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Sirsa News: 10 साल की उम्र में माता-पिता खोने के कारण अकेला पड़ गया था अजय, रोजाना करने लगा था नशा, अब पुलिस के प्रयास से युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत

Thu, 13 Feb 2025 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Thu, 13 Feb 2025 11:04 PM IST
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Ajay was left alone due to losing his parents at the age of 10, started taking drugs daily, now with the efforts of the police he has become a source of inspiration for the youth.
नशा छोड़ने वाले अजय सिंह को थाने में कम्प्यूटर का काम सीखाते हएु पुलिस कर्मी। संवाद। 
रोहित जैन
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कालांवाली (सिरसा)। वर्ष 1990 के दशक में आमिर खान की एक फिल्म कयामत से कयामत तक के दृश्य में गाते नजर आते हैं कि अकेले हैं तो क्या गम है, चाहें तो हमारे बस में क्या नहीं है। यह पंक्ति कालांवाली निवासी अजय कुमार की जिंदगी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। मां-बाप के खोने के गम में नशे के दलदल में फंसे अजय कुमार की जिंदगी को खाकी ने बदल दिया। अब अजय कुमार नशा कर रहे युवाओं की अनमोल जिंदगी को संवारने में जुट गए है। वह नशा न करने के लिए युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।



इस गांव निवासी अजय कुमार 10 साल की उम्र में ही माता-पिता खोने के कारण अकेला पड़ गया था। अकेलेपन को दूर करने के लिए रोजाना नशा करने लगा था। थाना कालांवाली के प्रभारी रामफल और एएसआई सुखदर्शन सिंह ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए न अजय कुमार का नशा छुड़वाया है, बल्कि पुलिस चौकी में ही रख लिया है। आठ महीने पहले कालांवाली पुलिस के संपर्क मेंं आया। दो महीने काउंसिलिंग के बाद अब ये छह महीने से नशा नहीं कर रहा हैै।अजय कुमार अब पुलिस के साथ रहकर नशे की दलदल में फंसे युवाओं को नशे से दूर करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
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अजय कुमार ने बताया कि वह अपने मां-बाप का इकलौता बेटा है। उसने वर्ष 2009 में अपने पिता का और वर्ष 2010 में अपनी मां को खो दिया था। तीन बड़ी बहनों की शादी मां-बाप की मृत्यु से पहले हो गई थी। वह बिल्कुल अकेला पड़ गया था। वह अपनी पढ़ाई बचपन में ही छोड़कर महज 15 साल की उम्र में ड्राइवरी करके गुजारा करने लगा। ड्राइवरी के दौरान ही वह गलत संगत का शिकार होकर चिट्टे का सेवन करने लगा था। संवाद
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10 साल में करीब 70 लाख रुपये से अधिक का पी चुका था चिट्टा

अजय कुमार ने बताया कि वह वर्ष 2015 में ही चिट्टा पीने लगा था। वो रोजाना करीब दो हजार रुपये से अधिक का चिट्टा पीने लगा था। अकेले ड्राइवरी की दिहाड़ी से उसकी नशे की पूर्ति नहीं हो रही थी, जिसको लेकर वो अपने चिट्टा पीने का खर्चा निकालने के लिए ड्राइवरी के साथ नशा बेचने भी लगा था।

बहनाें के समझाने पर भी नहीं छोड़ पाया था लत

अजय कुमार ने बताया कि अपने छोटे भाई को नशे की दलदल में फंसता देख उनकी बड़ी बहनों ने भी उसे नशा छोड़ने के लिए खूब प्रेरित किया। उसने अपने परिवार के किसी सदस्य की बात नहीं मानी और नशे की दलदल में घुसता गया। उसने बताया कि उसकी कहानी सुनने पर एएसआई सुखदर्शन सिंह और थाना प्रभारी रामफल ने उसके दर्द को समझते हुए उसे समझाया और काउंसलिंग के माध्यम से बिना दवाइयों के नशे की लत से बाहर निकाला।


घर-घर जाकर प्रेरित कर रही है पुलिस टीमें- थाना प्रभारी

कालांवाली थाना प्रभारी रामफल ने बताया कि पुलिस लगातार हर गांव व शहर में नशा करने और नशा बेचने वालों को रोकने के लिए प्रयासरत हैं। आज भी पुलिस ने शहर कालांवाली के वार्ड नंबर 5 व 6 को नशामुक्त बनाने के लिए डोर टू डोर अभियान चलाया है। कोई भी युवक नशा छोड़ना चाहता है तो वो कालांवाली पुलिस से मिल सकता है। पुलिस प्रशासन के द्वारा उसका निःशुल्क इलाज करवाया जाएगा। यदि कोई नशा बेचता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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