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किसानों को नहीं मिल रहे सरसों का समर्थन मूल्य
Updated Thu, 22 Mar 2018 01:28 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
जिले में किसान सरकार से नाखुश नजर आ रहे हैं। सरकार न तो किसानों को उनकी फसलों की उचित कीमत दे पा रही है न ही उनकी समस्याओं का समाधान करने में सफल रही है। बुधवार को मंडी में सरसों की सरकारी खरीद शुरू होनी थी, लेकिन अधिक नमी के चलते खरीद नहीं हुई। ऐसे में प्राइवेट एजेंसी ने मनमाने दाम में सरसों की खरीदी। पूरे दिन में शाम तक सिरसा मंडी में 371 क्विंटल सरसों की खरीद हुई।
सरकारी रेट तो केवल दिखावे के
सरकारी रेट तो केवल दिखाने को ही हैं, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। किसानों को तो चारों तरफ से मार है। न तो फसल होती है और न ही उसके उचित रेट मिल पाते हैं। मैने सरसों को 4000 की बजाय 3350 में ही बेच दिया। अब करें भी तो क्या। 4000 सरसों की सरकारी कीमत पता नहीं कब मिलेगी।
-संतलाल, किसान(नेजियाखेड़ा)।
कब तक घर पर रखेंगे
सरसों की कीमत मंडी में और असल की कीमत में बहुत अंतर है। कहने को तो सरकार ने सरसों की सरकारी कीमत 4000 कर रखी है, लेकिन इस कीमत पर सरसों को खरीदता तो कोई नहीं है। आज मेरी फसल की कीमत 3400 रुपये लगाई गई थी लेकिन मेरे अड़ने पर पहले तो 3500 किए मैं फिर भी नहीं माना तो 3510 कर दिए फिर मैंने सोचा कि बेचनी तो है ही आज नहंी तो कल, कब तक घर पर रखेंगे।
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जयपाल, किसान(बुखारखेड़ा)।
किसान बिरादरी तो सारी तंग आगी सरकार कनु
बेरो कोनी कद 4000 रिपिया सरकारी बोली गा मिलेगा, किसान बिरादरी तो सारी तंग आगी सरकार कनु। अब तो किसान यूनी बस भगवान गै भरोसै ही है। बीज आलै टाइम बीज कोनी मिलै, सारो समान इतनो महंगो है के किसान गी झोली अर किसमत सूं दूर होण लागरयो सै।
-विनोद कुमार, किसान(कंवरपुरा)।
सरकार और मौसम दोनों ने मायूस किया
आज किसान सरकार की गलत नीतियों से तंग आ चुका है। सरकारी रेट तो 4000 रुपये है लेकिन सरकारी बोली शुरू न होने के कारण या तो किसान अपनी फसल को कम रेटों पर बेचने को मजबूर हैं या फिर मंडी से घर लेकर जा रहा है और फसल की कीमत बढ़ने का इंतजार कर रहा है। सरकार और मौसम ने किसानों को मायूस किया है, और यदि ऐसा ही चलता रहा तो किसानों की आत्महत्याओं का आंकड़ा कम होने की बजाय और भी ज्यादा बढ़ेगा।
निहाल, किसान(निरवाण)।
हम भी चाहतें हैं कि हमारे सभी किसानों को फसल का उचित रेट मिले लेकिन सरसों में नमी निर्धारित मात्रा से ज्यादा होने के कारण सरसों को सरकारी कीमत पर नहीं खरीदा जा सका। उम्मीद है कि वीरवार से हालात ठीक होंगे और किसानों को उनकी फसल का उचित रेट मिलेगा। इस और भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं कि कोई भी किसान मायूस होकर घर पर न जाएं, हम किसी को भी निराश नहीं देखना चाहते।
-पर्मजीत सिंह नांदल, सचिव मार्केट कमेटी सिरसा।
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सिरसा।
जिले में किसान सरकार से नाखुश नजर आ रहे हैं। सरकार न तो किसानों को उनकी फसलों की उचित कीमत दे पा रही है न ही उनकी समस्याओं का समाधान करने में सफल रही है। बुधवार को मंडी में सरसों की सरकारी खरीद शुरू होनी थी, लेकिन अधिक नमी के चलते खरीद नहीं हुई। ऐसे में प्राइवेट एजेंसी ने मनमाने दाम में सरसों की खरीदी। पूरे दिन में शाम तक सिरसा मंडी में 371 क्विंटल सरसों की खरीद हुई।
सरकारी रेट तो केवल दिखावे के
सरकारी रेट तो केवल दिखाने को ही हैं, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। किसानों को तो चारों तरफ से मार है। न तो फसल होती है और न ही उसके उचित रेट मिल पाते हैं। मैने सरसों को 4000 की बजाय 3350 में ही बेच दिया। अब करें भी तो क्या। 4000 सरसों की सरकारी कीमत पता नहीं कब मिलेगी।
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-संतलाल, किसान(नेजियाखेड़ा)।
कब तक घर पर रखेंगे
सरसों की कीमत मंडी में और असल की कीमत में बहुत अंतर है। कहने को तो सरकार ने सरसों की सरकारी कीमत 4000 कर रखी है, लेकिन इस कीमत पर सरसों को खरीदता तो कोई नहीं है। आज मेरी फसल की कीमत 3400 रुपये लगाई गई थी लेकिन मेरे अड़ने पर पहले तो 3500 किए मैं फिर भी नहीं माना तो 3510 कर दिए फिर मैंने सोचा कि बेचनी तो है ही आज नहंी तो कल, कब तक घर पर रखेंगे।
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जयपाल, किसान(बुखारखेड़ा)।
किसान बिरादरी तो सारी तंग आगी सरकार कनु
बेरो कोनी कद 4000 रिपिया सरकारी बोली गा मिलेगा, किसान बिरादरी तो सारी तंग आगी सरकार कनु। अब तो किसान यूनी बस भगवान गै भरोसै ही है। बीज आलै टाइम बीज कोनी मिलै, सारो समान इतनो महंगो है के किसान गी झोली अर किसमत सूं दूर होण लागरयो सै।
-विनोद कुमार, किसान(कंवरपुरा)।
सरकार और मौसम दोनों ने मायूस किया
आज किसान सरकार की गलत नीतियों से तंग आ चुका है। सरकारी रेट तो 4000 रुपये है लेकिन सरकारी बोली शुरू न होने के कारण या तो किसान अपनी फसल को कम रेटों पर बेचने को मजबूर हैं या फिर मंडी से घर लेकर जा रहा है और फसल की कीमत बढ़ने का इंतजार कर रहा है। सरकार और मौसम ने किसानों को मायूस किया है, और यदि ऐसा ही चलता रहा तो किसानों की आत्महत्याओं का आंकड़ा कम होने की बजाय और भी ज्यादा बढ़ेगा।
निहाल, किसान(निरवाण)।
हम भी चाहतें हैं कि हमारे सभी किसानों को फसल का उचित रेट मिले लेकिन सरसों में नमी निर्धारित मात्रा से ज्यादा होने के कारण सरसों को सरकारी कीमत पर नहीं खरीदा जा सका। उम्मीद है कि वीरवार से हालात ठीक होंगे और किसानों को उनकी फसल का उचित रेट मिलेगा। इस और भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं कि कोई भी किसान मायूस होकर घर पर न जाएं, हम किसी को भी निराश नहीं देखना चाहते।
-पर्मजीत सिंह नांदल, सचिव मार्केट कमेटी सिरसा।