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Sirsa News: सफाई पर बनी सहमति, संस्थाएं अपने खर्च पर करवाएंगी उठान व दवा छिड़काव, पांच घंटे की वार्ता के बाद सफाई कर्मचारी नेताओं ने दी मंजूरी
Fri, 21 Aug 2026 10:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 21 Aug 2026 10:13 PM IST
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सिरसा। सफाई कर्मचारियों के आंदोलन के बीच शहर में बढ़ते कूड़े के संकट को लेकर शुक्रवार को सकारात्मक पहल हुई। राजनीतिक, सामाजिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने करीब पांच घंटे तक कर्मचारी नेताओं से बातचीत की। इसके बाद निजी स्तर पर कूड़ा उठाने और दवा छिड़काव का रास्ता साफ हो गया।
सुबह सिरसा क्लब में सर्वदलीय एवं सामाजिक बैठक हुई। इसमें राजनीतिक दलों, व्यापारिक संगठनों, चिकित्सकों, धार्मिक संस्थाओं और समाजसेवियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने शहर में बिगड़ती सफाई व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। शाम को प्रतिनिधिमंडल नगर परिषद कार्यालय स्थित सफाई कर्मचारियों के धरनास्थल पर पहुंचा। यहां कर्मचारी नेताओं नरेश कुमार और मनोज अठवाल के साथ चर्चा हुई।
लंबी बातचीत के बाद कर्मचारी नेताओं ने कहा कि संस्थाएं अपने स्तर और खर्च पर सड़कों व सार्वजनिक स्थानों से कूड़ा उठवा सकती हैं। कूड़े पर दवा का छिड़काव कर उसे ढकने पर भी यूनियन को आपत्ति नहीं होगी। स्कूलों और अन्य संवेदनशील स्थानों के आसपास भी यही व्यवस्था लागू की जा सकेगी।
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हालांकि कर्मचारियों ने कहा कि इस कार्य में सरकारी राशि खर्च नहीं होनी चाहिए। यदि सरकारी तौर पर पैसा खर्च किया गया तो काम रुकवा दिया जाएगा। सफाई कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे।
17 मांगों पर बनी थी सहमति
कर्मचारी नेताओं के अनुसार 13 मई को सरकार के साथ बैठक में 22 मांगों पर चर्चा हुई थी। इनमें 17 पर सहमति बनी थी। 30 जून तक आदेश जारी करने का आश्वासन मिला था लेकिन लिखित आदेश नहीं हुए। इसके बाद कर्मचारियों ने दोबारा आंदोलन शुरू किया। प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, ठेका प्रथा खत्म करना, न्यूनतम वेतन, ईएसआई-ईपीएफ, जोखिम भत्ता, नियमित भर्ती और रोजगार सुरक्षा शामिल हैं।
शहरवासियों को राहत की उम्मीद
निजी स्तर पर कूड़ा उठाने की सहमति से शहर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर हटने की उम्मीद जगी है। इससे दुर्गंध और संक्रमण के खतरे से भी राहत मिल सकती है। यूनियन नेताओं ने कहा कि हमारी नाराजगी सरकार से है। हम नहीं चाहते कि आंदोलन के कारण शहरवासियों के स्वास्थ्य पर असर पड़े। संस्थाएं अपने खर्च पर कूड़ा उठवाती हैं तो यूनियन को कोई आपत्ति नहीं होगी।
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सुबह सिरसा क्लब में सर्वदलीय एवं सामाजिक बैठक हुई। इसमें राजनीतिक दलों, व्यापारिक संगठनों, चिकित्सकों, धार्मिक संस्थाओं और समाजसेवियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने शहर में बिगड़ती सफाई व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। शाम को प्रतिनिधिमंडल नगर परिषद कार्यालय स्थित सफाई कर्मचारियों के धरनास्थल पर पहुंचा। यहां कर्मचारी नेताओं नरेश कुमार और मनोज अठवाल के साथ चर्चा हुई।
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लंबी बातचीत के बाद कर्मचारी नेताओं ने कहा कि संस्थाएं अपने स्तर और खर्च पर सड़कों व सार्वजनिक स्थानों से कूड़ा उठवा सकती हैं। कूड़े पर दवा का छिड़काव कर उसे ढकने पर भी यूनियन को आपत्ति नहीं होगी। स्कूलों और अन्य संवेदनशील स्थानों के आसपास भी यही व्यवस्था लागू की जा सकेगी।
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हालांकि कर्मचारियों ने कहा कि इस कार्य में सरकारी राशि खर्च नहीं होनी चाहिए। यदि सरकारी तौर पर पैसा खर्च किया गया तो काम रुकवा दिया जाएगा। सफाई कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे।
17 मांगों पर बनी थी सहमति
कर्मचारी नेताओं के अनुसार 13 मई को सरकार के साथ बैठक में 22 मांगों पर चर्चा हुई थी। इनमें 17 पर सहमति बनी थी। 30 जून तक आदेश जारी करने का आश्वासन मिला था लेकिन लिखित आदेश नहीं हुए। इसके बाद कर्मचारियों ने दोबारा आंदोलन शुरू किया। प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, ठेका प्रथा खत्म करना, न्यूनतम वेतन, ईएसआई-ईपीएफ, जोखिम भत्ता, नियमित भर्ती और रोजगार सुरक्षा शामिल हैं।
शहरवासियों को राहत की उम्मीद
निजी स्तर पर कूड़ा उठाने की सहमति से शहर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर हटने की उम्मीद जगी है। इससे दुर्गंध और संक्रमण के खतरे से भी राहत मिल सकती है। यूनियन नेताओं ने कहा कि हमारी नाराजगी सरकार से है। हम नहीं चाहते कि आंदोलन के कारण शहरवासियों के स्वास्थ्य पर असर पड़े। संस्थाएं अपने खर्च पर कूड़ा उठवाती हैं तो यूनियन को कोई आपत्ति नहीं होगी।