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गांव के तीन नाम जोड़कियां, जोड़ियां और जोड़ावाली लेकिन विकास शून्य

Sun, 03 Nov 2019 10:42 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 03 Nov 2019 10:42 PM IST
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3 names of the village jodkiyan jodiya and jodawali but development zero
3 names of the village jodkiyan jodiya and jodawali but development zero - फोटो : Sirsa
राजस्थान की सीमा से सटे हरियाणा के पैंतालिसा क्षेत्र का गांव जोड़कियां, जोड़ियां जोड़ावाली अपने आप में करीब 200 वर्ष पुराना इतिहास समेटे हुए है। करीब 2000 की आबादी वाले इस छोटे से गांव का रकबा 2500 बीघा है। गांव में पेयजल, खेल सुविधा, शिक्षा, बिजली के लटकते तार, बस सेवा, स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली आपूर्ति, जैसी आवश्यक सेवाएं बेहद लचर हैं। इन समस्याओं के साथ ही 200 वर्ष बाद भी गांव के लोगों को गांव के नाम को लेकर काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव को सरकारी रिकार्ड व बोलते नाम के आधार पर तीन नामों से पुकारा जाता है जोड़कियां, जोड़ियां व जोड़ावाली। गांव के नाम के कारण डाक सुविधा में भी हमेशा गड़बड़ होती रहती है। बीमार होने पर 30 किलोमीटर दूर सिरसा जाना पड़ता है।
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गांव का इतिहास और सामाजिक ताना बाना
सिरसा जिला मुख्यालय से मात्र 30 किलोमीटर दूर चोपटा खंड का छोटा सा विकास से कोसों दूर गांव जोड़कियां के ग्रामीणों ने बताया कि इस गांव का रकबा पहले निकट के गांव रूपावास का हिस्सा था। रूपावास से यहां पर खेती करने के लिए आना पड़ता था। यहां पर पीने के पानी की जोहड़ियां बनी हुई थीं, तो इस जगह को जोहड़ी वाली जगह के नाम से पुकारा जाता था, रूपावास से हुड्डा, चुरनियां व ढाका गोत्र के लोग जिनकी जमीन यहां थी उन्होंने यहीं बसने का मन बना लिया व गांव को जोड़ावाली के नाम से पुकारा जाने लगा। बाद में धीरे धीरे जोड़कियां व सरकारी रिकार्ड में जोड़ियां नाम पुकारा जाने लगा। वर्तमान में गांव का पढ़ा लिखा युवा सरपंच देवतराम गांव में विकास कार्य करवाने में जुटा है। गांव से रिटायर्ड कर्नल मेहर चंद ने देश की सीमाओं की रक्षा की है। गांव में अति प्राचीन हनुमान मंदिर, रामदेव जी का रामदेवरा, जाहरवीर गोगाजी की गोगामेड़ी, माताजी का मंदिर बना हुआ है। जिनमें सभी गांव के लोग पूरी आस्था से पूजा अर्चना करते हैं।
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गांव शिक्षा और सरकारी सेवा में भी है पिछड़ा
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में एक मात्र मिडिल सरकारी स्कूल है। उसमें भी अक्सर अध्यापकों की कमी रहती है। आठवीं के बाद पढ़ाई के लिए दूसरे गांव रूपावास या रामपुरा ढिल्लों गावों के स्कूलों में जाना पड़ता है, कॉलेज स्तर की पढ़ाई के लिए तो गांव से 30 किलोमीटर दूर सिरसा जाना पड़ता है। बस सुविधा का अभाव होने के कारण अधिकतर मां-बाप अपनी लड़कियों की पढ़ाई छुड़वा लेते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए के लिए दूर दूर शहरों में जाना पड़ता है। साधन संपन्न लोग तो अपने बच्चों को पढ़ा लेते हैं लेकिन गरीब मां बाप बच्चों को उच्च शिक्षा नहीं दिलवा पाते। ग्रामीण स्कूल का दर्जा बढ़ानें के लिए प्रयासरत हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के तीन नामों के कारण आवश्यक डाक व अन्य सामग्री दूसरे गांवों में पहुंच जाती है जिससे उन्हें सूचनाएं सही समय पर नहीं मिल पाती। गांव में न तो स्वास्थ्य केंद्र है, न ही डाकखाना है। पशु अस्पताल में पशु चिकित्सा ठीक ठाक है। गांव में कुछ गलियां अभी भी कच्ची हैं व पानी निकासी का उचित प्रबंध नही है। बस सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण यह मांग गांव में आने वाले नेता व अधिकारियों के सामने कई बार रख चुके हैं। लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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