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Sirsa News: 50 साल पुरानी पेयजल पाइपलाइन बदली जाएंगी, जनस्वास्थ्य विभाग ने लगाया टेंडर
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कालांवाली। जलघर कालांवाली में बनी डिग्गियों का दृश्य । संवाद
कालांवाली। करीब 30 हजार की आबादी वाले शहर के लोगों के लिए खुशी की खबर है। शहरवासियों को पिछले करीब 50 साल पहले डाली गई पुरानी व खस्ताहाल पेयजल पाइपलाइन के कारण आ रही परेशानियों से निजात मिलने वाली है। जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने करीब 9 करोड़ 4 लाख 83 हजार रुपये की लागत से भाखड़ा नहर से जलघर तक और पूरे शहर में नई पाइपलाइन बिछाने के लिए टेंडर लगा दिए हैं।
टेंडर 24 नवंबर को ओपन होगा। टेंडर अलाॅट होने व वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद करीब डेढ़ साल में निर्माण कार्य पूरा होगा। इसके बाद शहरवासियों को दूषित सप्लाई, पेयजल किल्लत की समस्या के साथ-साथ भयंकर बीमारियों से भी निजात मिलेगी। संवाद
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यह होगा निर्माण कार्य
जनस्वास्थय विभाग की ओर से भाखड़ा नहर से लेकर कालांवाली के जलघर तक अंडरग्राउंड लोहे की डीआई पाइपलाइन बिछाई जाएगी। भाखड़ा नहर पर एक सैमवेल स्टेशन बनाया जाएगा। जहां से पंप और मोटर के माध्यम से पानी जलघर तक पहुंचाया जाएगा। शहर के कुल 16 वार्डों के वैध एरिया के मुख्य बाजारों, गली-मोहल्ले में पुरानी व खस्ताहाल पेयजल पाइपलाइन को बदलकर तीन इंची लाइन की जगह 4, 6, 8 ईंची पेयजल पाइपलाइन बिछाई जाएंगी। साथ में गुरुद्वारा बस्ती और माॅडल टाउन एरिया के लोगों के लिए अलग-अलग दो बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण करवाया जाएगा। इसके अलावा जलघर में पानी की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए दो नए एसएस वाटर टैंक का निर्माण करवाया जाएगा।
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1961 में हुआ था जलघर का निर्माण
शहर में बिछी पेयजल पाइपलाइन करीब 50 साल से अधिक पुरानी है, जो वर्तमान में बिल्कुल खस्ता व जर्जर हालत में है। पेयजल पाइपलाइन जगह-जगह से टूटी हुई है, पानी लीकेज होता रहता है और पानी सीवरेज के पानी के साथ मिक्स होकर सप्लाई होता है। कालांवाली क्षेत्र में वर्ष 1955 में भाखड़ा नहर बनाने का काम शुरू हुआ था और वर्ष 1958 में भाखड़ा नहर में पानी आया था। इसके बाद वर्ष 1961 में कालांवाली में जलघर का निर्माण हुआ था। उसी समय ही शहर कालांवाली में पेयजल पाइपलाइन बिछाई गई थी।
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वर्तमान में इतनी है पानी की क्षमता
वर्तमान में जलघर में चार डिग्गियां बनी हुई हैं। इनकी पानी की क्षमता करीब 111 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। जबकि शहर में रोजाना करीब 44 लाख लीटर पेयजल की सप्लाई की जाती है। नहरबंदी के कारण शहर में पेयजल किल्लत की समस्या रहती है। ऐसे में विभाग की ओर से शहर में नहरी पानी की बजाय बोरवेल के पानी की सप्लाई दी जाती है। जोकि आमजन के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है। इस पानी से पेट, लीवर, त्वचा, घुटने, बाल झड़ने, डायरिया, दस्त इत्यादि कई प्रकार की बीमारियां फैल रही हैं। उक्त समस्या के बारे में शहरवासी एसडीओ, एसडीएम, डीसी, सहित कई उच्चाधिकारियों और प्रदेश सीएम को भी अवगत करवा चुके थे, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बरकरार थी।
