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गिगोरानी माइनर टूटने से 30 एकड़ फसल में भरा पानी
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30 acres of crop filled with water due to breakdown of Gigarani minor
- फोटो : Sirsa
खंड के गांव शक्कर मंदोरी व चाहर वाला के बीच में बुधवार को गिगोरानी माइनर नहर टूटने से करीब 40 एकड़ जमीन में पानी भर गया। जिसमें 30 एकड़ में नई बिजाई की हुई सरसों की फसल तबाह हो गई। किसानों ने इसकी सूचना सिंचाई विभाग को दी सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पीछे से नहर को बंद करवा कर दरार को पाटने का काम शुरू किया।
किसान रोहताश, सुरेंद्र सिंह, राकेश कुमार, कृष्ण कुमार, मदनलाल, मुकेश, रामनिवास, ओम प्रकाश ने बताया कि कि अभी बिजाई की वही सरसों की फसल में पानी भरने से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। उन्होंने बताया कि नहर को करीब 18 महीने पहले ही रीमॉडलिंग करके नया बनाया गया था और मात्र डेढ़ साल में ही नहर टूट गई। शक्कर मंदोरी के पूर्व सरपंच दयाराम सहारण ने बताया कि जब भी नहर में पानी आता है तो नहर टूट जाती है। इनका कहना है कि नहर को नया बनाया बनाया गया है जिसमें लगता है कि उचित सामग्री नहीं लगाई जाती। उन्होंने बताया कि नहर टूटने से उनकी फसल तो बर्बाद हो ही गई, आगे गांवों में पानी नहीं गया। जिससे अगले गांवों में जिन किसानों की पानी की बारी थी उनकी फसल सूखी रह गई। किसानों ने नहर टूटने की सूचना सिंचाई विभाग को दी। सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने नहर की दरार को पाटने का काम शुरू कर दिया है। सिंचाई विभाग के जेई अनिल हंस ने बताया कि गिगोरानी माइनर टूटने की उन्हें सूचना मिली। उन्होंने उसी वक्त पीछे से नहर में पानी बंद करवा कर दरार को पाटने का काम शुरू कर दिया। जल्दी नहर की दरार को पाटकर नहर में पानी शुरू कर दिया जाएगा ।
डेढ़ वर्ष में पांचवीं बार टूटी नहर
यह नहर लगातार पांचवीं बार टूटी है जबकि नहर की रीमॉडलिंग किए हुए करीब डेढ़ वर्ष हुआ है। बार-बार नहर टूटने के मामले की किसानों ने जांच की मांग की है। इससे पहले पहली बार जब 19 जुलाई को जब नहर में पानी आया था तब पानी आते ही नहर टूट गई। इसके बाद लगातार चार बार टूट गई। बार-बार रीमॉडलिंग की गई नहर टूटने से अंदेशा जताया जाता है कि रीमॉडलिंग के समय सही सामग्री का प्रयोग नहीं किया गया। नहर टूटने से जहां किसानों की फसल बर्बाद हुई है वही गिगोरानी जसानियां आदि गांव में फसल सिंचाई के अभाव में सूखी रह गई है।
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किसान रोहताश, सुरेंद्र सिंह, राकेश कुमार, कृष्ण कुमार, मदनलाल, मुकेश, रामनिवास, ओम प्रकाश ने बताया कि कि अभी बिजाई की वही सरसों की फसल में पानी भरने से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। उन्होंने बताया कि नहर को करीब 18 महीने पहले ही रीमॉडलिंग करके नया बनाया गया था और मात्र डेढ़ साल में ही नहर टूट गई। शक्कर मंदोरी के पूर्व सरपंच दयाराम सहारण ने बताया कि जब भी नहर में पानी आता है तो नहर टूट जाती है। इनका कहना है कि नहर को नया बनाया बनाया गया है जिसमें लगता है कि उचित सामग्री नहीं लगाई जाती। उन्होंने बताया कि नहर टूटने से उनकी फसल तो बर्बाद हो ही गई, आगे गांवों में पानी नहीं गया। जिससे अगले गांवों में जिन किसानों की पानी की बारी थी उनकी फसल सूखी रह गई। किसानों ने नहर टूटने की सूचना सिंचाई विभाग को दी। सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने नहर की दरार को पाटने का काम शुरू कर दिया है। सिंचाई विभाग के जेई अनिल हंस ने बताया कि गिगोरानी माइनर टूटने की उन्हें सूचना मिली। उन्होंने उसी वक्त पीछे से नहर में पानी बंद करवा कर दरार को पाटने का काम शुरू कर दिया। जल्दी नहर की दरार को पाटकर नहर में पानी शुरू कर दिया जाएगा ।
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डेढ़ वर्ष में पांचवीं बार टूटी नहर
यह नहर लगातार पांचवीं बार टूटी है जबकि नहर की रीमॉडलिंग किए हुए करीब डेढ़ वर्ष हुआ है। बार-बार नहर टूटने के मामले की किसानों ने जांच की मांग की है। इससे पहले पहली बार जब 19 जुलाई को जब नहर में पानी आया था तब पानी आते ही नहर टूट गई। इसके बाद लगातार चार बार टूट गई। बार-बार रीमॉडलिंग की गई नहर टूटने से अंदेशा जताया जाता है कि रीमॉडलिंग के समय सही सामग्री का प्रयोग नहीं किया गया। नहर टूटने से जहां किसानों की फसल बर्बाद हुई है वही गिगोरानी जसानियां आदि गांव में फसल सिंचाई के अभाव में सूखी रह गई है।
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