फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   350 asthi waiting for a immersion

पीपल के पेड़ और दीवार पर लटकी 350 अस्थियों को मोक्ष का इंतजार

Sun, 19 Apr 2020 10:48 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2020 10:48 PM IST
विज्ञापन
350 asthi waiting for a immersion
350 asthi waiting for a immersion - फोटो : Sirsa
लॉकडाउन के चलते जिले में होने वाली मौत के बाद अस्थियां विसर्जित नहीं हो पाई है। लॉकडाउन के दौरान अगर कोई परिवार हरिद्वार अस्थियां विसर्जन करने पहुंच भी गया तो वहां से उसे अस्थियां बिना बहाए वापस ही लौटना पड़ा। जिसके बाद उन अस्थियों को कहीं दिवार तो कहीं पीपल के पेड़ पर लटका दिया गया। जिले में आज करीब 300 से ज्यादा अस्थियां मोक्ष का इंतजार कर रही है। वहीं सिरसा के शिवपुरी में करीब 27 लावारिस अस्थियां भी है जो मोक्ष द्वार की दीवार पर लटकी पड़ी है। लॉकडाउन के बाद इन अस्थियों को हरिद्वार में बहाया जाएगा। जिले के लोग कर्मकांड के लिए सिरसा शिवपुरी के आचार्य से फोन कर जानकारी ले रहे हैं।
विज्ञापन

कोरोना वायरस के चलते 24 मार्च से पूरे भारत में लॉकडाउन की शुरूआत हुई थी। इस दौरान जो जहां था वहीं पर उसको रोक दिया गया था। प्रशासन ने इस पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी कि कोई भी हरिद्वार न जाए। लेकिन जिले के कुछ लोग हरिद्वार तक पहुंच गए, जब लोग हरिद्वार पहुंचे तो वहां पर मौजूद पंडितों ने पूजा-पाठ तथा कर्मकांड करने से मना कर दिया, जिससे लोगों को वापस लौटना पड़ा। भारतीय संस्कृति के अनुसार अस्थियों को कभी घर में नहीं रखा जाता। हरिद्वार से वापस आए लोग अस्थियों को या तो शिवपुरी में बने मोक्ष द्वार के कमरे की दीवार पर लटका आए या फिर उन्होंने उन अस्थियों को पीपल के पेड़ के नीचे रख दी। शहर की शिवपुरी में करीब 350 अस्थियां लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रही हैं, जिससे वह गंगा में बहाई जा सके। इनमें से करीब 27 अस्थियां वह है जो लावारिस तौर पर दीवार से लटकी हुई है।
विज्ञापन

लॉकडाउन खुलने के बाद होगी गंगा में प्रवाहित
जिले के गांव जमाल के सरपंच नंदलाल बैनीवाल ने बताया कि उनके गांव में करीब लॉकडाउन के दौरान तीन लोगों की मौत हुई है। अंतिम संस्कार के बाद परिजन मृतक की अस्थियां बहाने हरिद्वार जाते हैं, लेकिन लॉकडाउन के चलते वह घर से बाहर नहीं निकल सकते। इस कारण उन लोगों ने उनकी अस्थियां पीपल के पेड़ से लटकाई हुई है। जो लॉकडाउन खुलने के बाद हरिद्वार गंगा में प्रवाहित की जाएगी। गांव गुड़िया खेड़ा के सरपंच भरत सिंह बिरड़ा ने बताया कि उनके गांव में भी इन दिनों तीन मौत हुई है। जिनमें दो लोगों की अस्थियां मंदिर में रखवाई गई है, वहीं एक की अस्थियां अभी शमशान घाट में रखी गई है। गांव माधोसिंघाना में इन दिनों दो लोगों की मौत हुई है। जिनकी अस्थियां अभी तक गंगा में प्रवाहित नहीं कि जा सकी है। गांव के सरपंच पवन बैनीवाल ने बताया कि लॉकडाउन खुलने के बाद ही लोग अस्थियां लेकर हरिद्वार जा पाएंगे। फिलहाल घर से बाहर निकलना तथा एकजुट होना ठीक नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

फोन पर लोग ले रहे जानकारी
सिरसा शिवपुरी के आचार्य भागीरथ ने बताया कि जिले के लोग उनसे फोन पर जानकारी ले रहे हैं कि वह इस समय हरिद्वार तो नहीं जा सकते, फिर इन अस्थियों का क्या करें। आचार्य भागीरथ ने बताया कि वह खुद मृतकों का कर्म कांड सिरसा शिवपुरी में कर रहे हैं। आचार्य के अनुसार वह दिन में एक से तीन का कर्मकांड करते हैं। इसके साथ ही लोग पहले ही अगले दिन के लिए उनको फोन कर देते हैं।

कॉट्स---
शहर में जो अस्थियां है उनको शिव पूरी में मोक्ष द्वार में दिवार पर लटकाया गया है। वहीं गांवों में इसकी कोई व्यवस्था नहीं होती है, जिस कारण उनको पीपल के पेड़ के नीचे रखना अथवा ऊपर लटकाना शुभ माना जाता है। जिले में जो लोग मृत होते हैं उनका कर्मकांड सिरसा शिवपुरी में ही किया जाता है।
-पंडित भागीरथ, आचार्य शिवपुरी सिरसा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed