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सुविधाओं के नाम पर सिविल अस्पताल में मरीजों की जान से हो रहा है खिलवाड़
Updated Thu, 14 Dec 2017 12:58 AM IST
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सिरसा।
जिला के सरकारी अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा दम तोड़ता जा रहा है। सुविधाओं से उलट वहां मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। आलम ये है कि सिविल अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं मिलना तो दूर यहां मरीजों को टीका लगाने वाला ही कोई नहीं।
बुधवार को सिविल अस्पताल में टीकाकरण के लिए आए सैकड़ाें मरीजों को मासूस होकर लौटना पड़ा। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों मरीज सिविल अस्पताल में उपचार के लिए आए, डॉक्टरों ने संबंधित बीमारी के लिए इंजेक्शन लिख दिया, लेकिन जब मरीज टीका कक्ष में पहुंचे तो वहां टीका लगाने वाला कोई मौजूद नहीं था। प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से ट्रेनिंग पर आई छात्राएं ही टीका कक्ष में मौजूद थीं। मजबूरन मरीजों को सिविल अस्पताल से प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ा। अमर उजाला की टीम इस दौरान लाइव कवरेज करती रही। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुभाषिणी ने संज्ञान लेेते हुए अमर उजाला की टीम के साथ उन कर्मचारियों और फार्मासिस्ट को तलाश करने निकल पड़ी जिनकी ड्यूटी यहां जरूरी है। चिकित्सा अधीक्षक ने ड्यूटी में लापरवाही कर्मचारियों को लताड़ लगाई और चार कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काट लिया। भविष्य के लिए चेतावनी दी कि अगर ड्यूटी पर लापरवाही बरती तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक करीब 56 मरीज बिना इंजेक्शन लौट गए।
सिविल अस्पताल, लाइव रिपोर्ट...
दर्द से कराहता रहा मरीज
सुबह साढे़ दस बजे सिविल अस्पताल के पांच नंबर टीका कक्ष में कुर्सी खाली पड़ी मिली। कोई कर्मचारी और फार्मासिस्ट ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। इतने में एक युवक दर्द से कराहता हुआ कक्ष में आया। कक्ष में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से ट्रेनिंग पर आई छात्रा काजल शर्मा और रमन मौजूद थीं। युवक ने उन्हें अपना नाम रामदास बताया, उसके पैर से खून निकल रहा था। उसने बताया कि उसे कुत्ते ने काटा है। छात्रा काजल और रमन उसकी हालत को देखकर घबरा गई, रामदास को जल्द इंजेक्शन लगाने की जरूरत थी, लेकिन फार्मासिस्ट मीना छुट्टी पर गई हुई थीं और दूसरा कोई कर्मी ड्यूटी पर नहीं आया था। काजल और रमन इंजेक्शन लगाना जानती थी, जब वो दवाई लेने के लिए इमरजेंसी में गई तो उन्हेें दवाई देने से साफ इंकार कर दिया गया। मजबूरन परिवार वालों को दर्द से कराहते रामदास को प्राइवेट अस्पताल में ले जाना पड़ा।
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दो बार आ चुकी हूं कोई नहीं मिला
गांव कंगनपुर की चंदो बाई पिछले तीन दिनाें से केवल इंजेक्शन लगाने से लिए लगातार सिविल अस्पताल के चक्कर लगा रही हैं। बुधवार सुबह 11 बजे चंदो बाई एक बार फिर से इंजेक्शन लगाने से लिए अस्पताल पहुंची, लेकिन पिछली बार की तरफ टीका कक्ष में कोई भी फार्मासिस्ट मौजूद नहीं मिला। चंदो बाई ने बताया कि उसे कुत्ते ने काट लिया था, सिविल अस्पताल में 100 रुपये में इंजेक्शन लगता है। आर्थिक हालत ठीक नहीं, इसलिए प्राइवेट अस्पताल में नहीं जा सकती और सरकारी अस्पताल में टीका लगाने वाला नहीं मिलाता। कोई भी सुध लेने वाला नहीं यहां।
