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मंगलवार शाम तक था तीन हजार क्यूसिक पानी, चिंतित किसान मोगो को बंद करने में जुटे, प्रशासिनक अधिकारी केवल पुलों के निरीक्षण तक ही
Updated Thu, 27 Sep 2018 08:40 AM IST
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घग्गर में पहुंचा दस हजार क्यूसिक पानी, राजस्थान साइफन में पानी छोड़ने से 6 पुल डूबे, गांवों का संपर्क टूटा
सिरसा/ रानियां/ ऐलनाबाद। घग्गर में बुधवार को जलस्तर बढ़कर 8000 क्यूसिक हो गया है। इसलिए प्रशासन ने ओटू वियर से राजस्थान साइफन में करीब चार हजार क्यूसिक पानी छोड़ दिया है। ओटू हैड से राजस्थान साइफन में पानी छोड़ने पर करीब 6 आरजी पुल डूब गए है। इससे घग्गर के दोनों ओर बसने वाले ग्रामीणों का आपस में सीधा संपर्क टूट गया है। अब ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। वहीं जलस्तर बढ़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने घग्घर का निरीक्षण किया, लेकिन वे पुलों का ही निरीक्षण करते रहे, न की तटबंधों का। प्रशासनिक अमला ओटू हैड पर डेरा डाल कर स्थिति पर नजर रख रहा है। इसके अलावा सिंचाई विभाग पानी का बहाव कम न हो इसलिए जलकुंभी को हटाने में लगा हुआ है। जलस्तर बढ़ने से चिंतित किसान घग्घर के साथ लगते मोगों को बंद करने में जुट गए है।
अमर उजाला की टीम ने बुधवार घग्घर किनारे गांव लहंगेवाला, झंडा खुर्द, मुसाहिबवाला, पनिहारी, फरवाई, रंगा, नेजाडेला कलां, सहारणी, खैरेका का दौरा किया तो यहां पर हालात सामान्य रहे। इन गांवों के आसपास प्रशासनिक कर्मचारी तैनात किए गए। लेकिन जैसे जैसे ओटू वियर की ओर बढ़ते गए तो किसानों की गतिविधियां दिखाई दिए। गांव बनसुधार के सुरेंद्र, विजय, संजय, विनोद, संदीप, राजेश अपने खेतों में मोगों को बंद करने के लिए घरों से निकल कर बांध पर चलते हुए खेतों की ओर जा रहे थे। इनका कहना है कि प्रशासन के अलर्ट के बाद उन्होंने घग्घर से निकले मोगों को बंद करने की तैयारी कर रहे हैं। किसानों के हाथों में कस्सी और गट्टे थे, जिन्हें मिट्टी से भरकर मोगों को बंद किया जा सकें। मोगो में फलडी पानी आने से खेतों को नुकसान हो सकता है। टीम इसके बाद जब झोरडनाली के पास पहुंची तो किसान अमरजीत, सिद्दू कुमार, अशोक भी घग्घर के तटबंधों पर बने मोगों को बंद करने के लिए जा रहे थे। किसानों ने बताया कि उनके गांव के पास तटबंध कमजोर हैं और कई बार यहीं से घग्घर टूटी है। सरपंच ने सभी ग्रामीणों को अपने अपने मोगे बंद करने के लिए कहा। वहीं झोरडनाली गांव पर राजस्व विभाग के पटवारी पुल पर डेरा डाले हुए थे। पुल पर आने वाली जलकुंभी को रोकने के लिए मजदूर लगाए हुए थे। वे बड़े बड़े डंडों के सहारे से जलकुंभी को घग्घर से निकाल रहे थे।
नाली दे बन ते कदी किसे अफसर ने गेडा नहीं मारिया, हर थां ते टूटन दा खतरा ए
जलभराव से काट रहे हैं फसले, ढाणी सतनाम व कुताबढ, नकौडा व शेखुपरा के बीच बना आरजी पुल डूबा
ओटूू वियर से आगे गांव नगराना तक विभाग ने अब तटबंधों को मजबूत करने के लिए जेसीबी मशीन से मिट्टी डालनी शुरू कर दी है। इस मौके पर मौजूद गुरदेव सिंह कूका नगराणा, रिछपाल सिंह, राज सिंह, बसंत सिंह बाजवा, नछतर दयोल, सुखदेव चीमा, सोनू चीमा, बलदेव दयोल का कहना है कि नाली दे बन्न ते कदी किसे अफसर ने गेडा नहीं मारिया। हर थां ते टूटन दा खतरा ए। वड्डे अफसर गल ही नहीं सुनदे। