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रबी फसलों में यूरिया की कुल खपत का 50 फीसदी स्टॉक शुरुआती सीजन में ही बंटा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Nov 2021 12:24 AM IST
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50% stock of the total consumption of urea in Rabi crops was distributed in the initial season itself.
यूरिया लेने के लिए वाहनें की लगी लंबी लाइन। - फोटो : Sirsa
सिरसा। डीएपी की किल्लत और वितरण को लेकर प्रशासन की ओर से बरती गई लापरवाही से किसानों ने सबक ले लिया है। सिंचाई के बाद परेशानी ना आए, इसलिए किसानों ने अभी से यूरिया का स्टॉक करना शुरू कर दिया है। किसानों का तर्क है कि यदि सिंचाई के तुरंत बाद यूरिया नहीं मिली तो फसल खराब होने का भय है। दूसरा यदि अभी स्टॉक करके रख और बाद में जरूरत पड़ी तो प्रशासन एक दम से वितरण नहीं कर पाएगा। पूरे सीजन में यूरिया का 1 लाख 10 हजार मीट्रिक टन खाद की खपत होती है, इसमें से अभी तक करीब 50 फीसदी स्टॉक का वितरण हो चुका है।
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जिले में रबी फसलों की बुवाई का कार्य 90 फीसदी तक पूरा हो चुका है। डीएपी की किल्लत से उबरे किसान अब से ही इफको केंद्रों पर रबी फसलों में डालने के लिए यूरिया लेते नजर आ रहे है। स्थिति यह बनी हुई है कि रबी फसल की कुल खपत का 50 फीसदी स्टॉक जिले में पहुंच चुका है और किसान बिना देरी किए यूरिया के बैगों को ट्रालियों में भर घर ले जाकर स्टॉक कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यूरिया का स्टॉक खत्म हो और डीएपी खाद लेने जैसी स्थिति ना बने इसलिए पहले से खरीदकर रख रहे है। ताकि गेहूं में पानी लगने के बाद उसमें यूरिया डाली जा सके।
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अभी किसान कतार में, ताकि बाद में ना आए दिक्कत
रबी फसलों के समय जिले में यूरिया की 1 लाख 10 हजार मीट्रिक टन खपत होती है। जिसका 50 फीसदी करीब 54 मीट्रिक टन खाद जिले में पहुंच चुकी है। जिससे अभी से किसान लाइनों में लग ले रहे हैं। यूरिया की कालाबाजारी को रोकने के लिए फिलहाल विभाग द्वारा एक आधार कार्ड पर 20 बैग यूरिया ही जारी की जा रही है। किसान राममेहर, सोहन सिंह व दिलीप कुमार का कहना है कि यूरिया लेने के लिए अभी से इतनी मारामारी है। विभाग द्वारा एक किसान को 20 बैग ही दिए जा रहे हैं। ताकि बिजी गई फसल में पानी लगाने के बाद उन्हें यूरिया की कमी की सामना न करना पड़े।
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गेहूं की दिसंबर में की जाएगी सिंचाई
गेहूं फसल को पहला पानी दिसंबर माह की 15 के तक लगाना शुरू होगा। जिसके बाद फसल को यूरिया की जरूरत होगी। किसानों को डर है कि अगर यूरिया की कमी हुई तो डीएपी की तरह लाइन में लगाना पड़ेगा और फसल खराब हो जाएंगी। हालांकि अगेती फसलों को पानी लगाकर खाद डाली जा रही है।

डीएपी उपलब्ध, नहीं खरीद कर रहे किसान
जिले में डीएपी का अभी करीब 800 एमटी का स्टॉक उपलब्ध है। लेकिन बिजाई के समय किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी नहीं मिली। बिजाई समय रहते हो इसलिए किसानों ने डीएपी की जगह अन्य खाद का प्रयोग किया। जिसके कारण अब जिले में रबी फसल की बिजाई के समय होने वाली डीएपी की खपत का स्टॉक पहुंच रहा है। लेकिन उसे लेने के कोई नहीं आ रहा।
किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध रहेगी। किसान जरूरत से ज्यादा स्टॉक घर ले जाकर ना रखे।
-सुखदेव सिंह, क्वालिटी कंट्रोलर, कृषि विभाग सिरसा

ट्राली में यूरिया का बैग डालते हुए मजदूर।

ट्राली में यूरिया का बैग डालते हुए मजदूर।- फोटो : Sirsa

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