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वीसी ने कहा कि उनकी मांगे जायज, दो घंटे तक छात्रो ंने वीसी को कार्यालय में घेरे रखा, वीसी निकले तो गाड़ी के आगे लेट गए
Updated Sat, 08 Sep 2018 02:32 AM IST
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नाराज छात्रों ने वीसी से किए सवाल, बोले- अब आप बोलते क्यों नहीं है, वीसी बोले- आप सुनने के मूड में नहीं
अमर उजाला ब्यूरो सिरसा।
सीडीएलयू में बीपीएड और डीपीएड की मान्यता न मिलने को लेकर शुक्रवार को छात्रों ने वीसी कार्यालय का घेराव किया। करीब दो घंटे तक छात्र वीसी कार्यालय के अंदर बैठे रहे। दोनों पक्षों में करीब दो घंटे तक बहस हुई। छात्र वीसी, रजिस्ट्रार और चेयरपर्सन के कथनों से संतुष्ट नहीं हो रहे थे। बहस का अंत न होते देख वीसी विजय कायत जाने लगे तो छात्र उनकी कार के आगे लेट गए। पुलिस ने मौके पर आकर करीब आधे घंटे बाद वीसी की गाड़ी को निकाला। सीडीएलयू को 2007 से बीपीएड और डीपीएड की मान्यता नहीं मिली। छात्र 27 अगस्त से धरने पर बैठे थे। सीडीएलयू में प्रदर्शन को लेकर सुबह से सभी की चेकिंग की जा रही थी। साथ ही इस धरना प्रदर्शन में सभी दलों ने भाग लिया।
शुक्रवार को छात्र दस बजे एडम ब्लाक में जमा होना शुरू हुए। छात्र 11 बजे वीसी कार्यालय के अंदर घुस गए। वीसी के सुरक्षाकर्मचारी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। लेकिन छात्र जगसीर मान अन्य छात्रों के साथ उसे धकेल कर अंदर प्रवेश कर गए। छात्र जगसीर मान, अनिल कसवां, अमृतमान, प्रमोद जांदू, कर्ण कसवां, दयानंद शर्मा ने कहा कि सीडीएलयू ने 6 व सात सितंबर तक मान्यता दिलाने की बात कही थी। लेकिन मान्यता नहीं मिली। जबकि आप कह रहे थे कि सात सितंबर तक मान्यता मिल जाएगी। छात्र वीसी पर सवाल पर सवाल दाग रहे थे। वीसी चुपचाप सुन रहे थे। तब छात्रों ने कहा कि अब आप बोलते क्यों नहीं। आप अपनी चुप्पी तोड़े। करीब दस मिनट बाद वीसी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि जब तक आप बोलते रहेंगे, मैं चुप रहूंगा। जिसके बाद छात्रों ने एक दूसरे को चुप होने के लिए कहा तथा सभी छात्र नीचे बैठ गए। वीसी ने कहा कि मैं आपकी बात सुनना चाहता हूं। आपकी डिमांड जायज है। पार्लियामेंट ने लोकसभा में बिल पेश किया है। पोस्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं था। सीडीएलयू ने रजिस्ट्रेशन करवा दिया। मंत्रालय ने लेटर भेजा है कि समस्या टेक अप कर ली है। हमने आवेदन कर दिया है। यदि आपने प्रदर्शन करना है तो ठीक है। इस दौरान वीसी आठ मिनट तक बोले। तब छात्र अनिल कसवां ने कहा कि जींद विश्वविद्यालय को एनसीटीई से मान्यता कैसे मिल गई। जब वीसी ने कहा कि जींद से उन्हें मतलब नहीं है। छात्रों ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा बोर्ड ने उनकी डिग्री को रिजेक्ट कर दिया। वीसी ने कहा कि कोई भी एजेंसी डिग्री को रिजेक्ट नहीं कर सकती। छात्रों ने कहा कि वे ये जिम्मेदारी लें कि रिजेक्शन नहीं हुआ। हड़ताल खत्म हो जाएगी। वीसी ने उनसे रिजेक्शन का लेटर मांगा। छात्र वीसी से यह मांग करते रहे कि सीडीएलयू लिख कर दें कि यदि उनकी डिग्री को किसी एजेंसी ने रिजेक्ट किया तो वे जिम्मेदार हैं। तभी वे अपना प्रदर्शन खत्म करेंगे।
बेेटीयां दे पसीने बह गए कोई गौर नहीं किता, कमाल दी गल्ल है
