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मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर किसानों ने करवाया मुंडन

Tue, 04 Jul 2017 12:23 AM IST
Updated Tue, 04 Jul 2017 12:23 AM IST
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मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर किसानों ने करवाया मुंडन
मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर किसानों ने करवाया मुंडन
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रोष जताते हुए महिलाआें ने गाए शोक गीत, मुख्यमंत्री को चूड़ियां भेजने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति का सोमवार को 22वें दिन में भी लघु सचिवालय में जारी रहा। सोमवार सुबह कई गांवों से सैकड़ों किसान और महिलाएं धरना स्थल पर पहुंची। इस दौरान किसानों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल का पुतला फूंका। इसके बाद किसानों ने अपना सिर का मुंडन करवाया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने शोक गीत गाकर रोष का इजहार किया।
अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति के अध्यक्ष विकल पचार ने कहा कि आज मुंडन किसानों का नहीं बल्कि हरियाणा और केंद्र सरकार का हुआ है। अगर सरकार की किसान विरोधी नीति जारी रही तो बीजेपी कभी दोबारा सत्ता का सुख नहीं भोगेगी। किसान नेता प्रकाश ममेरा ने कहा कि भीषण गर्मी में किसान लगातार 22 दिन धरने पर बैठे हैं और बीमार हो रहे हैं, लेकिन सरकार आंखें मूंदे बैठी हैं। उन्होंने कहा कि अब किसान जाग चुका है और अपना हक लेकर रहेगा। पहले पहले सुबह गांव मिठनपुरा, मीठी सुरेरा, ढाणी शेरावाली और रूपावास के किसान ट्रैक्टर ट्रालियों में सवार होकर धरना स्थल पर पहुंचे। इस मौके पर किसान भालाराम, नेकीराम, हवा सिंह, अमर सिंह और सुरजीत सिंह ने मुंडन करवाया और अनशन पर बैठे।
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महिला किसान सीएम को भेजेंगी चूड़ियां
किसानों के आंदोलन को सरकार द्वारा नजर अंदाज करने से नाराज ग्रामीण महिलाएं मुख्यमंत्री को चूड़ियां भेजेंगी। अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति के अध्यक्ष विकल पचार का कहना है कि सरकार की अनदेखी से किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सैकड़ों की संख्या ग्रामीण महिलाएं लघु सचिवालय में पहुंचेंगी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल को चूड़ियां भेजेंगी। उन्होंने कहा कि किसान कर्ज माफी और स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करने की मांग कर रहा है। मौजूदा हालात के मद्देनजर ये किसानों का हक है। कई राज्य सरकारें किसानों की कर्ज की घोषण कर चुकी है, लेकिन हरियाणा सरकार किसान की मांगों पर तनिक भी ध्यान नहीं दे रही। अब आंदोलन तेज करने का समय आ गया है।
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सात किसान हो चुके हैं बीमार
लघु सचिवालय में जारी किसानों के धरने पर अब तक सात किसान बीमार हो चुके हैं। उन्हेें सिविल अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन की तरफ से भी धरने पर कोई अधिकारी किसानों से बातचीत करने नहीं पहुंचा। किसानों को लगता है कि सरकार उनके आंदोलन को मजाक के रूप में ले रही है। अभी तक सरकार की तरफ से गंभीरता नहीं देखने को मिलती। हर रोज पांच किसान क्रमिक अनशन कर रहे हैं। किसान यूनियन के प्रधान प्रकाश ममेरा का कहना है कि किसानों में काफी दमखम है, सरकार उन्हें आजमाने का काम न करें। नहीं तो इसकी काफी बड़ी कीमत सरकार को चुकानी पडे़गी।
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