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग हर बार जलस्तर बढने पर ही सक्रिय होता है। उच्चाधिकारी मौके पर आकर मुआयना करते हैं और न ही लोगों से कमजोर तटबंधों को लेकर समस्याएं सुनते हैं। अधिकारी ओटू हैड पर ही डेरा डालकर और अपने कर्मचारियों से बात कर वापस चले जाते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अनेक जगहों पर वृक्ष उखाडे़ गए हैं और वहां मिट्टी नहीं डाली गई है। जैसे ही जलस्तर बढ़ेगा वहां से तटबंध टूटने का खतरा बढ़ जाएगा। कई जगहों पर बारिश के कारण मिट्टी बह गई। चूहों की वजह से तटबंधों में सुराख हो गए। प्रशासन अब बडे़ खड्डों को भरकर सक्रियता दिखाने का प्रयास कर रहा है। नगराना के किसान गुरदेव सिंह जलभराव में अपने खेत में चारा काट रहा है। जबकि थेड़ी मोहर सिंह का किसान इकबाल सिंह भी पशुओं के लिए चारा काटने के लिए जलभराव वाले खेतों में जाने को मजबूर है। ज्यादातर किसानों की फसलें अभी पकी नहीं हैं और वह आंखों के सामने फसल डूबती देखने को मजबूर हैं। घग्घर में जलस्तर बढ़ने से ढाणी सतनाम सिंह और कुताबढ़ गांव के बीच सीधा संपर्क टूट गया है। इसी प्रकार से नकौडा गांव और शेखूपुरा गांव के बीच बना पुल भी पानी में डूब गया। ओटू हैड पर बढते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट तो घोषित कर दिया है लेकिन सिंचाई विभाग के पास कर्मचारियों व साधनों की कमी है। तटबंधों पर रात के समय लाइटों व रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए जोकि अभी तक नहीं की गई है। जिससे रात के समय किसी प्रकार की अनहोनी का भय बना हुआ है। अन्य विभागों से साथ न मिलने से सिंचाई विभाग भी बेबस नजर आ रहा है।
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अमृतसर खुर्द से लेकर तलवाड़ा खुर्द तक पांच में से चार पुल डूबे, पांच फुट पानी ऊपर
ऐलनाबाद क्षेत्र के गांव अमृतसर खुर्द के पास घग्घर पर बने आरजी पुल से पांच फुट ऊपर पानी बह रहा है। तलवाडा खुर्द तक करीब पांच आरजी पुल आते हैं। जिसमें से चार डूब चुके हैं। इससे घग्घर के दोनों ओर स्थित गांवों के किसानों का आपस में सीधा संपर्क टूट गया है। पहले किसान और ग्रामीण इन पुलों से अपने खेतों और अन्य क्षेत्रों में आते जाते थे। घग्घर के किनारे बसे गांव अमृतसर खुर्द, कला, ठोबरियां, मिर्जापुरा, तलवाड़ा के किसान कोमल सिंह, भूपेन्द्र सिंह, ठाकुर सिंह, सुखदेव सिंह, रिछपाल सिंह, बलविन्द्र सिंह, गुरभेज सिंह ने बताया कि वे लोग सुबह से निरंतर बढ़ रहे पानी को देख रहे हैं। नदी का पानी इस कदर तेज है कि गत 10 घंटों में करीब 5 फुट तक जलस्तर बढ़ा है। जैसे -जैसे पानी बढ़ रहा है, उन लोगों की चिंता भी बढ़ रही है। सिंचाई विभाग के जेई रघुवीर सिंह का कहना है कि ओटू से लेकर राजस्थान साइफन तक दौरा कर, जगह-जगह मिट्टी गिरवाने का कार्य किया है । सभी गांवों के रास्तो को मजबूत किया गया है । राजस्थान साईफन पर भी सफाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है, ताकि पानी के बहाव में निरंतरता बनी रहे।
कोट्स
घग्गर में जलस्तर बढ़ना शुुरु हो गया है। गुहला चीका हैड पर लगातार जलस्तर बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ रही है। प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी किया गया है। विभाग के पास कर्मचारियों व साधनों की कमी है। अन्य विभागों व उच्चाधिकारियों से इस बारे में अवगत करवाया गया है। किसी विभाग की ओर से साधन और कर्मचारी उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं जिसको लेकर समस्या आ रही है। विभाग के कर्मचारियों को कमजोर तटबंधों को मजबूत करने के आदेश जारी किए गए है। जलस्तर 2010 से कहीं अधिक बढ़ने की संभावना है।
एनकेभोला, कार्यकारी अभियंता।
जलस्तर की ताजा स्थिति
गुहलाचीका हेड : 43872 क्यूसिक
