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आशा, आंगनबाड़ी और मिड-डे मील वर्कर्स लामबंद
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Mon, 01 Feb 2016 12:59 AM IST
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सिरसा और फतेहाबाद जिलों की आशा वर्कर्स यूनियन, मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन व आंगनबाड़ी वर्कर एवं सहायक यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में सीआईटीयू के बैनर तले रविवार को सिरसा में प्रदर्शन किया गया।
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प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने बरनाला रोड पर यातायात जाम कर मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सांसद को संबोधित ज्ञापन मौके पर पहुंचे सीटीएम बिजेंद्र सिंह को सौंपा। इससे पूर्व चौधरी देवीलाल पार्क में सभा का आयोजन किया गया।
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रविवार को टाउन पार्क में सिरसा और फतेहाबाद जिलों की आशा वर्कर्स यूनियन, मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन व आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं सहायकों यूनियन की सदस्य एकत्रित हुईं। जिसके बाद बरनाला रोड स्थित चौधरी देवीलाल पार्क में सभा का आयोजन किया गया।
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सभा को संबोधित करते हुए मिड-डे मील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव जयभगवान ने कहा कि जब से केंद्र में भाजपा की सरकार आई है तब से परियोजनाओं को बरबाद करने और उन्हें बंद करने पर तुली हुई है। समेकित बाल विकास परियोजना, मिड-डे मील परियोजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना देश में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण में बेहतर योगदान दे रही है।
इन परियोजनाओं को स्थायी बनाने की जरूरत है परंतु केंद्र सरकार ने पिछले बजट में भारी कटौती की है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को ठेके पर देने के प्रयास चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील कर्मियों समेत इन योजनाओं में एक करोड़ के करीब महिला कर्मी काम कर रही हैं। जिन्हें एक हजार, दो हजार और चार हजार रुपये तक प्रति माह मेहनताना मिल रहा है।
इस दौरान यूनियन की नेता गगनदीप, राजरानी, सरिना, सीतू, जगतार सिंह, विजय ढुकड़ा, रमेश जांडली, राजेंद्र फतेहपुरिया, राजकुमार सेखुपुरिया, महेंद्र शर्मा आदि नेताओं ने परियोजना कर्मियों का भयंकर शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार उल्टे वर्करों को हटाने, कम वेतन देने व काम का बोझ बढ़ाने का काम कर रही है।
ये हैं मांगें
प्रदर्शन कर रही आशा वर्कर्स यूनियन, मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन व आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं सहायकों यूनियन की सदस्यों की मांगों में सभी परियोजनाओं को स्थायी किया जाए, सभी वर्करों को न्यूनतम वेतन 15 हजार रुपये प्रति माह दिया जाए, पेंशन, स्वास्थ्य लाभ समेत तमाम सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान किए जाएं।
इसके अलावा आगामी बजट में परियोजनाओं के लिए पर्याप्त पैसा मुहैया करवाया जाए, वर्करों को न्यूनतम वेतन दिया जाए। कर्मियों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो एक मार्च को केंद्र सरकार की शव यात्राएं निकाली जाएंगी।
सभा के बाद सभी कर्मी नारेबाजी करते हुए पंचायत भवन की ओर सांसद को ज्ञापन देने के लिए रवाना हुए। पुलिस लाइन के गेट के निकट सीटीएम बिजेंद्र सिंह ने स्वयं पहुंचे।
सांसद के न आने पर प्रदर्शन कारी भड़क उन्होंने बरनाला रोड पर यातायात जाम कर दिया। दस मिनट बाद प्रदर्शनकारी ज्ञापन देने को तैयार हुए। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी तो वे आंदोलन को तेज कर देंगे।