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Sirsa News: खारी जमीन बनेगी कमाई का जरिया, एआई तकनीक से झींगा पालन को मिलेगा बढ़ावा
Wed, 28 Oct 2026 11:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 28 Oct 2026 11:14 PM IST
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सीडीएलयू के सीवी रमन सेमिनार हॉल में तकनीक आधारित झींगा पालन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित कार्य
सीडीएलयू में कार्यशाला व पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने रखा तकनीक, वित्तीय सहायता और बाजार को जोड़ने वाला मॉडल विकसित करने पर जोर
फोटो-- 28
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। हरियाणा की लवणता प्रभावित भूमि को आर्थिक अवसर में बदलने के लिए चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में एक कार्यशाला हुई। इसका उद्देश्य तकनीक आधारित झींगा पालन को बढ़ावा देना और किसानों की आय बढ़ाना था।
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस ने कोटक महिंद्रा बैंक की सीएसआर पहल कोटक कर्मा और सीडीएलयू के सहयोग से यह कार्यक्रम किया। यह एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित लवणीय झींगा पालन का विस्तार विषय पर केंद्रित था।
कार्यशाला में आईसीआरआईईआर ने एक नीति शोध-पत्र का विमोचन किया। इसका शीर्षक तालाब से डिजिटल मंच तक : सिरसा, हरियाणा में एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित झींगा पालन की आवश्यकता था।
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आईसीआरआईईआर की फेलो राया दास ने शोध-पत्र के मुख्य निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि सिरसा की लवणता प्रभावित भूमि पर आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह व्यावसायिक रूप से लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल झींगा पालन को बढ़ावा देगी।
शोध-पत्र के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित उपकरण किसानों को लाभ पहुंचाएंगे। ये उपकरण चारे का बेहतर उपयोग करने में मदद करेंगे। साथ ही, उत्पादन संबंधी जोखिम भी कम करेंगे।
निर्यात बाजारों की उत्पाद अनुरेखण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायता मिलेगी। इससे झींगा पालन की लागत और प्रबंधन में सुधार होगा। किसानों के लिए नए आर्थिक अवसर भी पैदा होंगे।
नीतियों और साझेदारी से झींगा पालन की सफलता
आईसीआरआईईआर के विशिष्ट प्रोफेसर अशोक गुलाटी ने झींगा पालन की सफलता के लिए स्पष्ट नीतिगत दृष्टिकोण को जरूरी बताया। उन्होंने बेहतर उत्पाद, आधुनिक कार्यप्रणालियों और मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। एआई और आईओटी आधारित तकनीकों को अपनाने से चारे की बचत हो सकती है। इससे उत्पादन प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। उन्होंने उत्पाद नवाचार, जोखिम प्रबंधन और किसानों को उपयुक्त कार्यप्रणालियों से जोड़ने को महत्वपूर्ण बताया। इस क्षेत्र में सफलता के लिए विभिन्न संस्थानों और हितधारकों के बीच मजबूत साझेदारी अहम है।
पोषण सुरक्षा और झींगा पालन मॉडल
भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग के पूर्व सचिव तरुण श्रीधर ने पोषण सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने बताया कि गेहूं और चावल से कैलोरी की जरूरत पूरी होती है, पर गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन भी आवश्यक है। देश को कुपोषण और अल्पपोषण की चुनौतियों से निपटना होगा। विकसित भारत के लक्ष्य के लिए लोगों को पर्याप्त पोषण उपलब्ध करवाना जरूरी है। मत्स्यपालन विभाग के पूर्व संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने सिरसा में एक ऐसा मॉडल विकसित करने की बात की। यह मॉडल व्यावसायिक रूप से लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल होना चाहिए। इसके लिए विज्ञान, तकनीक, वित्तीय सहायता और बाजार को जोड़ने वाली समन्वित व्यवस्था जरूरी है। सिरसा के अतिरिक्त उपायुक्त अर्पित संगल ने भी उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
वित्तीय सहायता और बाजार पर मंथन
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में किसानों को वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने पर चर्चा हुई। इस सत्र की अध्यक्षता अशोक गुलाटी ने की। सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के केएन राघवन, आईसीएआर-सीआईएफई रोहतक के वैज्ञानिक और स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने विचार रखे। चर्चा में एआई और आईओटी आधारित तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने पर जोर दिया गया। वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने और संस्थागत सहयोग मजबूत करने पर भी बात हुई। हरियाणा मत्स्य पालन विभाग, नाबार्ड, कोटक महिंद्रा बैंक और अन्य प्रतिनिधियों ने विचार-विमर्श किया। उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों, शीत भंडारण सुविधाओं, ऋण उपलब्धता और भूमि पट्टे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। हरियाणा की लवणता प्रभावित भूमि को आर्थिक अवसर में बदलने के लिए चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में एक कार्यशाला हुई। इसका उद्देश्य तकनीक आधारित झींगा पालन को बढ़ावा देना और किसानों की आय बढ़ाना था।