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सरकार से मंजूरी मिलने के बाद विभाग ने शहर में नई पाइपलाइन डालने, एसएस टैंक बनाने और दो नई बूस्टिंग स्टेशन बनाने इत्यादि कार्य के लिए टेंडर लगा दिया है। टेंडर खुलने के बाद वर्क आर्डर देकर काम शुरू करवा करीब डेढ़ साल में निर्माण कार्य पूरा करवाया जाएगा। इसके बाद शहरवासियों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी। साथ में पेयजल किल्लत, दूषित पेयजल सप्लाई सहित कई समस्याओं से निजात मिलेगी।-- - जगबीर सिंह, एसडीई, जनस्वास्थ्य विभाग, कालांवाली।
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टेंडर 24 नवंबर को ओपन होगा। टेंडर अलाॅट होने व वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद करीब डेढ़ साल में निर्माण कार्य पूरा होगा। इसके बाद शहरवासियों को दूषित सप्लाई, पेयजल किल्लत की समस्या के साथ-साथ भयंकर बीमारियों से भी निजात मिलेगी। संवाद
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यह होगा निर्माण कार्य
जनस्वास्थय विभाग की ओर से भाखड़ा नहर से लेकर कालांवाली के जलघर तक अंडरग्राउंड लोहे की डीआई पाइपलाइन बिछाई जाएगी। भाखड़ा नहर पर एक सैमवेल स्टेशन बनाया जाएगा। जहां से पंप और मोटर के माध्यम से पानी जलघर तक पहुंचाया जाएगा। शहर के कुल 16 वार्डों के वैध एरिया के मुख्य बाजारों, गली-मोहल्ले में पुरानी व खस्ताहाल पेयजल पाइपलाइन को बदलकर तीन इंची लाइन की जगह 4, 6, 8 ईंची पेयजल पाइपलाइन बिछाई जाएंगी। साथ में गुरुद्वारा बस्ती और माॅडल टाउन एरिया के लोगों के लिए अलग-अलग दो बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण करवाया जाएगा। इसके अलावा जलघर में पानी की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए दो नए एसएस वाटर टैंक का निर्माण करवाया जाएगा।
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1961 में हुआ था जलघर का निर्माण
शहर में बिछी पेयजल पाइपलाइन करीब 50 साल से अधिक पुरानी है, जो वर्तमान में बिल्कुल खस्ता व जर्जर हालत में है। पेयजल पाइपलाइन जगह-जगह से टूटी हुई है, पानी लीकेज होता रहता है और पानी सीवरेज के पानी के साथ मिक्स होकर सप्लाई होता है। कालांवाली क्षेत्र में वर्ष 1955 में भाखड़ा नहर बनाने का काम शुरू हुआ था और वर्ष 1958 में भाखड़ा नहर में पानी आया था। इसके बाद वर्ष 1961 में कालांवाली में जलघर का निर्माण हुआ था। उसी समय ही शहर कालांवाली में पेयजल पाइपलाइन बिछाई गई थी।
वर्तमान में इतनी है पानी की क्षमता
वर्तमान में जलघर में चार डिग्गियां बनी हुई हैं। इनकी पानी की क्षमता करीब 111 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। जबकि शहर में रोजाना करीब 44 लाख लीटर पेयजल की सप्लाई की जाती है। नहरबंदी के कारण शहर में पेयजल किल्लत की समस्या रहती है। ऐसे में विभाग की ओर से शहर में नहरी पानी की बजाय बोरवेल के पानी की सप्लाई दी जाती है। जोकि आमजन के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है। इस पानी से पेट, लीवर, त्वचा, घुटने, बाल झड़ने, डायरिया, दस्त इत्यादि कई प्रकार की बीमारियां फैल रही हैं। उक्त समस्या के बारे में शहरवासी एसडीओ, एसडीएम, डीसी, सहित कई उच्चाधिकारियों और प्रदेश सीएम को भी अवगत करवा चुके थे, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बरकरार थी।
सरकार से मंजूरी मिलने के बाद विभाग ने शहर में नई पाइपलाइन डालने, एसएस टैंक बनाने और दो नई बूस्टिंग स्टेशन बनाने इत्यादि कार्य के लिए टेंडर लगा दिया है। टेंडर खुलने के बाद वर्क आर्डर देकर काम शुरू करवा करीब डेढ़ साल में निर्माण कार्य पूरा करवाया जाएगा। इसके बाद शहरवासियों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी। साथ में पेयजल किल्लत, दूषित पेयजल सप्लाई सहित कई समस्याओं से निजात मिलेगी।

कालांवाली। जलघर कालांवाली में बनी डिग्गियों का दृश्य । संवाद