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बॉटनी और जूलॉजी के विद्यार्थियों ने आठ महीने से प्रयोगशालाओं में कक्षाएं लगाने और किताबें इश्यू न होने पर वीसी कार्यालय में जताय
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प्रोफेसर बोलीं- नया मकान शिफ्ट करने पर आती है दिक्कत, छात्राएं बोली- खाली प्लॉट में सामान लेकर नहीं बैठते
सिरसा। एमएससी बॉटनी और ज्योलॉजी के विद्यार्थियों ने वीरवार को सीडीएलयू में वीसी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने पिछले एक साल से क्लासरूम न मिलने पर नारेबाजी कर रोष जताया। विद्यार्थियों की मांग है कि उन्हें किताबें इश्यू नहीं की जा रही है। कक्षाएं लगाने के लिए कमरे नहीं और उनकी कक्षाएं भी साइंस विभाग की प्रयोगशालाओं में लग रही है। छात्र और छात्राएं वीसी से मिलना चाहती थी, वीसी ने साइंस ब्लाक के तीन प्रोफेसरों को ही अपने कमरे में ही बुला लिया और मामला सुलझाने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी प्रैक्टिकल के लिए दूसरे विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं की विजिट करवाई जाएगी। साथ ही प्रोफेसर ने बॉटनी और जूलॉजी के विद्यार्थियों को शुक्रवार को साइंस ब्लाक में ही उनकी समस्याओं का समाधान करवाने का आश्वासन दिया। दोनों विभागों में कुल 60 विद्यार्थी है। इस दौरान एक प्रोफेसर ने कहा कि जब हम नए घर में प्रवेश करते हैं तो समझौता करते हैं। कुछ दिक्कतें आती है। तब एक छात्रा ने कहा कि खाली प्लाट में सामान लेकर नहीं बैठते। विश्वविद्यालय ने हमें अपने घर में नहीं बल्कि पड़ोसियों के घर में बैठा दिया है। विद्यार्थियों ने कहा कि सीडीएलयू में वे करीब 18 हजार रुपये एडमिशन फीस दी है। जबकि दूसरे विश्वविद्यालयों में दस हजार से नीचे ही एडमिशन फीस है, लेकिन सुविधा नहीं है।
बॉटनी और जूलॉजी की छात्रा अंजू, पूनम, ममता, ममता वर्मा, इशा गुप्ता, रिया, शीून, शर्मिला, विशाल सीआर, प्रियंका, कपिल, भूपेश, सचिन, चरण सिंह ने बताया कि सीडीएलयू में 2018,19 शैक्षणिक सत्र में एमएससी शुरू की गई। एक सेमेस्टर खत्म होने के बाद अब अप्रैल मई में दूसरा सेमेस्टर भी खत्म हो जाएगा। लेकिन उन्हें अभी तक न तो कक्षाएं लगाने के लिए कमरा मिला और न ही पुस्तकें उपलब्ध हुई। हमारी कक्षाएं प्रोफेसर प्रयोगशालाओं में लगा रहे हैं। हम कभी पर्यावरण विभाग की लैब में कक्षाएं लगाते हैं तो कभी किसी दूसरी लैब में। साइंस में करीब चार प्रयोगशालाएं है। इस संबंध में हर ढाई महीने पहले भी वीसी कार्यालय को लिखित में शिकायत दे चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसलिए हमें आज दोबारा से वीसी कार्यालय में आकर रोष जताना पड़ा। छात्र छात्राएं वीसी से मिलना चाहती थी। लेकिन वीसी के निजी सचिव होरी लाल ने उन्हें मिलकर आश्वासन दिया कि वे इस मामले का समाधान करवाएंगे। वीसी के निर्देश पर साइंस विभाग की प्रोफेसर प्रियंका सिवाच, प्रोफेसर एमके किदवई और प्रोफेसर संजू बाला को कार्यालय में बुलाया गया। वीसी ने प्रोफेसरों के साथ करीब 30 मिनट तक चर्चा की। इसके बाद तीनों प्रोफेसर बाहर आए और छात्रों को समझाने लगे।
प्रोफेसर ने छात्र नेताओं से कहा कि आप हिंदी के हैं आपको साइंस विभाग की जानकारी नहीं
