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Sirsa News: सिरसा जिले में 15 साल में रोके 610 बाल विवाह, बीस नाबालिग बनीं बालिका वधू
Sat, 23 May 2026 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 23 May 2026 11:22 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में बाल विवाह से जुड़ीं शिकायतें लगातार आ रही हैं। 15 वर्षों में करीब 610 नाबालिग की शादी प्रशासन रोकने में कामयाब रहा जबकि 20 नाबालिग बालिका वधू बन चुकी हैं। वर्ष 2011 में बाल विवाह से जुड़ीं 25 शिकायतें आई थीं। उसके बाद से शिकायतों का बढ़ना जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि लोगों में जागरूकता का अभाव होने के कारण वे बाल विवाह अपराध नहीं मानते। प्रशासन को जैसे ही सूचना मिलती है तुरंत प्रभाव से बाल विवाह को रुकवा दिया जाता है। अब तक जितनी भी शिकायतें आई हैं विभाग की ओर से बाल विवाह रुकवाने के साथ-साथ माता-पिता से भविष्य में बच्चों के बालिग होने तक विवाह नहीं करने का शपथ पत्र भरवाया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से बाल विवाह की शिकायतें सबसे ज्यादा आ रही हैं। प्रशासन ने एक गांव में कुछ समय पहले ही एक नाबालिग की शादी रुकवाई। वर-वधू के फेरों की तैयारी हो चुकी थी।
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इसी बीच प्रशासन की टीम पुलिस को साथ लेकर वहां पहुंच गई। टीम ने परिजनों से दूल्हा-दुल्हन का आयु प्रमाण पत्र मांगा, दस्तावेज में दोनों की आयु 18 वर्ष से कम निकली। परिजनों ने टीम को बताया कि उन्हें नहीं पता था कि 18 वर्ष से पहले लड़की व 21 वर्ष से पहले लड़के की शादी करना अपराध होता है। अब दोनों की शादी बालिग होने पर ही करेंगे।
7 साल से रिक्त पड़ा है पद : बाल विवाह निषेध अधिकारी का पद पिछले सात साल से रिक्त पड़ा है। प्रशासन की ओर से बाल संरक्षण अधिकारी गुरप्रीत कौर को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
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सिरसा। जिले में बाल विवाह से जुड़ीं शिकायतें लगातार आ रही हैं। 15 वर्षों में करीब 610 नाबालिग की शादी प्रशासन रोकने में कामयाब रहा जबकि 20 नाबालिग बालिका वधू बन चुकी हैं। वर्ष 2011 में बाल विवाह से जुड़ीं 25 शिकायतें आई थीं। उसके बाद से शिकायतों का बढ़ना जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि लोगों में जागरूकता का अभाव होने के कारण वे बाल विवाह अपराध नहीं मानते। प्रशासन को जैसे ही सूचना मिलती है तुरंत प्रभाव से बाल विवाह को रुकवा दिया जाता है। अब तक जितनी भी शिकायतें आई हैं विभाग की ओर से बाल विवाह रुकवाने के साथ-साथ माता-पिता से भविष्य में बच्चों के बालिग होने तक विवाह नहीं करने का शपथ पत्र भरवाया गया है।
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अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से बाल विवाह की शिकायतें सबसे ज्यादा आ रही हैं। प्रशासन ने एक गांव में कुछ समय पहले ही एक नाबालिग की शादी रुकवाई। वर-वधू के फेरों की तैयारी हो चुकी थी।
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इसी बीच प्रशासन की टीम पुलिस को साथ लेकर वहां पहुंच गई। टीम ने परिजनों से दूल्हा-दुल्हन का आयु प्रमाण पत्र मांगा, दस्तावेज में दोनों की आयु 18 वर्ष से कम निकली। परिजनों ने टीम को बताया कि उन्हें नहीं पता था कि 18 वर्ष से पहले लड़की व 21 वर्ष से पहले लड़के की शादी करना अपराध होता है। अब दोनों की शादी बालिग होने पर ही करेंगे।
7 साल से रिक्त पड़ा है पद : बाल विवाह निषेध अधिकारी का पद पिछले सात साल से रिक्त पड़ा है। प्रशासन की ओर से बाल संरक्षण अधिकारी गुरप्रीत कौर को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।