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जिले में हुई दो एमएम बारिश से फिर लौटी सर्दी
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2 mm rain in sirsa
- फोटो : Sirsa
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जिले में सोमवार की अलसुबह बारिश शुरू हो गई थी। खुईया मलकाना और अबूबशहर में दो एमएम बारिश रिकॉर्ड की गयी। बारिश के बाद एक बार फिर जिले के लोगों को ठंड का एहसास हुआ। वहीं सिरसा, रानियां सहित अन्य क्षेत्रों में बूंदाबांदी हुई। सोमवार की सुबह बादलों ने सूर्या को छुपा दिया और पूरा दिन बूंदाबांदी होती रही। लोगों की कार्य करने की रफ्तार धीमी हो गई, सूर्य न निकलने से बारिश के मौसम में लोगों को पाले का एहसास होने लगा। पार्क व बाजारों में चहल-पहल फीकी रही। बारिश होने से एक बार फिर धुंध के आसार हो सकते हैं। सिरसा में सोमवार को अधिकतम 15 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
बारिश की फसल गेहूं के लिए संजीवनी
राजस्थान की सीमा से सटे पैंतालिसा क्षेत्र में सोमवार को हुई हल्की बारिश से रबी की फसल को काफी फायदा हुआ है। किसानों का कहना है कि पौष की फुहार और माघ की मावठवाली कहावत सही चरितार्थ हो रही है। पौष मास में दूसरी बार बारिश हो रही है, जो कि करीब 60 हजार हेक्टेयर में खड़ी गेहूं, चने, सरसों व जौ रबी की फसल के लिए संजीवनी का काम कर रही है। इस जनवरी माह में बूंदाबांदी फसलों के लिए अच्छी होती है लेकिन ओलावृष्टि घातक हो सकती है। सर्दी में सूखा पाला घातक होता है। रबी की फसल पर पाले का खतरा मंडराने लगा था पौष मास में हो रही हल्की बारिश से पाले का खतरा टल गया है। चोपटा खंड में इस बार किसानों ने 40800 हेक्टेयर में गेहूं, 15500 हेक्टेयर में सरसों, 2250 हेक्टेयर में चना व 650 हेक्टेयर में जौ व अन्य फसलों की बिजाई की है। इस फसल पर मंडरा रहा पाले का खतरा टल गया है।
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बारिश की फसल गेहूं के लिए संजीवनी
राजस्थान की सीमा से सटे पैंतालिसा क्षेत्र में सोमवार को हुई हल्की बारिश से रबी की फसल को काफी फायदा हुआ है। किसानों का कहना है कि पौष की फुहार और माघ की मावठवाली कहावत सही चरितार्थ हो रही है। पौष मास में दूसरी बार बारिश हो रही है, जो कि करीब 60 हजार हेक्टेयर में खड़ी गेहूं, चने, सरसों व जौ रबी की फसल के लिए संजीवनी का काम कर रही है। इस जनवरी माह में बूंदाबांदी फसलों के लिए अच्छी होती है लेकिन ओलावृष्टि घातक हो सकती है। सर्दी में सूखा पाला घातक होता है। रबी की फसल पर पाले का खतरा मंडराने लगा था पौष मास में हो रही हल्की बारिश से पाले का खतरा टल गया है। चोपटा खंड में इस बार किसानों ने 40800 हेक्टेयर में गेहूं, 15500 हेक्टेयर में सरसों, 2250 हेक्टेयर में चना व 650 हेक्टेयर में जौ व अन्य फसलों की बिजाई की है। इस फसल पर मंडरा रहा पाले का खतरा टल गया है।
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