छात्रों का प्रतिनिधित्व अनिल कसवां और संजय बिश्नोई कर रहे थे। उन्होंने छात्र छात्राओं की समस्याएं प्रोफेसरों के समक्ष रखी। प्रोफेसर संजू बाला ने छात्र नेता अजय कसवां और संजय बिश्नोई से कहा कि आप कौन से विभाग के हैं। दोनों ने कहा कि हम हिंदी विभाग के है। तब प्रोफेसर ने कहा कि आप हिंदी के हैं। आपको साइंस विभाग की समस्याओं का नहीं पता। साइंस के ही छात्र अपनी समस्याएं बताए। तब दोनों छात्र नेताओं ने कहा कि आप छात्रों को बांट रहे हैं। हम राजनीति नहीं कर रहे। हमने न तो चुनाव लड़ना हैं और न ही लड़वाना है। हम पीछे हट जाते हैं आप इनकी समस्याओं का समाधान कर दें। दोनों पक्षों में तर्क वितर्क हुए। बॉटनी विभाग की प्रोफेसर प्रियंका सिवाच ने कहा कि जल्द ही आपके प्रैक्टिकल परीक्षाएं करवा दी जाएगी। प्रोफेसरों ने कहा कि जब विश्वविद्यालय शुरू हुआ तो हमारे बैठने के लिए भी कमरे नहीं थी। तीन टीचर्स होते थे और कमरे में कुर्सी दो ही होती थी। तब एक टीचर्स को विभाग में पढ़ाने के लिए भेजते थे। उन्होंने कहा कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द ही कर दिया जाएगा। इसके बाद विद्यार्थी शांत हुए।
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कोटस
हमने किताबों की समस्या का समाधान कर दिया। बच्चों को किताबों की फोटो कॉपी उपलब्ध करवाई जाएगी। क्योंकि जनवरी में किताबें लाइब्रेरी में आई। लेकिन उसके बाद उसकी पेस्टिंग, स्टिचिंग, एकाउंट द्वारा ऑडिट करने के बाद उसकी पेमेंट की जाती है। जब तक भुगतान नहीं किया जाता, तब तक पुस्तकें विश्वविद्यालय की प्रॉपर्टी नहीं बनती। इसलिए बच्चों को पुस्तकें इश्यू करने में दिक्कतें आ रही है। 15 से 20 दिन के बीच उन्हें किताबें जारी कर दी जाएगी।
पंकज शर्मा, इंचार्ज, केंद्रीय पुस्तकालय, सीडीएलयू सिरसा।
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सिरसा। एमएससी बॉटनी और ज्योलॉजी के विद्यार्थियों ने वीरवार को सीडीएलयू में वीसी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने पिछले एक साल से क्लासरूम न मिलने पर नारेबाजी कर रोष जताया। विद्यार्थियों की मांग है कि उन्हें किताबें इश्यू नहीं की जा रही है। कक्षाएं लगाने के लिए कमरे नहीं और उनकी कक्षाएं भी साइंस विभाग की प्रयोगशालाओं में लग रही है। छात्र और छात्राएं वीसी से मिलना चाहती थी, वीसी ने साइंस ब्लाक के तीन प्रोफेसरों को ही अपने कमरे में ही बुला लिया और मामला सुलझाने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी प्रैक्टिकल के लिए दूसरे विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं की विजिट करवाई जाएगी। साथ ही प्रोफेसर ने बॉटनी और जूलॉजी के विद्यार्थियों को शुक्रवार को साइंस ब्लाक में ही उनकी समस्याओं का समाधान करवाने का आश्वासन दिया। दोनों विभागों में कुल 60 विद्यार्थी है। इस दौरान एक प्रोफेसर ने कहा कि जब हम नए घर में प्रवेश करते हैं तो समझौता करते हैं। कुछ दिक्कतें आती है। तब एक छात्रा ने कहा कि खाली प्लाट में सामान लेकर नहीं बैठते। विश्वविद्यालय ने हमें अपने घर में नहीं बल्कि पड़ोसियों के घर में बैठा दिया है। विद्यार्थियों ने कहा कि सीडीएलयू में वे करीब 18 हजार रुपये एडमिशन फीस दी है। जबकि दूसरे विश्वविद्यालयों में दस हजार से नीचे ही एडमिशन फीस है, लेकिन सुविधा नहीं है।
