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Sirsa News: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहचानेंगी बच्चों के शारीरिक विकास में देरी के शुरुआती संकेत
Tue, 15 Sep 2026 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 15 Sep 2026 11:17 PM IST
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फोटो - 29
- माधोसिंघाना में 50 कार्यकर्ताओं को दिया प्रशिक्षण, समय पर उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र भेजने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। महिला एवं बाल विकास विभाग ने मंगलवार को गांव माधोसिंघाना में एक दिवसीय खंड स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया। यह प्रशिक्षण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए था।
इसमें शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों में शारीरिक, मानसिक, बोलने और सामाजिक विकास में देरी की शुरुआती पहचान के बारे में जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण में खंड की 50 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
सुपरवाइजर सुष्मिता ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के लगातार संपर्क में रहती हैं। इसलिए विकास संबंधी देरी के लक्षण पहचानने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कुछ खतरे के संकेत बताए।
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नौ माह तक बच्चा न बैठे, 18 माह तक न चले या 16 माह तक एक भी शब्द न बोले तो यह देरी का संकेत है। नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना या आंखों से संपर्क न बनाना भी महत्वपूर्ण है।
पहचान और उपचार के निर्देश
कार्यकर्ताओं को देखो-पूछो-भेजो के तीन चरणों के बारे में बताया गया। विकास में देरी की आशंका होने पर बच्चे को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजने के निर्देश दिए गए। जिला नागरिक अस्पताल भेजने के लिए भी कहा गया। कार्यकर्ताओं को दैनिक डायरी में भेजे गए मामलों का रिकॉर्ड रखने को कहा गया। मातृ-शिशु सुरक्षा कार्ड का सही उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण के अंत में सभी ने बच्चों की समय पर जांच और रिपोर्टिंग का संकल्प लिया।
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- माधोसिंघाना में 50 कार्यकर्ताओं को दिया प्रशिक्षण, समय पर उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र भेजने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। महिला एवं बाल विकास विभाग ने मंगलवार को गांव माधोसिंघाना में एक दिवसीय खंड स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया। यह प्रशिक्षण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए था।
इसमें शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों में शारीरिक, मानसिक, बोलने और सामाजिक विकास में देरी की शुरुआती पहचान के बारे में जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण में खंड की 50 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
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सुपरवाइजर सुष्मिता ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के लगातार संपर्क में रहती हैं। इसलिए विकास संबंधी देरी के लक्षण पहचानने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कुछ खतरे के संकेत बताए।
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नौ माह तक बच्चा न बैठे, 18 माह तक न चले या 16 माह तक एक भी शब्द न बोले तो यह देरी का संकेत है। नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना या आंखों से संपर्क न बनाना भी महत्वपूर्ण है।
पहचान और उपचार के निर्देश
कार्यकर्ताओं को देखो-पूछो-भेजो के तीन चरणों के बारे में बताया गया। विकास में देरी की आशंका होने पर बच्चे को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजने के निर्देश दिए गए। जिला नागरिक अस्पताल भेजने के लिए भी कहा गया। कार्यकर्ताओं को दैनिक डायरी में भेजे गए मामलों का रिकॉर्ड रखने को कहा गया। मातृ-शिशु सुरक्षा कार्ड का सही उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण के अंत में सभी ने बच्चों की समय पर जांच और रिपोर्टिंग का संकल्प लिया।