फिजिकल विभाग की छात्रा सरोज ने भी दिल्ली स्कूल शिक्षा बोर्ड में नौकरी के लिए आवेदन किया। उसकी भी रिजेक्ट हो गया। सरोज ने वीसी से कहा कि सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है, लेकिन बेटीयां दे पसीने बह गए, कोई गौर नहीं किता, कमाल दी गल्ल है। तभी मास कम्युनिकेशन के छात्र दयानंद शर्मा बोले कि वीसी और रजिस्ट्रार को दिल्ली में बैठकर कोर्स की मान्यता दिलाने के प्रयास करने चाहिए। हम 50 लोग आपके साथ चलेंगे। दयानंद शर्मा ने कहा कि वीसी के पास इमारते और हर्बल पार्क बनाने के लिए समय है। लेकिन मान्यता के लिए दिल्ली जाने का समय नहीं। हम तो आपको एमपी बनाना चाहते थे। वीसी ने कहा कि यह साइंस लैब है। दयानंद शर्मा ने कहा कि आपको पता है कि सीडीएलयू कैसे चल रही है। इस पर वीसी का जबाव अच्छी चल रही है। जिसके बाद छात्र वीसी के इस्तीफे की मांग करने लगे। छात्रों ने नारेबाजी शुरू कर दी या तो पैसे वापस करो, या फिर डिग्री रखो।
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कार्यकारी रजिस्ट्रार को देखकर छात्र बोले मीठी गोली आ गई, अब चूूस लो
इसी बीच सीडीएलयू के कार्यकारी रजिस्ट्रार राजकुमार सिवाच भी छात्रों को समझाने के लिए आए। उनके आते ही कुछ छात्र बोले मीठी गोली आ गई। अब रजिस्ट्रार मीठी गोली दे रहे हैं। लेकिन कुछ छात्रों ने खड़े होकर कहा कि रजिस्ट्रार सर ने अच्छा काम किया है। रजिस्ट्रार ने कहा कि प्रदीप, रोशन, गुरविंदर मेरे साथ गए। 13 जुलाई को लोकसभा ने एनसीटीई से संबंधित कोर्स की मान्यता के लिए बिल पास किया। 14 जुलाई को राज्यसभा में पेश होना था। लेकिन पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के देहांत के कारण प्रकिया नहीं हुई। 2004 से लेकर 2018 तक की मान्यता सीडीएलयू को मिल जाएगी। बच्चों को डरने की जरूरत नही है। मैं कोई मंत्री नहीं हूं न ही प्रधानमंत्री। हम कानून से आगे नहीं है। हम एनसीटीई में अपील डाल रहे हैं। मैं आश्वासन देता हूं। लेकिन छात्र न तो वीसी के आश्वासनों से संतुष्ट हो रहे थे और न ही रजिस्ट्रार। चेयरपर्सन मोनिका वर्मा ने भी कहा कि मान्यता न मिलने में सीडीएलयू से कहीं कोई कमी नहीं रही। दोनों पक्षों में सवाल जवाब दो घंटे तक चलते रहे।
वीसी निकले तो पीछे चल दिए छात्र
वीसी विजय कायत एक बजकर दस मिनट पर अपनी कुर्सी छोड़कर कार्यालय से बाहर निकले तो छात्र उनके पीछे चल पड़े। वे गाड़ी में बैठे थे छात्र उनकी गाड़ी के आगे लेट गए। वीसी की गाड़ी को छात्रों ने घेर लिया। करीब आधा घंटे तक वीसी की गाड़ी का घेराव किए रखा। छात्रों ने वीसी के खिलाफ हूटिंग की, या तो इस्तीफा दे दों या मान्यता दिला दो। गुस्साए छात्रों ने वीसी की गाड़ी पर मुक्के भी मारे। इस दौरान वीसी गाड़ी में ही बैठे रहे। पुलिस के आने के बाद भी दस मिनट तक वीसी की गाड़ी का घेराव किए रखा। कुछ छात्र नेता वीसी की गाड़ी को रोकने के पक्ष में नहीं थे, इसलिए वे पीछे हट गए। पुलिस फोर्स में कोई भी महिला कर्मचारी नहीं थी। इसके बाद छात्रों ने धरनास्थल पर फैसला लिया कि वे शनिवार को फिर से सीडीएलयू में जमा होंगे।
कोट्स
स्टूडेंट्स को कुछ आउटसाइडर भड़का रहे हैं। मान्यता के लिए सारी प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। पूरे देश के विश्वविद्यालयों को मान्यता संसद से मिलनी है। हमने विभाग के सभी टीचर्स को बुलाया, फिजिकल विभाग के छात्र सहमत है। लेकिन आउटसाइडर स्टूडेंट्स को भ्रमित कर रहे हैं। ये चिंतनीय है। कुछ छात्र नेता बनना चाहते हैं जो कि दुर्भाग्यर्पूण है। हमारे बच्चे हैं, इसलिए किसी स्टूडेंट्स के खिलाफ कोई शिकायत नहीं दी गई।