बॉटनी और जूलॉजी की छात्रा अंजू, पूनम, ममता, ममता वर्मा, इशा गुप्ता, रिया, शीून, शर्मिला, विशाल सीआर, प्रियंका, कपिल, भूपेश, सचिन, चरण सिंह ने बताया कि सीडीएलयू में 2018,19 शैक्षणिक सत्र में एमएससी शुरू की गई। एक सेमेस्टर खत्म होने के बाद अब अप्रैल मई में दूसरा सेमेस्टर भी खत्म हो जाएगा। लेकिन उन्हें अभी तक न तो कक्षाएं लगाने के लिए कमरा मिला और न ही पुस्तकें उपलब्ध हुई। हमारी कक्षाएं प्रोफेसर प्रयोगशालाओं में लगा रहे हैं। हम कभी पर्यावरण विभाग की लैब में कक्षाएं लगाते हैं तो कभी किसी दूसरी लैब में। साइंस में करीब चार प्रयोगशालाएं है। इस संबंध में हर ढाई महीने पहले भी वीसी कार्यालय को लिखित में शिकायत दे चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसलिए हमें आज दोबारा से वीसी कार्यालय में आकर रोष जताना पड़ा। छात्र छात्राएं वीसी से मिलना चाहती थी। लेकिन वीसी के निजी सचिव होरी लाल ने उन्हें मिलकर आश्वासन दिया कि वे इस मामले का समाधान करवाएंगे। वीसी के निर्देश पर साइंस विभाग की प्रोफेसर प्रियंका सिवाच, प्रोफेसर एमके किदवई और प्रोफेसर संजू बाला को कार्यालय में बुलाया गया। वीसी ने प्रोफेसरों के साथ करीब 30 मिनट तक चर्चा की। इसके बाद तीनों प्रोफेसर बाहर आए और छात्रों को समझाने लगे।
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प्रोफेसर ने छात्र नेताओं से कहा कि आप हिंदी के हैं आपको साइंस विभाग की जानकारी नहीं
छात्रों का प्रतिनिधित्व अनिल कसवां और संजय बिश्नोई कर रहे थे। उन्होंने छात्र छात्राओं की समस्याएं प्रोफेसरों के समक्ष रखी। प्रोफेसर संजू बाला ने छात्र नेता अजय कसवां और संजय बिश्नोई से कहा कि आप कौन से विभाग के हैं। दोनों ने कहा कि हम हिंदी विभाग के है। तब प्रोफेसर ने कहा कि आप हिंदी के हैं। आपको साइंस विभाग की समस्याओं का नहीं पता। साइंस के ही छात्र अपनी समस्याएं बताए। तब दोनों छात्र नेताओं ने कहा कि आप छात्रों को बांट रहे हैं। हम राजनीति नहीं कर रहे। हमने न तो चुनाव लड़ना हैं और न ही लड़वाना है। हम पीछे हट जाते हैं आप इनकी समस्याओं का समाधान कर दें। दोनों पक्षों में तर्क वितर्क हुए। बॉटनी विभाग की प्रोफेसर प्रियंका सिवाच ने कहा कि जल्द ही आपके प्रैक्टिकल परीक्षाएं करवा दी जाएगी। प्रोफेसरों ने कहा कि जब विश्वविद्यालय शुरू हुआ तो हमारे बैठने के लिए भी कमरे नहीं थी। तीन टीचर्स होते थे और कमरे में कुर्सी दो ही होती थी। तब एक टीचर्स को विभाग में पढ़ाने के लिए भेजते थे। उन्होंने कहा कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द ही कर दिया जाएगा। इसके बाद विद्यार्थी शांत हुए।
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हमने किताबों की समस्या का समाधान कर दिया। बच्चों को किताबों की फोटो कॉपी उपलब्ध करवाई जाएगी। क्योंकि जनवरी में किताबें लाइब्रेरी में आई। लेकिन उसके बाद उसकी पेस्टिंग, स्टिचिंग, एकाउंट द्वारा ऑडिट करने के बाद उसकी पेमेंट की जाती है। जब तक भुगतान नहीं किया जाता, तब तक पुस्तकें विश्वविद्यालय की प्रॉपर्टी नहीं बनती। इसलिए बच्चों को पुस्तकें इश्यू करने में दिक्कतें आ रही है। 15 से 20 दिन के बीच उन्हें किताबें जारी कर दी जाएगी।
पंकज शर्मा, इंचार्ज, केंद्रीय पुस्तकालय, सीडीएलयू सिरसा।