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यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों को वापस लाने के लिए प्रशासन अलर्ट, स्थिति जानने के लिए फील्ड में उतरे अधिकारी
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घर लौटने पर बेटे को मिठाई खिलाती विद्यार्थी की मां।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे विद्यार्थियों को स्वदेश में लाने के लिए प्रशासन अलर्ट मोड में आ चुका है। यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों की स्थिति उनके परिजनों से जानने के लिए अधिकारी फील्ड में उतर उनके घरों तक पहुंच रहे हैं। अधिकारी अब यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों से बच्चों की पूर्ण जानकारी हासिल कर रहे हैं ताकि उनके साथ संपर्क करके उन्हें दूसरे देश में पहुंचाया जा सके। वहीं कई विद्यार्थी अब अपने घरों में भी पहुंचना शुरू हो चुके हैं। फिलहाल जिले के कई विद्यार्थी अभी भी यूक्रेन के शहरों में ही फंसे हुए हैं।
यूक्रेन छोड़कर कई विद्यार्थी अब जान जोखिम में डालकर रोमानिया, हंगरी, पोलैंड व अन्य देशों में पहुंच चुके हैं। हालांकि दूसरे देश में जाने के बाद उन्हें कुछ राहत की सांस ली है। वहीं परिजन भी लगातार अपने बच्चों के साथ संपर्क में हैं। ऐसे में उनके बच्चे अब कौन से स्थान पर है इसकी सही जानकारी लेने के लिए प्रशासन ने टीमें भी फील्ड में उतारी हैं। शहर की अलग-अलग कॉलोनियों के करीब 20 विद्यार्थी यूक्रेन में पढ़ाई करने के लिए गए हुए थे। इनमें से कई विद्यार्थी पहले ही यूक्रेन छोड़ वापस घर आ गए और कई विद्यार्थी अभी भी यूक्रेन के कई शहरों में फंसे हुए हैं। दूसरे यूक्रेन के शहरों में बमबारी होने के कारण उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल पा रहा। जिले में अब तक नौ विद्यार्थी यूक्रेन से जिले में पहुंच चुके है। जबकि 30 के करीब विद्यार्थी अभी भी वहीं पर फंसे हुए हैं।
रोमानिया से होकर घर पहुंचा छात्र भारत बरनवाल, परिजनों के खिले चेहरे
फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी भारत बरनवाल बीती रात को यूक्रेन से स्वदेश लौटा है। उसने दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंच जब पिता सुरेश बरनवाल को भारत में पहुंचने की जानकारी दी तो परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। बेेटे के वापस आने की सूचना मिलते ही परिजनों के चेहरों पर रौनक वापस लौट आई। वहीं भारत बरनवाल ने अपने सफर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह यूक्रेन में विनितसिया में पढ़ाई के लिए गया हुआ था। एमबीबीएस में उसका तीसरा वर्ष था। 24 फरवरी को रूस की ओर से हमला किया गया था। जिसके बाद सायरन बजना शुरू हो गया। जैसे तैसे कर उन्होंने दो से तीन दिन वहां पर परेशान होकर निकाले। इसके बाद वह विनितसिया से एजेंसी की बस में सवार होकर लवीब में पहुंचे। वहां से वह रोमानिया देश में एंट्री के लिए पहुंच गए थे। विनितसिया से रोमानिया बॉर्डर तक उन्हें करीब चार घंटे का समय लगा। लेकिन रोमानिया बॉर्डर पर भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें 24 घंटे तक इंतजार करना पड़ा था। भीड़ अधिक होने के कारण यूक्रेन जवानों की तरफ से भी उनके साथ मारपीट की जा रही थी। 24 घंटे बाद वे रोमानिया देश में पहुंच गए और इसके बाद उनकी लिस्ट तैयार की गई तो उन्हें दिल्ली के लिए फ्लाइट मिल गई। दिल्ली में पहुंचने के बाद उन्होंने अपने परिजनों को सूचना दी।
