{"_id":"5cc21d43bdec2214154ec6d2","slug":"201556225347-sirsa-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसडीओ ने वीएलडीए और शिकायतकर्ता का पक्ष सुना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसडीओ ने वीएलडीए और शिकायतकर्ता का पक्ष सुना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ओढां। गांव मिठड़ी में पशुपालन विभाग में तैनात वीएलडीए द्वारा ड्यूटी में लापरवाही बरतने की शिकायत मामले में एसडीओ ने गांव में पहुंचकर वीएलडीए व शिकायतकर्ता पक्ष की सुनी। शिकायतकर्ता गुरु तेग बहादुर युवा क्लब के सदस्यों ने कहा कि उनके गांव में पशु उप-चिकित्सालय में तैनात वीएलडीए विक्रम सिंह द्वारा ड्यूटी में लापरवाही बरती गई थी।
उन्होंने कहा कि गांव में जब गोवंश को इलाज की जरूरत थी तो उस समय वीएलडीए ड्यूटी पर नहीं मिला है। सदस्यों ने कहा कि उन्होंने वीएलडीए को कभी भी गांव में नहीं देखा। इस बात पर एसडीएम ने वीएलडीए से जवाब मांगा तो उसने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने ड्यूटी के प्रति कभी लापरवाही नहीं बरती। लेकिन टीकाकरण व पशुगणना में उसकी ड्यूटी बाहरी क्षेत्र में लगने के कारण लोगों को परेशानी आना स्वाभाविक है। इस बात पर एसडीओ ने वीएलडीए को कहा कि माना कि उसकी ड्यूटी पशुगणना व टीकाकरण में लगी थी। लेकिन फिर भी लोगों को संतुष्ट रखना व पशुओं को उपचार मुहैया करवाना भी उसका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि लोगों को किसी तरह की दिक्कत न आने पाए। वीएलडीए द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद क्लब सदस्य संतुष्ट हो गए और उन्होंने शिकायत वापिस ले ली। इस मौके पर ग्रामीणों ने एसडीओ व वेटरनेरी सर्जन के समक्ष ये समस्या उठाई कि गांव में निजी चिकित्सक पशुओं के गर्भाधान के लिए सीमन-स्ट्रा को उच्च कोटि की नस्ल का कहकर मोटे दाम वसूलते हैं। जिस पर अंकुश लगाया जाए। गौरतलब हो कि क्लब सदस्यों ने वीएलडीए पर डयूटी में लापरवाही बरतने के आरोप लगाते हुए उपायुक्त को शिकायत दी थी। जिस पर पशुपालन विभाग के उप-निदेशक डॉ. सुखविंद्र चौहान ने कालांवाली के एसडीएम अरूण बंसल को मामले की जांच सौंपी थी। इस अवसर पर वेटनरी सर्जन डॉ. धर्मवीर पोटलिया, डॉ. दीपक शर्मा मौजूद थे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि गांव में जब गोवंश को इलाज की जरूरत थी तो उस समय वीएलडीए ड्यूटी पर नहीं मिला है। सदस्यों ने कहा कि उन्होंने वीएलडीए को कभी भी गांव में नहीं देखा। इस बात पर एसडीएम ने वीएलडीए से जवाब मांगा तो उसने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने ड्यूटी के प्रति कभी लापरवाही नहीं बरती। लेकिन टीकाकरण व पशुगणना में उसकी ड्यूटी बाहरी क्षेत्र में लगने के कारण लोगों को परेशानी आना स्वाभाविक है। इस बात पर एसडीओ ने वीएलडीए को कहा कि माना कि उसकी ड्यूटी पशुगणना व टीकाकरण में लगी थी। लेकिन फिर भी लोगों को संतुष्ट रखना व पशुओं को उपचार मुहैया करवाना भी उसका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि लोगों को किसी तरह की दिक्कत न आने पाए। वीएलडीए द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद क्लब सदस्य संतुष्ट हो गए और उन्होंने शिकायत वापिस ले ली। इस मौके पर ग्रामीणों ने एसडीओ व वेटरनेरी सर्जन के समक्ष ये समस्या उठाई कि गांव में निजी चिकित्सक पशुओं के गर्भाधान के लिए सीमन-स्ट्रा को उच्च कोटि की नस्ल का कहकर मोटे दाम वसूलते हैं। जिस पर अंकुश लगाया जाए। गौरतलब हो कि क्लब सदस्यों ने वीएलडीए पर डयूटी में लापरवाही बरतने के आरोप लगाते हुए उपायुक्त को शिकायत दी थी। जिस पर पशुपालन विभाग के उप-निदेशक डॉ. सुखविंद्र चौहान ने कालांवाली के एसडीएम अरूण बंसल को मामले की जांच सौंपी थी। इस अवसर पर वेटनरी सर्जन डॉ. धर्मवीर पोटलिया, डॉ. दीपक शर्मा मौजूद थे।
विज्ञापन