वीसी, विजय कायत, सीडीएलयू, सिरसा।
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अमर उजाला ब्यूरो सिरसा।
सीडीएलयू में बीपीएड और डीपीएड की मान्यता न मिलने को लेकर शुक्रवार को छात्रों ने वीसी कार्यालय का घेराव किया। करीब दो घंटे तक छात्र वीसी कार्यालय के अंदर बैठे रहे। दोनों पक्षों में करीब दो घंटे तक बहस हुई। छात्र वीसी, रजिस्ट्रार और चेयरपर्सन के कथनों से संतुष्ट नहीं हो रहे थे। बहस का अंत न होते देख वीसी विजय कायत जाने लगे तो छात्र उनकी कार के आगे लेट गए। पुलिस ने मौके पर आकर करीब आधे घंटे बाद वीसी की गाड़ी को निकाला। सीडीएलयू को 2007 से बीपीएड और डीपीएड की मान्यता नहीं मिली। छात्र 27 अगस्त से धरने पर बैठे थे। सीडीएलयू में प्रदर्शन को लेकर सुबह से सभी की चेकिंग की जा रही थी। साथ ही इस धरना प्रदर्शन में सभी दलों ने भाग लिया।
शुक्रवार को छात्र दस बजे एडम ब्लाक में जमा होना शुरू हुए। छात्र 11 बजे वीसी कार्यालय के अंदर घुस गए। वीसी के सुरक्षाकर्मचारी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। लेकिन छात्र जगसीर मान अन्य छात्रों के साथ उसे धकेल कर अंदर प्रवेश कर गए। छात्र जगसीर मान, अनिल कसवां, अमृतमान, प्रमोद जांदू, कर्ण कसवां, दयानंद शर्मा ने कहा कि सीडीएलयू ने 6 व सात सितंबर तक मान्यता दिलाने की बात कही थी। लेकिन मान्यता नहीं मिली। जबकि आप कह रहे थे कि सात सितंबर तक मान्यता मिल जाएगी। छात्र वीसी पर सवाल पर सवाल दाग रहे थे। वीसी चुपचाप सुन रहे थे। तब छात्रों ने कहा कि अब आप बोलते क्यों नहीं। आप अपनी चुप्पी तोड़े। करीब दस मिनट बाद वीसी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि जब तक आप बोलते रहेंगे, मैं चुप रहूंगा। जिसके बाद छात्रों ने एक दूसरे को चुप होने के लिए कहा तथा सभी छात्र नीचे बैठ गए। वीसी ने कहा कि मैं आपकी बात सुनना चाहता हूं। आपकी डिमांड जायज है। पार्लियामेंट ने लोकसभा में बिल पेश किया है। पोस्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं था। सीडीएलयू ने रजिस्ट्रेशन करवा दिया। मंत्रालय ने लेटर भेजा है कि समस्या टेक अप कर ली है। हमने आवेदन कर दिया है। यदि आपने प्रदर्शन करना है तो ठीक है। इस दौरान वीसी आठ मिनट तक बोले। तब छात्र अनिल कसवां ने कहा कि जींद विश्वविद्यालय को एनसीटीई से मान्यता कैसे मिल गई। जब वीसी ने कहा कि जींद से उन्हें मतलब नहीं है। छात्रों ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा बोर्ड ने उनकी डिग्री को रिजेक्ट कर दिया। वीसी ने कहा कि कोई भी एजेंसी डिग्री को रिजेक्ट नहीं कर सकती। छात्रों ने कहा कि वे ये जिम्मेदारी लें कि रिजेक्शन नहीं हुआ। हड़ताल खत्म हो जाएगी। वीसी ने उनसे रिजेक्शन का लेटर मांगा। छात्र वीसी से यह मांग करते रहे कि सीडीएलयू लिख कर दें कि यदि उनकी डिग्री को किसी एजेंसी ने रिजेक्ट किया तो वे जिम्मेदार हैं। तभी वे अपना प्रदर्शन खत्म करेंगे।
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बेेटीयां दे पसीने बह गए कोई गौर नहीं किता, कमाल दी गल्ल है
