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सीडीएलयू में एडमीशन से पहले ही प्रदर्शन का सिलसिला शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Mon, 11 Jul 2016 11:31 PM IST
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सीडीएलयू
- फोटो : Bureau
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री-अपीयर वाले विद्यार्थियों को पांचवें सेमेस्टर में प्रवेश न देने तथा छह की बजाय पांच साल में ही बीए करने के सीडीएलयू के नए फरमान के विरोध में सोमवार को विवि में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने विवि प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने विद्यार्थियों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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अभी दाखिलों की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई थी कि सीडीएलयू में धरने-प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया है। सोमवार को एबीवीपी के बैनर तले राजकीय नेशनल कॉलेज, राजकीय महिला कॉलेज तथा सीएमके कॉलेज के छात्र व छात्राओं ने सुबह 11 बजे कॉलेज से उपायुक्त व वीसी कार्यालय तक पैदल मार्च करते हुए विरोध प्रदर्शन किया, जो कि दोपहर डेढ़ बजे तक चलता रहा। इस दौरान सबसे पहले विद्यार्थी लघु सचिवालय पहुंचे और वहां एसडीएम परमजीत सिंह चहल को सरकार द्वारा लागू किए गए छात्र विरोधी दोनों नियमों को बदलने तथा सभी विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाने की मांग का ज्ञापन सौंपा। इसके बाद सभी सीडीएलयू में वीसी ऑफिस तक पैदल मार्च करते हुए गए और वहां रजिस्ट्रार के समक्ष अपनी समस्याएं व मांगें रखीं।
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प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने सीडीएलयू प्रशासन पर अनेक प्रकार की लापरवाहियां बरतने और छात्र विरोधी कार्य करने के भी आरोप लगाए गए। विद्यार्थियों ने यहां तक आरोप लगाया कि सीडीएलयू में कार्यरत जिन कर्मचारियों के बच्चों की री-अपीयर आई थी, उनके लिए रातों रात कमेटी बनाकर उन्हें पास कर दिया गया, जबकि आम बच्चों के अच्छे किए गए पेपरों में भी कम अंक देकर उनकी री-अपीयर घोषित कर दी, वहीं अनेक विद्यार्थियों के जीरो अंक दिए गए हैं।
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विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि सीडीएलयू प्रशासन अपनी कमाई के चक्कर में प्रतिवर्ष ज्यादातर विद्यार्थियों का परिणाम री अपीयर निकाल देता है तो वहीं परिणाम घोषित करने के बावजूद कई-कई दिनों तक न तो सीडीएलयू की साइट पर परिणाम नजर आते हैं और न ही डीएमसी मिलती है। ऐसे में विद्यार्थियों को री अपीयर के फॉर्म भरने के लिए 750 रुपये, गोपनीय परिणाम प्राप्त करने के नाम पर 200 रुपये तथा पुन: मूल्यांकन के नाम पर 300 रुपये की चपत खानी पड़ती है।
रजिस्ट्रार प्रो. असीम मिगलानी ने कहा कि विद्यार्थियों की जो भी मांगें हैं, उनमें से जो नियमों के अंतर्गत होंगी, उन्हें पूरी कर दिया जाएगा तथा विद्यार्थी जो आरोप लगा रहे हैं, उनकी जांच करेंगे और सही पाए जाने पर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। पांचवें सेमेस्टर में प्रवेश का निर्णय सरकार का है न कि यूनिवर्सिटी का। इसके अतिरिक्त केयूके में प्रवेश देने का नियम बदला गया है तो वे उसकी कॉपी मंगवाएंगे तथा छात्र हित में यहां भी उक्त नियम को लागू करेंगे।
