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Sirsa News: खाद के लिए तीन वर्षों से भटक रहे 4 गांवों के किसान

Sun, 19 Jul 2026 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sun, 19 Jul 2026 11:34 PM IST
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4 villages farmers bothered for fertilizer
अलीकां पैक्स
हैफेड का 56 लाख बकाया, एजेंसी बोली पहले पुराना बकाया दो
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अलीकां पैक्स करीब 12 करोड़ रुपये के घाटे में

फोटो - 12 से 15

ओढ़ां। डबवाली क्षेत्र के गांव अलीकां पैक्स के अधीन आने वाले चार गांवों के किसान पिछले तीन वर्षों से तत्कालीन पैक्स प्रबंधक के गबन का खामियाजा भुगत रहे हैं। स्थिति यह है कि किसान गांवों में खाद विक्रय केंद्र होने के बावजूद खाद के लिए परेशान हैं।
खाद लेने के लिए किसानों को या तो मंडी डबवाली जाना पड़ता है या फिर ज्यादा दाम देकर निजी दुकानों से खरीदनी पड़ रही है। चारों गांवों के खाद विक्रय केंद्रों पर वर्षों से ताले लटके हुए हैं। किसानों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब किसानों को खाद ही नहीं मिल रही तो कैसी पैक्स। किसानों ने विभाग के उच्चाधिकारियों से उनकी समस्या का समाधान करने की मांग की है।
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दरअसल वर्ष 2023 में अलीकां पैक्स का चार्ज पैक्स प्रबंधक सोहन लाल के पास था। जहां सोहनलाल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न केवल अवैध नियुक्तियां कीं अपितु अवैध तरीके से अपने चहेते कर्मचारियों को लाखों का एरियर भी दे डाला। इसके अतिरिक्त उसने खाद आदि के रूप में पैक्स में करीब 80 लाख का गबन किया।
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सामने आया है कि सोहनलाल हैफेड से खाद उधार खरीदता रहा और उस खाद को आगे बेचकर राशि अपनी जेब में डालता रहा। उधर, जब विक्रय केंद्रों पर खाद नहीं आई तो किसानों ने मुद्दा उठाया।
मामले से पर्दा तब उठा जब तत्कालीन पैक्स प्रबंधक मदनलाल को हैफेड ने करीब 56 लाख रुपये बकाया राशि पहले जमा करवाने के लिए लेटर जारी किया लेकिन राशि जमा न होने पर हैफेड ने खाद की सप्लाई बंद कर दी।
अब अगर खाद चाहिए तो उसका भुगतान एडवांस तौर पर करवाना पड़ेगा लेकिन अब एडवांस करवाए कौन, क्योंकि अलीकां पैक्स 30 जून तक करीब 12 करोड़ रुपये के घाटे में दिखाई गई है।
लाखों की बायो आदि अन्य उर्वरकों के रूप में पड़ी खाद गोदामों में फांक रही धूल
तत्कालीन पैक्स प्रबंधक सोहनलाल ने अलीकां में रहते हुए जो खाद मंगवाई थी वह अलीकां व लखुआना में वर्षों से पड़ी सड़ रही है। कोई भी इस खाद को लेने के लिए तैयार नहीं है। सामने आया कि एक पूर्व पैक्स प्रबंधक सोहनलाल के समय की है। उन्होंने निजी कंपनियों से लालचवश विभिन्न तरह की खाद की खरीद की थी। इस खाद की कीमत 12 से 15 लाख के बीच बताई जा रही है । डबवाली सर्कल के अधीन 9 पैक्स पड़ती हैं। सभी पैक्स करोड़ों रुपये के घाटे में चल रही हैं।

कोट्स
हमारे गांव में 2023 से एक बार भी यूरिया या डीएपी खाद नहीं आई। गांव में खाद विक्रय केंद्र है लेकिन उस पर 6 माह से ताला लटका हुआ है। जिस उर्वरक की किसान को आवश्यकता नहीं वह गोदाम में पड़ी पत्थर बन रही है। हमें खाद के लिए मंडी डबवाली जाना पड़ता है। हमारी तो यही मांग है कि हमें खाद गांव में ही मिलनी चाहिए।
-लखविंदर सिंह, किसान गांव अलीकां।
कोट्स
लंबा समय हो गया गांव में खाद आए हुए। हमें मजबूरन डबवाली से खाद लानी पड़ती है। जिस खाद की किसानों को जरूरत नहीं वह काफी मात्रा में पैक्स में पड़ी है। लालचवश ये खाद खरीद कर पैक्स को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है। मांग है कि जिसने खाद खरीदी उससे वसूली व गांव में जरूरत के मुताबिक खाद मिलनी चाहिए।
-वकील सिंह बराड़, किसान गांव मौजगढ़।
कोट्स
गांव में किसानों का खाद के लिए बुरा हाल है। खाद के लिए निजी दुकानदारों के पास जाना पड़ता है। किसानों को जब खाद ही नहीं मिलती तो कैसी पैक्स सोसायटियां। हमारे आसपास के गांवों में खाद नहीं मिलती। खाद लेनी है तो मंडी डबवाली जाना पड़ता है। मेरी यही मांग है कि खाद गांव में मिले। -हंसपाल सिंह, किसान गांव मसीतां।
कोट्स
हां, हमारे पास लंबे समय से खाद नहीं आई। मैंने यहां का चार्ज संभालने के बाद 4 हजार बैग खाद की डिमांड भेजी थी लेकिन हैफेड का पूर्व का करीब 56 लाख रुपये का बकाया बताया जा रहा है। ये पूर्व पैक्स प्रबंधक के समय का है। मुझे नहीं पता कि इतना बकाया क्यों और कैसे है। एजेंसी एडवांस में भुगतान मांग रही है। पैक्स तो पहले से ही घाटे में चल रही है। बकाया होने के चलते हमें खाद नहीं दी जा रही है। हम तो खुद परेशान हैं।

-वीरेंद्र बिश्नोई, पैक्स प्रबंधक अलीकां।

कोट्स

हमने अलीकां पैक्स को सीजन में खाद दी थी, उस समय पैक्स प्रबंधक सोहन लाल के पास चार्ज था, पहले तो खाद उधार लेते रहे जब पैसे मांगे तो पैक्स का गबन सामने आ गया । हैफेड का अलीकां पैक्स की ओर खाद का करीब 56 लाख का बकाया है । हमने जीएफ व एएआर को अनेकों बार पत्र लिखा। आगे से जवाब मिलता है कि अलीकां घोटाले की जांच चल रही है। जो भी है लेकिन हमने तो खाद दी थी। सभी पैक्सों को हमने कह रखा है एडवांस में पेमेंट जमा करवाओ तो ही खाद मिलेगी। हां इसमें किसान बेवजह पिस रहे हैं, परंतु हम मजबूर है।

---संजय मेहता स्टोर कीपर ( हैफड खाद एजेंसी)
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