अब तो प्राइवेट अस्पताल में जाना पडे़गा
गांव नेजिया निवासी हरीराम अपने बीमार पुत्र रमेश को सविल अस्पताल में लेकर आया। डॉक्टर ने दवाई के साथ पर्ची में इंजेक्शन लिख दिया, ताकि जल्दी से बुखार का असर कम हो जाए। हरीराम पुत्र को लेकर टीका कक्ष में आया तो वहां खाली पड़ी कुर्सी के अलावा कोई नहीं मिला। पट्टी कक्ष में मौजूद कर्मचारी से पूछा तो जवाब मिला मैडम छुट्टी पर गई हैं, बाद में आना। हरीराम ने जवाब दिया कि इतने बडे़ अस्पताल में टीका लगाने वाला ही कोई नहीं तो यहां आने का क्या लाभ। अब इंजेक्शन लगवाने के लिए जाना पडे़गा प्राइवेट अस्पताल में।
जेब में दस रुपये हैं कहां जाऊं
30 किलोमीटर दूर से जाड़ में दर्द का उपचार करवाने के लिए गांव रंगा निवासी करणजीत सिविल अस्पताल में आया। डॉक्टर से जांच करवाई तो उसने एक इंजेक्शन लगवाने के लिए टीमा कक्ष में भेज दिया। जाड़ के दर्द से बेहाल करणजीत टीका कक्ष में पहुंचा तो वहां उसे कोई नहीं मिला। दवाई कक्ष में जाकर उसने पूछा तो उसे दो टके का जवाब मिला कि टीका तो आज नहीं लग सकता, क्योंकि फार्मासिस्ट मीना की जगह किसी की ड्यूटी नहीं लगी है। कल आना शायद कोई ड्यूटी पर आ जाए। दर्द से कहरा रहे करणजीत ने जवाब दिया कि सर जेब में दस रुपये हैं प्राइवेट अस्पताल जा नहीं सकता। कोई ऐसी गोली ही दे दो जिससे दर्द कम हो जाए।
किसी ने नहीं दी वैक्सीन
मेडिकल कॉलेज में फार्मासिस्ट की पढ़ाई करने वाली छात्रा काजल शर्मा और रमन को इंजेक्शन लगाने की ट्रेनिंग मिल चुकी है। दोनाें छात्राएं टीका कक्ष में अपनी ड्यूटी पर मौजूद रही, लेकिन सरकारी फार्मासिस्ट की गैर मौजूदगी में उनसे मरीजों की हालत देखी नहीं गई। काजल और रमन दो बार सिविल सर्जन ऑफिस में जाकर इंजेक्शन के लिए जरूरी वैक्सीन लेने गई, ताकि वो टीकाकरण कर सकें, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उन्हें वैक्सीन देने से ही मना कर दिया। दोनों छात्राएं मायूस होकर अपनी ड्यूटी करके वापस कॉलेज चली गईं।
एमएस ने शुरू की खोजबीन
दोपहर एक बजे अमर उजाला की टीम ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुभाषिणी के पास जाकर टीका कक्ष में फार्मासिस्ट की गैर मौजूदगी बताई तो वो हैरान हो गई। चिकित्सा अधीक्षक ने तुरंत हरकत में आकर अस्पताल का निरीक्षण शुरू कर दिया। टीका कक्ष में जाकर देखा तो कोई कर्मी मौजूद नहीं मिला। उन्होंने बताया कि यह घोर लापरवाही है, फार्मासिस्ट मीना छुट्टी पर होने के कारण दूसरी फार्मासिस्ट अनीता मोंगा सहित चार अनुबंध कर्मचारियों की की ड्यूटी लगाई गई थी। एमएस ने फार्मासिस्ट और कर्मचारियों की खोजबीन शुरू कर दी।
ड्यूटी टाइम समोसे खाते मिले कर्मचारी
खोजबीन करते हुए चिकित्सा अधीक्षक 22 नंबर कमरे में पहुंची। वहां पर नजारा देखने वाला मिला। सभी फार्मासिस्ट और कर्मचारी ड्यूटी टाइम पर मरीजों का उपचार करने की बजाय समोसे खाने में व्यस्त मिले। चिकित्सा अधीक्षक यह दृश्य देख गुस्से में आ गईं। उन्होंने कहा कि ये क्या हो रहा है, टीका कक्ष में ड्यूटी पर क्यों कोई नहीं गया, मीडिया वाले सुबह से टीकाकक्ष की रिपोर्ट ले रहे हैं और तुम यहां आवारागर्दी करते हो। मरीज बिना टीका के वापस लौट रहे हैं, ऐसा नहीं चलेगा। एक दिन की सैलरी नहीं मिलेगी तुम लोगाें को। छह घंटे की ड्यूटी लेती है सरकार तुमसे, वो तो ठीक से कर लिया करो। अब ऐसी लापरवाही की तो विभागीय कार्रवाई करूंगी।
लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त
अस्पताल में फार्मासिस्ट की कमी तो है, लेकिन जब भी कोई छुट्टी पर होता है उसकी जगह दूसरे की ड्यूटी लगाई जाती है। बुधवार को भी फार्मासिस्ट के अलावा चार अनुबंध एनएचएम कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन किसी का टीका कक्ष में न होना घोर लापरवाही है, मरीजों को बिना टीकाकरण के वापस लौटना पड़ा इसका खेद है, भविष्य में इस प्रकार की कोई लापरवाही हुई तो संबंधित कर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अमर उजाला की टीम ने अच्छा किया जो सच्चाई सामने लेकर आए। आज की लापरवाही के जिम्मेदार कर्मियों का एक दिन का वेतन काटा जाएगा।
-डॉ. सुभाषिणी चिकित्सा अधीक्षक, सिरसा।
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जिला के सरकारी अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा दम तोड़ता जा रहा है। सुविधाओं से उलट वहां मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। आलम ये है कि सिविल अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं मिलना तो दूर यहां मरीजों को टीका लगाने वाला ही कोई नहीं।
बुधवार को सिविल अस्पताल में टीकाकरण के लिए आए सैकड़ाें मरीजों को मासूस होकर लौटना पड़ा। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों मरीज सिविल अस्पताल में उपचार के लिए आए, डॉक्टरों ने संबंधित बीमारी के लिए इंजेक्शन लिख दिया, लेकिन जब मरीज टीका कक्ष में पहुंचे तो वहां टीका लगाने वाला कोई मौजूद नहीं था। प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से ट्रेनिंग पर आई छात्राएं ही टीका कक्ष में मौजूद थीं। मजबूरन मरीजों को सिविल अस्पताल से प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ा। अमर उजाला की टीम इस दौरान लाइव कवरेज करती रही। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुभाषिणी ने संज्ञान लेेते हुए अमर उजाला की टीम के साथ उन कर्मचारियों और फार्मासिस्ट को तलाश करने निकल पड़ी जिनकी ड्यूटी यहां जरूरी है। चिकित्सा अधीक्षक ने ड्यूटी में लापरवाही कर्मचारियों को लताड़ लगाई और चार कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काट लिया। भविष्य के लिए चेतावनी दी कि अगर ड्यूटी पर लापरवाही बरती तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक करीब 56 मरीज बिना इंजेक्शन लौट गए।
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दर्द से कराहता रहा मरीज
सुबह साढे़ दस बजे सिविल अस्पताल के पांच नंबर टीका कक्ष में कुर्सी खाली पड़ी मिली। कोई कर्मचारी और फार्मासिस्ट ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। इतने में एक युवक दर्द से कराहता हुआ कक्ष में आया। कक्ष में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से ट्रेनिंग पर आई छात्रा काजल शर्मा और रमन मौजूद थीं। युवक ने उन्हें अपना नाम रामदास बताया, उसके पैर से खून निकल रहा था। उसने बताया कि उसे कुत्ते ने काटा है। छात्रा काजल और रमन उसकी हालत को देखकर घबरा गई, रामदास को जल्द इंजेक्शन लगाने की जरूरत थी, लेकिन फार्मासिस्ट मीना छुट्टी पर गई हुई थीं और दूसरा कोई कर्मी ड्यूटी पर नहीं आया था। काजल और रमन इंजेक्शन लगाना जानती थी, जब वो दवाई लेने के लिए इमरजेंसी में गई तो उन्हेें दवाई देने से साफ इंकार कर दिया गया। मजबूरन परिवार वालों को दर्द से कराहते रामदास को प्राइवेट अस्पताल में ले जाना पड़ा।
