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Sirsa News: सिंचाई के बाद मुरझाई नरमे की फसल आर्थिक संकट के डर से सहमे किसान
Wed, 24 Jun 2026 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 24 Jun 2026 10:47 PM IST
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ओढ़ां क्षेत्र में मुरझाई नरमे की फसल।
ओंढ़ा। क्षेत्र में इन दिनों सिंचाई के बाद नरमे की फसल के मुरझाने की समस्या सामने आ रही है जिससे किसान चिंतित हैं। किसान इसे किसी रोग का प्रभाव मानकर आशंकित हैं जबकि कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या बढ़ते तापमान और जड़ों पर प्रभाव के कारण उत्पन्न हो रही है। विशेषज्ञों ने किसानों को आवश्यक दवा के छिड़काव की सलाह दी है।
नुहियांवाली के किसान जगदीश सहारण, कृष्ण लाल, जसराज, रोशनलाल और मोहनलाल ने बताया कि उन्होंने चार दिन पहले नरमे की सिंचाई की थी जिसके अगले ही दिन फसल झुलसी हुई अवस्था में नजर आई। किसानों का कहना है कि यदि फसल सामान्य स्थिति में नहीं आई तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनके अनुसार यह समस्या केवल सिंचित खेतों में ही देखी जा रही है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति पैराविल्ट (जड़ गलन) रोग के कारण होती है, जो फंगस और बढ़ते तापमान के प्रभाव से उत्पन्न होता है। यह समस्या अधिक वर्षा या तेज धूप के बाद आम तौर पर देखने को मिलती है। फसल की फूल और फल अवस्था में इसका असर अधिक होता है। अत्यधिक सिंचाई से जड़ों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और तेज धूप के कारण पौधे जल असंतुलन में आकर 12 से 24 घंटे में मुरझा सकते हैं। प्रभावित पौधों की पत्तियां पीली होकर झड़ती नहीं बल्कि पौधे पर ही लटकी रहती हैं।
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नुहियांवाली के किसान जगदीश सहारण, कृष्ण लाल, जसराज, रोशनलाल और मोहनलाल ने बताया कि उन्होंने चार दिन पहले नरमे की सिंचाई की थी जिसके अगले ही दिन फसल झुलसी हुई अवस्था में नजर आई। किसानों का कहना है कि यदि फसल सामान्य स्थिति में नहीं आई तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनके अनुसार यह समस्या केवल सिंचित खेतों में ही देखी जा रही है।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति पैराविल्ट (जड़ गलन) रोग के कारण होती है, जो फंगस और बढ़ते तापमान के प्रभाव से उत्पन्न होता है। यह समस्या अधिक वर्षा या तेज धूप के बाद आम तौर पर देखने को मिलती है। फसल की फूल और फल अवस्था में इसका असर अधिक होता है। अत्यधिक सिंचाई से जड़ों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और तेज धूप के कारण पौधे जल असंतुलन में आकर 12 से 24 घंटे में मुरझा सकते हैं। प्रभावित पौधों की पत्तियां पीली होकर झड़ती नहीं बल्कि पौधे पर ही लटकी रहती हैं।
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