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17 साल बाद लोको शेड में फिर बजेगी इंजन की सीटी
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Fri, 31 Oct 2014 12:37 AM IST
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17 साल बाद वीरान पड़े लोको शेड में फिर से इंजन की सिटी बजेगी। लोको शेड तक रेलवे दो गुड्स लाइन डालने जा रहा है।
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इससे वीरान पड़े लोको शेड में फिर से जान आने की उम्मीद जगी है। योजना को लेकर रेलवे का कमीशन दौरा कर चुका है और जल्द की इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।
इसके अलावा मालगोदाम वाली जगह का इस्तेमाल रेलवे प्लेटफार्म नंबर दो और तीन के लिए करेगा। इसके लिए भी रेलवे का कमीशन दौरा कर चुका है।
उम्मीद जताई जा रही है कि अगले रेलवे बजट तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और मालगोदाम लोको शेड में शिफ्ट हो जाएगा।
अंग्रेजों के जमाने में सिरसा के रेलवे स्टेशन पर बनाया गया लोको शेड आज खंडहर के रूप में तबदील हो चुका है। कभी यहां पर भाप इंजन में आई खराबी को दुरुस्त किया जाता था।
अब पिछले 17 बरस से लोको शेड वीरान पड़ा है। इस शेड के दरवाजे व खिड़कियां तक लोग उखाड़ ले गए। अगल-बगल में नागफनी व झाड़-झंकाड़ उग आए हैं।
दरवाजे तक उखाड़ कर ले गए लोग
वर्ष 1993 से पहले इस्टीम वाले इंजन यहां पटरियों पर दौड़ते थे। सिरसा में 1884 में रेलवे लाइन बिछाई गई। रेलवे लाइन बिछाने के बाद ही लोको शेड का निर्माण हुआ।
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यहां पर इस्टीम इंजनों में आई खराबी को दुरुस्त करने की वर्कशॉप भी थी। 93 के बाद इस्टीम इंजनों के स्थान पर डीजल वाले इंजन आ गए।
ऐसे में दूसरे स्टेशनों की तरह सिरसा का लोको शेड भी वीरान हो गया और यहां बनी वर्कशॉप बंद हो गई। बीते 17 बरस में लोको शेड की कोई सुध नहीं ली गई।
इस अनदेखी का फायदा उठाकर लोग यहां लगे बेशकीमती लकड़ियों की दरवाजे तक उखाड़ कर ले गए। आज यह भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है। हालनुमा कमरे में प्रवेश करते ही मकड़ियों के जाले व धूल कपड़ों पर आ पड़ती है।
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जर्जर हो चुकी है इमारत
रेलवे कॉलोनी में रहने वाले जयपाल, शशि बताते हैं कि कभी लोको शेड में चहल-पहल होती थी। इंजन ठीक होते थे। अब वीरान पड़ा लोको अपनी हालत पर आंसू बहा रहा है।
इसकी इमारत जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है। यहां की कई दीवारें टूट चुकी हैं या फिर लोगों द्वारा तोड़ी जा चुकी हैं। इतने बड़े स्थान पर रेलवे प्रशासन की नजर तक नहीं गई, जबकि इसे माल गोदाम के रूप में बदला जाना चाहिए था।
लाहौर-रेवाड़ी के बीच का महत्वपूर्ण स्टेशन था सिरसा
दरअसल सिरसा रेलवे स्टेशन को अंग्रेजी हुकूमत काल में विभाग द्वारा डिवीजन बनाया गया था। उस समय फाजिल्का से मुंबई की सबसे बड़ी रेलवे लाइन सिरसा से होकर गुजरती थी।
यहां से रेवाड़ी के बीच में यह एक मुख्य लोेको के रूप में विख्यात था। लोको के अंदर एक बड़ी वर्कशॉप थी, जिसके अंदर रेलवे इंजन से संबंधित खराबी को ठीक किया जाता था।
लोको में वाश़िग लाइन का विशेष प्रबंध किया गया था। लोको के साथ ही एक घुमचक्कर भी बनाया गया था, जिस पर कुछ कर्मचारियों की मदद से इंजन को घुमाकर उसकी विपरीत दिशा में बदल दिया जाता था। यह स्टेशन लाहौर व रेवाड़ी के बीच का सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन माना जाता था।
मालगोदाम लोको शेड में शिफ्ट हो जाएगा
लोको शेड तक गुड्स की दो लाइनें डाली जाएंगी। इसके लिए कमीशन दौरा कर चुका है। इसके अलावा मालगोदाम वाली जगह पर सिरसा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो और तीन बनाए जाएंगे।
इसके लिए भी रेलवे का कमीशन दौरा कर चुका है। उम्मीद है कि अगले रेलवे बजट तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और मालगोदाम लोको शेड में शिफ्ट हो जाएगा।
मंजू गुप्ता, डीआरएम, बीकानेर डिविजन, उत्तर-पश्चिम रेलवे