फिजिकल विभाग की छात्रा सरोज ने भी दिल्ली स्कूल शिक्षा बोर्ड में नौकरी के लिए आवेदन किया। उसकी भी रिजेक्ट हो गया। सरोज ने वीसी से कहा कि सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है, लेकिन बेटीयां दे पसीने बह गए, कोई गौर नहीं किता, कमाल दी गल्ल है। तभी मास कम्युनिकेशन के छात्र दयानंद शर्मा बोले कि वीसी और रजिस्ट्रार को दिल्ली में बैठकर कोर्स की मान्यता दिलाने के प्रयास करने चाहिए। हम 50 लोग आपके साथ चलेंगे। दयानंद शर्मा ने कहा कि वीसी के पास इमारते और हर्बल पार्क बनाने के लिए समय है। लेकिन मान्यता के लिए दिल्ली जाने का समय नहीं। हम तो आपको एमपी बनाना चाहते थे। वीसी ने कहा कि यह साइंस लैब है। दयानंद शर्मा ने कहा कि आपको पता है कि सीडीएलयू कैसे चल रही है। इस पर वीसी का जबाव अच्छी चल रही है। जिसके बाद छात्र वीसी के इस्तीफे की मांग करने लगे। छात्रों ने नारेबाजी शुरू कर दी या तो पैसे वापस करो, या फिर डिग्री रखो।
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इसी बीच सीडीएलयू के कार्यकारी रजिस्ट्रार राजकुमार सिवाच भी छात्रों को समझाने के लिए आए। उनके आते ही कुछ छात्र बोले मीठी गोली आ गई। अब रजिस्ट्रार मीठी गोली दे रहे हैं। लेकिन कुछ छात्रों ने खड़े होकर कहा कि रजिस्ट्रार सर ने अच्छा काम किया है। रजिस्ट्रार ने कहा कि प्रदीप, रोशन, गुरविंदर मेरे साथ गए। 13 जुलाई को लोकसभा ने एनसीटीई से संबंधित कोर्स की मान्यता के लिए बिल पास किया। 14 जुलाई को राज्यसभा में पेश होना था। लेकिन पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के देहांत के कारण प्रकिया नहीं हुई। 2004 से लेकर 2018 तक की मान्यता सीडीएलयू को मिल जाएगी। बच्चों को डरने की जरूरत नही है। मैं कोई मंत्री नहीं हूं न ही प्रधानमंत्री। हम कानून से आगे नहीं है। हम एनसीटीई में अपील डाल रहे हैं। मैं आश्वासन देता हूं। लेकिन छात्र न तो वीसी के आश्वासनों से संतुष्ट हो रहे थे और न ही रजिस्ट्रार। चेयरपर्सन मोनिका वर्मा ने भी कहा कि मान्यता न मिलने में सीडीएलयू से कहीं कोई कमी नहीं रही। दोनों पक्षों में सवाल जवाब दो घंटे तक चलते रहे।
वीसी निकले तो पीछे चल दिए छात्र
वीसी विजय कायत एक बजकर दस मिनट पर अपनी कुर्सी छोड़कर कार्यालय से बाहर निकले तो छात्र उनके पीछे चल पड़े। वे गाड़ी में बैठे थे छात्र उनकी गाड़ी के आगे लेट गए। वीसी की गाड़ी को छात्रों ने घेर लिया। करीब आधा घंटे तक वीसी की गाड़ी का घेराव किए रखा। छात्रों ने वीसी के खिलाफ हूटिंग की, या तो इस्तीफा दे दों या मान्यता दिला दो। गुस्साए छात्रों ने वीसी की गाड़ी पर मुक्के भी मारे। इस दौरान वीसी गाड़ी में ही बैठे रहे। पुलिस के आने के बाद भी दस मिनट तक वीसी की गाड़ी का घेराव किए रखा। कुछ छात्र नेता वीसी की गाड़ी को रोकने के पक्ष में नहीं थे, इसलिए वे पीछे हट गए। पुलिस फोर्स में कोई भी महिला कर्मचारी नहीं थी। इसके बाद छात्रों ने धरनास्थल पर फैसला लिया कि वे शनिवार को फिर से सीडीएलयू में जमा होंगे।
कोट्स
स्टूडेंट्स को कुछ आउटसाइडर भड़का रहे हैं। मान्यता के लिए सारी प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। पूरे देश के विश्वविद्यालयों को मान्यता संसद से मिलनी है। हमने विभाग के सभी टीचर्स को बुलाया, फिजिकल विभाग के छात्र सहमत है। लेकिन आउटसाइडर स्टूडेंट्स को भ्रमित कर रहे हैं। ये चिंतनीय है। कुछ छात्र नेता बनना चाहते हैं जो कि दुर्भाग्यर्पूण है। हमारे बच्चे हैं, इसलिए किसी स्टूडेंट्स के खिलाफ कोई शिकायत नहीं दी गई।
वीसी, विजय कायत, सीडीएलयू, सिरसा।