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भारत बोला: किसी भी तरह से यूक्रेन से निकलना था बाहर
वहीं भारत ने बताया कि जब वह विनितसिया में था तो दूर बम बारी की आवाज आ रही थी। तीन दिन उन्होंने काफी परेशानी में वहां पर गुजारे। इसके बाद उन्हें यूक्रेन से दूसरे देश में निकलने की ठान ली थी। जान को जोखिम में डालकर वह वहां से रोमानिया की तरफ चल पड़े। इससे पहले उन्होंने दूसरे देशों की तरफ जाने वाले कई छात्रों से भी संपर्क किया। लेकिन वहां पर भीड़ अधिक होने की जानकारी मिलती रही। बाद में वह रोमानिया देश के बॉर्डर पर पहुंचे। 24 घंटे इंतजार के बाद उन्हें रोमानिया में एंट्री मिल पाई। समय निकलता देख उनकी परेशानी भी पहले से अधिक बढ़ती जा रही थी। उन्होंने किसी भी तरह इंडिया में पहुंचना था। इंडिया की कहीं की भी फ्लाइट मिलती वह उसमें सवार होते। लेकिन किस्मत अच्छी थी कि उन्हें दिल्ली की ही फ्लाइट मिल गई।
रोडवेज कर्मचारी का बेटा पहुंचा दिल्ली, बोला पल-पल बढ़ रहा था खतरा
वहीं रोडवेज में तैनात कर्मचारी जगबीर सिंह का बेटा विनित चौधरी भी बीती रात देर रात को स्वदेश लौट आया है। विनित कुमार ने बताया कि वह इवानों शहर में पढ़ाई के लिए रह रहा था। लेकिन रूस की ओर से हमला किए जाने के कारण वह वहां से देश लौटना चाहता था। इवानों से बस में सवार होकर रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचा। उस समय दूर धमाके हो रहे थे। रोमानिया बॉर्डर पर लोगों की भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें 24 घंटे बॉर्डर पार करने में लग गए थे। जैसे तैसे कर वह रोमानिया में पहुंचे। वहीं पर जो लोग पहले पहुंचे हुए थे उन्हें पहले वापस भेजा जा रहा था। इसके बाद उनकी लिस्ट तैयार की गई तो उन्हें फ्लाइट मिल सकी। वह दिल्ली में पहुंचा है और वहां से वह अपने मामा के पास गुरुग्राम में है।
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यूक्रेन छोड़कर कई विद्यार्थी अब जान जोखिम में डालकर रोमानिया, हंगरी, पोलैंड व अन्य देशों में पहुंच चुके हैं। हालांकि दूसरे देश में जाने के बाद उन्हें कुछ राहत की सांस ली है। वहीं परिजन भी लगातार अपने बच्चों के साथ संपर्क में हैं। ऐसे में उनके बच्चे अब कौन से स्थान पर है इसकी सही जानकारी लेने के लिए प्रशासन ने टीमें भी फील्ड में उतारी हैं। शहर की अलग-अलग कॉलोनियों के करीब 20 विद्यार्थी यूक्रेन में पढ़ाई करने के लिए गए हुए थे। इनमें से कई विद्यार्थी पहले ही यूक्रेन छोड़ वापस घर आ गए और कई विद्यार्थी अभी भी यूक्रेन के कई शहरों में फंसे हुए हैं। दूसरे यूक्रेन के शहरों में बमबारी होने के कारण उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल पा रहा। जिले में अब तक नौ विद्यार्थी यूक्रेन से जिले में पहुंच चुके है। जबकि 30 के करीब विद्यार्थी अभी भी वहीं पर फंसे हुए हैं।
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रोमानिया से होकर घर पहुंचा छात्र भारत बरनवाल, परिजनों के खिले चेहरे
फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी भारत बरनवाल बीती रात को यूक्रेन से स्वदेश लौटा है। उसने दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंच जब पिता सुरेश बरनवाल को भारत में पहुंचने की जानकारी दी तो परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। बेेटे के वापस आने की सूचना मिलते ही परिजनों के चेहरों पर रौनक वापस लौट आई। वहीं भारत बरनवाल ने अपने सफर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह यूक्रेन में विनितसिया में पढ़ाई के लिए गया हुआ था। एमबीबीएस में उसका तीसरा वर्ष था। 24 फरवरी को रूस की ओर से हमला किया गया था। जिसके बाद सायरन बजना शुरू हो गया। जैसे तैसे कर उन्होंने दो से तीन दिन वहां पर परेशान होकर निकाले। इसके बाद वह विनितसिया से एजेंसी की बस में सवार होकर लवीब में पहुंचे। वहां से वह रोमानिया देश में एंट्री के लिए पहुंच गए थे। विनितसिया से रोमानिया बॉर्डर तक उन्हें करीब चार घंटे का समय लगा। लेकिन रोमानिया बॉर्डर पर भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें 24 घंटे तक इंतजार करना पड़ा था। भीड़ अधिक होने के कारण यूक्रेन जवानों की तरफ से भी उनके साथ मारपीट की जा रही थी। 24 घंटे बाद वे रोमानिया देश में पहुंच गए और इसके बाद उनकी लिस्ट तैयार की गई तो उन्हें दिल्ली के लिए फ्लाइट मिल गई। दिल्ली में पहुंचने के बाद उन्होंने अपने परिजनों को सूचना दी।
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भारत बोला: किसी भी तरह से यूक्रेन से निकलना था बाहर
वहीं भारत ने बताया कि जब वह विनितसिया में था तो दूर बम बारी की आवाज आ रही थी। तीन दिन उन्होंने काफी परेशानी में वहां पर गुजारे। इसके बाद उन्हें यूक्रेन से दूसरे देश में निकलने की ठान ली थी। जान को जोखिम में डालकर वह वहां से रोमानिया की तरफ चल पड़े। इससे पहले उन्होंने दूसरे देशों की तरफ जाने वाले कई छात्रों से भी संपर्क किया। लेकिन वहां पर भीड़ अधिक होने की जानकारी मिलती रही। बाद में वह रोमानिया देश के बॉर्डर पर पहुंचे। 24 घंटे इंतजार के बाद उन्हें रोमानिया में एंट्री मिल पाई। समय निकलता देख उनकी परेशानी भी पहले से अधिक बढ़ती जा रही थी। उन्होंने किसी भी तरह इंडिया में पहुंचना था। इंडिया की कहीं की भी फ्लाइट मिलती वह उसमें सवार होते। लेकिन किस्मत अच्छी थी कि उन्हें दिल्ली की ही फ्लाइट मिल गई।
रोडवेज कर्मचारी का बेटा पहुंचा दिल्ली, बोला पल-पल बढ़ रहा था खतरा
वहीं रोडवेज में तैनात कर्मचारी जगबीर सिंह का बेटा विनित चौधरी भी बीती रात देर रात को स्वदेश लौट आया है। विनित कुमार ने बताया कि वह इवानों शहर में पढ़ाई के लिए रह रहा था। लेकिन रूस की ओर से हमला किए जाने के कारण वह वहां से देश लौटना चाहता था। इवानों से बस में सवार होकर रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचा। उस समय दूर धमाके हो रहे थे। रोमानिया बॉर्डर पर लोगों की भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें 24 घंटे बॉर्डर पार करने में लग गए थे। जैसे तैसे कर वह रोमानिया में पहुंचे। वहीं पर जो लोग पहले पहुंचे हुए थे उन्हें पहले वापस भेजा जा रहा था। इसके बाद उनकी लिस्ट तैयार की गई तो उन्हें फ्लाइट मिल सकी। वह दिल्ली में पहुंचा है और वहां से वह अपने मामा के पास गुरुग्राम में है।