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हड़ताली आशा वर्कर्स ने धरना देने के बाद एसकेएस के सत्याग्रह आंदोलन को दिया समर्थन
Updated Wed, 13 Jun 2018 12:05 AM IST
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हड़ताली आशा वर्कर्स ने धरना देने के बाद एसकेएस के सत्याग्रह आंदोलन को दिया समर्थन
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। सरकार के साथ हुए समझौते का नोटिफिकेशन जारी न करने के विरोध में आशा वर्कर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। मंगलवार को हड़ताली आशा वर्कर्स ने दोपहर तक नागरिक अस्पताल में धरना देने के बाद लघु सचिवालय में सत्याग्रह आंदोलन कर रहे सर्व कर्मचारी संघ के सदस्यों को भी समर्थन दिया। जिला प्रधान कलावती देवी और सचिव मंजू रानी ने बताया कि सरकार ने उनके संघर्ष को देखते हुए सोमवार को नोटिफिकेशन तो जारी कर दिया। लेकिन नेाटिफिकेशन में कर्मचारियों के लिए कई शर्तें लगा दी। जिन्हें पूरा करना हर कर्मचारी के बस की बात नहीं है। प्रधान ने कहा कि सरकार ने चार हजार रुपये वेतनमान देने के पीछे शर्त रखी है कि जो कर्मचारी दो हजार रुपये का कार्य पूरा करेगी। उसे ही चार हजार वेतनमान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है। वहीं दूसरी ओर बेटियां इस भीष्ण गर्मी में ठोकरें खाने को मजबूर हैं। वे सरकार के आगे नहीं झुकेंगी। सरकार की वायदाखिलाफी के विरोध में 22 जून से करनाल में अनिश्चितकालीन महापड़ाव डाला जाएगा। आशा वर्कर्स के काम की बदौलत ही हरियाणा में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। पूर्ण टीकाकरण का ड्रॉपआउट कम हुआ है और संस्थापक डिलीवरी में बढ़ोतरी हुई है। आशा स्वास्थ्य विभाग के 40 से अधिक काम करती हैं। इसके बदले उन्हें बहुत ही कम मेहनताना मिलता है। इसलिए वेतन बढ़ोतरी की मांग जायज थी। एक फरवरी को सरकार के साथ समझौता हुआ था। जिसके बाद आंदोलन वापस ले लिया गया। लेकिन समझौते को चार माह बीतने के बाद भी अभी तक लागू नहीं किया गया है। समझौता लागू न करने से कर्मचारियों में रोष है। इस मौके पर गीता, पायल, ममता, वीरपाल, वंचित कौर, वीरपाल माधोसिंघाना, रचना, दर्शना, शबीना, रमन, सुनीता उपस्थित थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। सरकार के साथ हुए समझौते का नोटिफिकेशन जारी न करने के विरोध में आशा वर्कर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। मंगलवार को हड़ताली आशा वर्कर्स ने दोपहर तक नागरिक अस्पताल में धरना देने के बाद लघु सचिवालय में सत्याग्रह आंदोलन कर रहे सर्व कर्मचारी संघ के सदस्यों को भी समर्थन दिया। जिला प्रधान कलावती देवी और सचिव मंजू रानी ने बताया कि सरकार ने उनके संघर्ष को देखते हुए सोमवार को नोटिफिकेशन तो जारी कर दिया। लेकिन नेाटिफिकेशन में कर्मचारियों के लिए कई शर्तें लगा दी। जिन्हें पूरा करना हर कर्मचारी के बस की बात नहीं है। प्रधान ने कहा कि सरकार ने चार हजार रुपये वेतनमान देने के पीछे शर्त रखी है कि जो कर्मचारी दो हजार रुपये का कार्य पूरा करेगी। उसे ही चार हजार वेतनमान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है। वहीं दूसरी ओर बेटियां इस भीष्ण गर्मी में ठोकरें खाने को मजबूर हैं। वे सरकार के आगे नहीं झुकेंगी। सरकार की वायदाखिलाफी के विरोध में 22 जून से करनाल में अनिश्चितकालीन महापड़ाव डाला जाएगा। आशा वर्कर्स के काम की बदौलत ही हरियाणा में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। पूर्ण टीकाकरण का ड्रॉपआउट कम हुआ है और संस्थापक डिलीवरी में बढ़ोतरी हुई है। आशा स्वास्थ्य विभाग के 40 से अधिक काम करती हैं। इसके बदले उन्हें बहुत ही कम मेहनताना मिलता है। इसलिए वेतन बढ़ोतरी की मांग जायज थी। एक फरवरी को सरकार के साथ समझौता हुआ था। जिसके बाद आंदोलन वापस ले लिया गया। लेकिन समझौते को चार माह बीतने के बाद भी अभी तक लागू नहीं किया गया है। समझौता लागू न करने से कर्मचारियों में रोष है। इस मौके पर गीता, पायल, ममता, वीरपाल, वंचित कौर, वीरपाल माधोसिंघाना, रचना, दर्शना, शबीना, रमन, सुनीता उपस्थित थे।