खनौरी हेड : 12000 क्यूसिक
चांदपुर हेड : 10500 क्यूसिक
ओटू हैड : 8000 क्यूसिक
ताजेवाला : 11500 क्यूसिक
राजस्थान साइफन : 4000 क्यूसिक
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सिरसा/ रानियां/ ऐलनाबाद। घग्गर में बुधवार को जलस्तर बढ़कर 8000 क्यूसिक हो गया है। इसलिए प्रशासन ने ओटू वियर से राजस्थान साइफन में करीब चार हजार क्यूसिक पानी छोड़ दिया है। ओटू हैड से राजस्थान साइफन में पानी छोड़ने पर करीब 6 आरजी पुल डूब गए है। इससे घग्गर के दोनों ओर बसने वाले ग्रामीणों का आपस में सीधा संपर्क टूट गया है। अब ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। वहीं जलस्तर बढ़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने घग्घर का निरीक्षण किया, लेकिन वे पुलों का ही निरीक्षण करते रहे, न की तटबंधों का। प्रशासनिक अमला ओटू हैड पर डेरा डाल कर स्थिति पर नजर रख रहा है। इसके अलावा सिंचाई विभाग पानी का बहाव कम न हो इसलिए जलकुंभी को हटाने में लगा हुआ है। जलस्तर बढ़ने से चिंतित किसान घग्घर के साथ लगते मोगों को बंद करने में जुट गए है।
अमर उजाला की टीम ने बुधवार घग्घर किनारे गांव लहंगेवाला, झंडा खुर्द, मुसाहिबवाला, पनिहारी, फरवाई, रंगा, नेजाडेला कलां, सहारणी, खैरेका का दौरा किया तो यहां पर हालात सामान्य रहे। इन गांवों के आसपास प्रशासनिक कर्मचारी तैनात किए गए। लेकिन जैसे जैसे ओटू वियर की ओर बढ़ते गए तो किसानों की गतिविधियां दिखाई दिए। गांव बनसुधार के सुरेंद्र, विजय, संजय, विनोद, संदीप, राजेश अपने खेतों में मोगों को बंद करने के लिए घरों से निकल कर बांध पर चलते हुए खेतों की ओर जा रहे थे। इनका कहना है कि प्रशासन के अलर्ट के बाद उन्होंने घग्घर से निकले मोगों को बंद करने की तैयारी कर रहे हैं। किसानों के हाथों में कस्सी और गट्टे थे, जिन्हें मिट्टी से भरकर मोगों को बंद किया जा सकें। मोगो में फलडी पानी आने से खेतों को नुकसान हो सकता है। टीम इसके बाद जब झोरडनाली के पास पहुंची तो किसान अमरजीत, सिद्दू कुमार, अशोक भी घग्घर के तटबंधों पर बने मोगों को बंद करने के लिए जा रहे थे। किसानों ने बताया कि उनके गांव के पास तटबंध कमजोर हैं और कई बार यहीं से घग्घर टूटी है। सरपंच ने सभी ग्रामीणों को अपने अपने मोगे बंद करने के लिए कहा। वहीं झोरडनाली गांव पर राजस्व विभाग के पटवारी पुल पर डेरा डाले हुए थे। पुल पर आने वाली जलकुंभी को रोकने के लिए मजदूर लगाए हुए थे। वे बड़े बड़े डंडों के सहारे से जलकुंभी को घग्घर से निकाल रहे थे।
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नाली दे बन ते कदी किसे अफसर ने गेडा नहीं मारिया, हर थां ते टूटन दा खतरा ए
जलभराव से काट रहे हैं फसले, ढाणी सतनाम व कुताबढ, नकौडा व शेखुपरा के बीच बना आरजी पुल डूबा
ओटूू वियर से आगे गांव नगराना तक विभाग ने अब तटबंधों को मजबूत करने के लिए जेसीबी मशीन से मिट्टी डालनी शुरू कर दी है। इस मौके पर मौजूद गुरदेव सिंह कूका नगराणा, रिछपाल सिंह, राज सिंह, बसंत सिंह बाजवा, नछतर दयोल, सुखदेव चीमा, सोनू चीमा, बलदेव दयोल का कहना है कि नाली दे बन्न ते कदी किसे अफसर ने गेडा नहीं मारिया। हर थां ते टूटन दा खतरा ए। वड्डे अफसर गल ही नहीं सुनदे। