। वहीं, गांव वालों का सहयोग लिया जा रहा है कि कोई कच्चे रास्तों से बीमार पशुओं को क्षेत्र में न छोड़कर जा सके। संवाद
कोट्स
लंपी को लेकर पूरी तरह से सतर्कता बरती जा रही है। एक लाख 60 हजार पशुओं को डोज लग चुकी है। पुलिस और पंचायतों के सहयोग से राजस्थान से आने वाले पशुओं पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, गोशालाओं और पशुपालकों के पशुओं को कवर लगभग किया जा चुका है। रविवार को 18 हजार डोज और आ जाएगी जिसके बाद अभियान चलाया जाएगा। अभी तक कोई मामला लंपी का नहीं आया है और न पशुओं में लक्षण मिले हैं।
-डॉ. राजकुमार बैनीवाल, उप निदेशक पशुपालन विभाग सिरसा।