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आशा वर्कर्स ने मानव श्रृंखला बनाकर जताया रोष
Updated Sun, 17 Jun 2018 02:04 AM IST
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आशा वर्कर्स ने मानव श्रृंखला बनाकर जताया रोष
सिरसा। सरकार की ओर से बार-बार की जा रही वादाखिलाफी के विरोध में जिलेभर की समस्त आशा वर्कर्स ने शनिवार को नागरिक अस्पताल में प्रदर्शन किया। नहीं आशा वर्कर्स ने सरकार को चेताते हुए कहा है कि जब तक उनके हाथों में नोटिफिकेशन की कॉपी नहीं आती, तब तक वे अपना संघर्ष जारी रखेंगी। दूसरी ओर रोहतक में शनिवार को प्रदेश कार्यकारिणी में आगामी संघर्ष की रूपरेखा बनाई जाएगी।
आशा वर्कर्स यूनियन की जिला सचिव मंजूरानी ने बताया कि एक फरवरी को भी सरकार ने उनके आंदोलन को देखते हुए उनकी कुछ मांगों को स्वीकार करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। चार माह बीतने के बाद भी सरकार ने उनकी मांगों का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। इसके विरोध में उन्हें दोबारा से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। सरकार ने जिस प्रकार से पूर्व के नोटिफिकेशन में देरी के साथ उसे लागू करने में कुछ शर्तें लगा दी हैं। उन्हें इस बार भी डर है कि कहीं पूर्व की भांति इस बार भी सरकार कोई शर्त न लगा दे। सचिव ने कहा कि एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है। वहीं दूसरी ओर बेटियां इस भीषण गर्मी में ठोकरें खाने को मजबूर हैं। इस बार वे सरकार के आगे नहीं झुकेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में 22 जून से करनाल में अनिश्चितकालीन महापड़ाव डाला जाएगा। आशा वर्कर्स के काम की बदौलत ही हरियाणा में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। पूर्ण टीकाकरण का ड्रॉपआउट कम हुआ है और संस्थापक डिलीवरी में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि आशा स्वास्थ्य विभाग के 40 से अधिक काम करती हैं। इसके बदले उन्हें बहुत ही कम मेहनताना मिलता है। इसलिए वेतन बढ़ोतरी की मांग जायज है। इस मौके पर गीता, पायल, ममता, वीरपाल, वंचित कौर, वीरपाल, रचना, दर्शना, शबीना, रमन, सुनीता उपस्थित थे।
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सिरसा। सरकार की ओर से बार-बार की जा रही वादाखिलाफी के विरोध में जिलेभर की समस्त आशा वर्कर्स ने शनिवार को नागरिक अस्पताल में प्रदर्शन किया। नहीं आशा वर्कर्स ने सरकार को चेताते हुए कहा है कि जब तक उनके हाथों में नोटिफिकेशन की कॉपी नहीं आती, तब तक वे अपना संघर्ष जारी रखेंगी। दूसरी ओर रोहतक में शनिवार को प्रदेश कार्यकारिणी में आगामी संघर्ष की रूपरेखा बनाई जाएगी।
आशा वर्कर्स यूनियन की जिला सचिव मंजूरानी ने बताया कि एक फरवरी को भी सरकार ने उनके आंदोलन को देखते हुए उनकी कुछ मांगों को स्वीकार करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। चार माह बीतने के बाद भी सरकार ने उनकी मांगों का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। इसके विरोध में उन्हें दोबारा से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। सरकार ने जिस प्रकार से पूर्व के नोटिफिकेशन में देरी के साथ उसे लागू करने में कुछ शर्तें लगा दी हैं। उन्हें इस बार भी डर है कि कहीं पूर्व की भांति इस बार भी सरकार कोई शर्त न लगा दे। सचिव ने कहा कि एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है। वहीं दूसरी ओर बेटियां इस भीषण गर्मी में ठोकरें खाने को मजबूर हैं। इस बार वे सरकार के आगे नहीं झुकेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में 22 जून से करनाल में अनिश्चितकालीन महापड़ाव डाला जाएगा। आशा वर्कर्स के काम की बदौलत ही हरियाणा में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। पूर्ण टीकाकरण का ड्रॉपआउट कम हुआ है और संस्थापक डिलीवरी में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि आशा स्वास्थ्य विभाग के 40 से अधिक काम करती हैं। इसके बदले उन्हें बहुत ही कम मेहनताना मिलता है। इसलिए वेतन बढ़ोतरी की मांग जायज है। इस मौके पर गीता, पायल, ममता, वीरपाल, वंचित कौर, वीरपाल, रचना, दर्शना, शबीना, रमन, सुनीता उपस्थित थे।
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