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग हर बार जलस्तर बढने पर ही सक्रिय होता है। उच्चाधिकारी मौके पर आकर मुआयना करते हैं और न ही लोगों से कमजोर तटबंधों को लेकर समस्याएं सुनते हैं। अधिकारी ओटू हैड पर ही डेरा डालकर और अपने कर्मचारियों से बात कर वापस चले जाते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अनेक जगहों पर वृक्ष उखाडे़ गए हैं और वहां मिट्टी नहीं डाली गई है। जैसे ही जलस्तर बढ़ेगा वहां से तटबंध टूटने का खतरा बढ़ जाएगा। कई जगहों पर बारिश के कारण मिट्टी बह गई। चूहों की वजह से तटबंधों में सुराख हो गए। प्रशासन अब बडे़ खड्डों को भरकर सक्रियता दिखाने का प्रयास कर रहा है। नगराना के किसान गुरदेव सिंह जलभराव में अपने खेत में चारा काट रहा है। जबकि थेड़ी मोहर सिंह का किसान इकबाल सिंह भी पशुओं के लिए चारा काटने के लिए जलभराव वाले खेतों में जाने को मजबूर है। ज्यादातर किसानों की फसलें अभी पकी नहीं हैं और वह आंखों के सामने फसल डूबती देखने को मजबूर हैं। घग्घर में जलस्तर बढ़ने से ढाणी सतनाम सिंह और कुताबढ़ गांव के बीच सीधा संपर्क टूट गया है। इसी प्रकार से नकौडा गांव और शेखूपुरा गांव के बीच बना पुल भी पानी में डूब गया। ओटू हैड पर बढते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट तो घोषित कर दिया है लेकिन सिंचाई विभाग के पास कर्मचारियों व साधनों की कमी है। तटबंधों पर रात के समय लाइटों व रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए जोकि अभी तक नहीं की गई है। जिससे रात के समय किसी प्रकार की अनहोनी का भय बना हुआ है। अन्य विभागों से साथ न मिलने से सिंचाई विभाग भी बेबस नजर आ रहा है।
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अमृतसर खुर्द से लेकर तलवाड़ा खुर्द तक पांच में से चार पुल डूबे, पांच फुट पानी ऊपर
ऐलनाबाद क्षेत्र के गांव अमृतसर खुर्द के पास घग्घर पर बने आरजी पुल से पांच फुट ऊपर पानी बह रहा है। तलवाडा खुर्द तक करीब पांच आरजी पुल आते हैं। जिसमें से चार डूब चुके हैं। इससे घग्घर के दोनों ओर स्थित गांवों के किसानों का आपस में सीधा संपर्क टूट गया है। पहले किसान और ग्रामीण इन पुलों से अपने खेतों और अन्य क्षेत्रों में आते जाते थे। घग्घर के किनारे बसे गांव अमृतसर खुर्द, कला, ठोबरियां, मिर्जापुरा, तलवाड़ा के किसान कोमल सिंह, भूपेन्द्र सिंह, ठाकुर सिंह, सुखदेव सिंह, रिछपाल सिंह, बलविन्द्र सिंह, गुरभेज सिंह ने बताया कि वे लोग सुबह से निरंतर बढ़ रहे पानी को देख रहे हैं। नदी का पानी इस कदर तेज है कि गत 10 घंटों में करीब 5 फुट तक जलस्तर बढ़ा है। जैसे -जैसे पानी बढ़ रहा है, उन लोगों की चिंता भी बढ़ रही है। सिंचाई विभाग के जेई रघुवीर सिंह का कहना है कि ओटू से लेकर राजस्थान साइफन तक दौरा कर, जगह-जगह मिट्टी गिरवाने का कार्य किया है । सभी गांवों के रास्तो को मजबूत किया गया है । राजस्थान साईफन पर भी सफाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है, ताकि पानी के बहाव में निरंतरता बनी रहे।
कोट्स
घग्गर में जलस्तर बढ़ना शुुरु हो गया है। गुहला चीका हैड पर लगातार जलस्तर बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ रही है। प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी किया गया है। विभाग के पास कर्मचारियों व साधनों की कमी है। अन्य विभागों व उच्चाधिकारियों से इस बारे में अवगत करवाया गया है। किसी विभाग की ओर से साधन और कर्मचारी उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं जिसको लेकर समस्या आ रही है। विभाग के कर्मचारियों को कमजोर तटबंधों को मजबूत करने के आदेश जारी किए गए है। जलस्तर 2010 से कहीं अधिक बढ़ने की संभावना है।
एनकेभोला, कार्यकारी अभियंता।
जलस्तर की ताजा स्थिति
गुहलाचीका हेड : 43872 क्यूसिक
खनौरी हेड : 12000 क्यूसिक
चांदपुर हेड : 10500 क्यूसिक
ओटू हैड : 8000 क्यूसिक
ताजेवाला : 11500 क्यूसिक
राजस्थान साइफन : 4000 क्यूसिक