सीडीएलयू के कारनामों से विद्यार्थी दंग
सीडीएलयू में प्रदर्शन कर रही छात्राओं में से महिला कॉलेज की नवनीत ने बताया कि बीए प्रथम वर्ष में उसने गणित का पेपर दिया था, लेकिन उसका परिणाम न कॉलेज से मिला न ही यूनिवर्सिटी से। जब इस बारे पूछताछ करने की गई तो उन पर ही आरोप लगा दिया कि पेपर ही नहीं दिया होगा। इसी प्रकार सरस्वती ने बताया कि उसने बीए के पांचवें सेमेस्टर में भूगोल की परीक्षा दी, लेकिन परिणाम में उसे अनुपस्थित दिखा रखा है। सीएमके कॉलेज की ट्विंकल के अनुसार अच्छे पेपर देने के बावजूद उसे एक पेपर में जीरो अंक दे रखे हैं तो महिला महाविद्यालय की 90 प्रतिशत छात्राओं को छठे सेमेस्टर के अंग्रेजी के पेपर में फेल कर रखा है। एक छात्रा ने बताया कि उसे एक ही पेपर में दूसरी बार भी उतने ही अंकों से री-अपीयर दे रखी है तो एक अन्य छात्रा के अनुसार अच्छी तैयारी कर चार पेपरों की जूद उसे उनमें फिर से फेल कर दिया गया है।
पुलिस व रजिस्ट्रार से भिड़े गुस्साए विद्यार्थी
पहले लघु सचिवालय तथा उसके बाद वीसी ऑफिस में उनके पीए व बाद में रजिस्टार डॉ. असीम मिलगानी के साथ विद्यार्थियों की तीखी बहस हुई। दोनों जगहों पर आक्रोशित विद्यार्थियों ने अधिकारियों के पास जाकर बात करने की बात को लेकर हंगामा किया। लघु सचिवालय में घुसने से रोकने पर पुलिस को चेतावनी दी। रजिस्ट्रार के कमरे में पहले ही दो पुलिस कर्मियों के बैठे मिलने से विद्यार्थी और ज्यादा भड़क गए और या तो उन्हें केबिन से बाहर निकालने या फिर खुद बाहर आकर विद्यार्थियों से बात करने का अल्टीमेटम दिया, जिसके बाद रजिस्ट्रार को ही अपने केबिन से बाहर आना पड़ा। इस दौरान विद्यार्थियों ने यूनिवर्सिटी कर्मचारियों पर एडमिशन से लेकर रिजल्ट निकलवाने तक के हर काम में पैसे खाने तथा प्रतिवर्ष परिणामों में विद्यार्थियों को फेल कर मोटी कमाई करने का धंधा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली बार भी 45 विद्यार्थियों को फेल किया गया था, लेकिन प्रदर्शन के बाद जब उत्तर पुस्तिकाओं की उनके सामने ही दोबारा जांच की गई तो 38 विद्यार्थी पास पाए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाएं जांचने वाले गंभीरता से पेपर जांचने के बजाय कानों में लीड लगाकर गाने सुनते हुए पेपर जांच करते हैं, जिसे उन्होंने स्वयं अपनी आंखों से देखा है।
विद्यार्थियों की मांगें
विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रार को सौंपे लिखित मांग पत्र में री-अपीयर वाले विद्यार्थियों को भी पांचवे सैमेस्टर में प्रवेश देने, बीए को पूर्व की भांति छह साल में किए जाने, री अपियर वाले विशेषकर जीरो अंक वाले विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच करने के लिए एक कमेटी बनाने तथा उसमें विद्यार्थियों को भी शामिल करने, एडमिशन की तिथि आगे बढ़ाने या 14 जुलाई के बाद एडमिशन देने पर बिना लेट फीस के एडमिशन देने, परीक्षा परिणाम साइट पर दिखना सुनिश्चित करने की मांग की तथा चेतावनी दी कि यदि दो दिन में उनकी मांगें पूरी नहीं की तो पूरे प्रदेश में विद्यार्थी सड़कों पर उतरकर पुतला फूंकेंगे।