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस ने कोटक महिंद्रा बैंक की सीएसआर पहल कोटक कर्मा और सीडीएलयू के सहयोग से यह कार्यक्रम किया। यह एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित लवणीय झींगा पालन का विस्तार विषय पर केंद्रित था।
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कार्यशाला में आईसीआरआईईआर ने एक नीति शोध-पत्र का विमोचन किया। इसका शीर्षक तालाब से डिजिटल मंच तक : सिरसा, हरियाणा में एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित झींगा पालन की आवश्यकता था।
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आईसीआरआईईआर की फेलो राया दास ने शोध-पत्र के मुख्य निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि सिरसा की लवणता प्रभावित भूमि पर आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह व्यावसायिक रूप से लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल झींगा पालन को बढ़ावा देगी।
शोध-पत्र के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित उपकरण किसानों को लाभ पहुंचाएंगे। ये उपकरण चारे का बेहतर उपयोग करने में मदद करेंगे। साथ ही, उत्पादन संबंधी जोखिम भी कम करेंगे।
निर्यात बाजारों की उत्पाद अनुरेखण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायता मिलेगी। इससे झींगा पालन की लागत और प्रबंधन में सुधार होगा। किसानों के लिए नए आर्थिक अवसर भी पैदा होंगे।
नीतियों और साझेदारी से झींगा पालन की सफलता
आईसीआरआईईआर के विशिष्ट प्रोफेसर अशोक गुलाटी ने झींगा पालन की सफलता के लिए स्पष्ट नीतिगत दृष्टिकोण को जरूरी बताया। उन्होंने बेहतर उत्पाद, आधुनिक कार्यप्रणालियों और मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। एआई और आईओटी आधारित तकनीकों को अपनाने से चारे की बचत हो सकती है। इससे उत्पादन प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। उन्होंने उत्पाद नवाचार, जोखिम प्रबंधन और किसानों को उपयुक्त कार्यप्रणालियों से जोड़ने को महत्वपूर्ण बताया। इस क्षेत्र में सफलता के लिए विभिन्न संस्थानों और हितधारकों के बीच मजबूत साझेदारी अहम है।
पोषण सुरक्षा और झींगा पालन मॉडल
भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग के पूर्व सचिव तरुण श्रीधर ने पोषण सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने बताया कि गेहूं और चावल से कैलोरी की जरूरत पूरी होती है, पर गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन भी आवश्यक है। देश को कुपोषण और अल्पपोषण की चुनौतियों से निपटना होगा। विकसित भारत के लक्ष्य के लिए लोगों को पर्याप्त पोषण उपलब्ध करवाना जरूरी है। मत्स्यपालन विभाग के पूर्व संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने सिरसा में एक ऐसा मॉडल विकसित करने की बात की। यह मॉडल व्यावसायिक रूप से लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल होना चाहिए। इसके लिए विज्ञान, तकनीक, वित्तीय सहायता और बाजार को जोड़ने वाली समन्वित व्यवस्था जरूरी है। सिरसा के अतिरिक्त उपायुक्त अर्पित संगल ने भी उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
वित्तीय सहायता और बाजार पर मंथन
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में किसानों को वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने पर चर्चा हुई। इस सत्र की अध्यक्षता अशोक गुलाटी ने की। सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के केएन राघवन, आईसीएआर-सीआईएफई रोहतक के वैज्ञानिक और स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने विचार रखे। चर्चा में एआई और आईओटी आधारित तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने पर जोर दिया गया। वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने और संस्थागत सहयोग मजबूत करने पर भी बात हुई। हरियाणा मत्स्य पालन विभाग, नाबार्ड, कोटक महिंद्रा बैंक और अन्य प्रतिनिधियों ने विचार-विमर्श किया। उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों, शीत भंडारण सुविधाओं, ऋण उपलब्धता और भूमि पट्टे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।