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गांव कंगनपुर की चंदो बाई पिछले तीन दिनाें से केवल इंजेक्शन लगाने से लिए लगातार सिविल अस्पताल के चक्कर लगा रही हैं। बुधवार सुबह 11 बजे चंदो बाई एक बार फिर से इंजेक्शन लगाने से लिए अस्पताल पहुंची, लेकिन पिछली बार की तरफ टीका कक्ष में कोई भी फार्मासिस्ट मौजूद नहीं मिला। चंदो बाई ने बताया कि उसे कुत्ते ने काट लिया था, सिविल अस्पताल में 100 रुपये में इंजेक्शन लगता है। आर्थिक हालत ठीक नहीं, इसलिए प्राइवेट अस्पताल में नहीं जा सकती और सरकारी अस्पताल में टीका लगाने वाला नहीं मिलाता। कोई भी सुध लेने वाला नहीं यहां।
अब तो प्राइवेट अस्पताल में जाना पडे़गा
गांव नेजिया निवासी हरीराम अपने बीमार पुत्र रमेश को सविल अस्पताल में लेकर आया। डॉक्टर ने दवाई के साथ पर्ची में इंजेक्शन लिख दिया, ताकि जल्दी से बुखार का असर कम हो जाए। हरीराम पुत्र को लेकर टीका कक्ष में आया तो वहां खाली पड़ी कुर्सी के अलावा कोई नहीं मिला। पट्टी कक्ष में मौजूद कर्मचारी से पूछा तो जवाब मिला मैडम छुट्टी पर गई हैं, बाद में आना। हरीराम ने जवाब दिया कि इतने बडे़ अस्पताल में टीका लगाने वाला ही कोई नहीं तो यहां आने का क्या लाभ। अब इंजेक्शन लगवाने के लिए जाना पडे़गा प्राइवेट अस्पताल में।
जेब में दस रुपये हैं कहां जाऊं
30 किलोमीटर दूर से जाड़ में दर्द का उपचार करवाने के लिए गांव रंगा निवासी करणजीत सिविल अस्पताल में आया। डॉक्टर से जांच करवाई तो उसने एक इंजेक्शन लगवाने के लिए टीमा कक्ष में भेज दिया। जाड़ के दर्द से बेहाल करणजीत टीका कक्ष में पहुंचा तो वहां उसे कोई नहीं मिला। दवाई कक्ष में जाकर उसने पूछा तो उसे दो टके का जवाब मिला कि टीका तो आज नहीं लग सकता, क्योंकि फार्मासिस्ट मीना की जगह किसी की ड्यूटी नहीं लगी है। कल आना शायद कोई ड्यूटी पर आ जाए। दर्द से कहरा रहे करणजीत ने जवाब दिया कि सर जेब में दस रुपये हैं प्राइवेट अस्पताल जा नहीं सकता। कोई ऐसी गोली ही दे दो जिससे दर्द कम हो जाए।
किसी ने नहीं दी वैक्सीन
मेडिकल कॉलेज में फार्मासिस्ट की पढ़ाई करने वाली छात्रा काजल शर्मा और रमन को इंजेक्शन लगाने की ट्रेनिंग मिल चुकी है। दोनाें छात्राएं टीका कक्ष में अपनी ड्यूटी पर मौजूद रही, लेकिन सरकारी फार्मासिस्ट की गैर मौजूदगी में उनसे मरीजों की हालत देखी नहीं गई। काजल और रमन दो बार सिविल सर्जन ऑफिस में जाकर इंजेक्शन के लिए जरूरी वैक्सीन लेने गई, ताकि वो टीकाकरण कर सकें, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उन्हें वैक्सीन देने से ही मना कर दिया। दोनों छात्राएं मायूस होकर अपनी ड्यूटी करके वापस कॉलेज चली गईं।
एमएस ने शुरू की खोजबीन
दोपहर एक बजे अमर उजाला की टीम ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुभाषिणी के पास जाकर टीका कक्ष में फार्मासिस्ट की गैर मौजूदगी बताई तो वो हैरान हो गई। चिकित्सा अधीक्षक ने तुरंत हरकत में आकर अस्पताल का निरीक्षण शुरू कर दिया। टीका कक्ष में जाकर देखा तो कोई कर्मी मौजूद नहीं मिला। उन्होंने बताया कि यह घोर लापरवाही है, फार्मासिस्ट मीना छुट्टी पर होने के कारण दूसरी फार्मासिस्ट अनीता मोंगा सहित चार अनुबंध कर्मचारियों की की ड्यूटी लगाई गई थी। एमएस ने फार्मासिस्ट और कर्मचारियों की खोजबीन शुरू कर दी।
ड्यूटी टाइम समोसे खाते मिले कर्मचारी
खोजबीन करते हुए चिकित्सा अधीक्षक 22 नंबर कमरे में पहुंची। वहां पर नजारा देखने वाला मिला। सभी फार्मासिस्ट और कर्मचारी ड्यूटी टाइम पर मरीजों का उपचार करने की बजाय समोसे खाने में व्यस्त मिले। चिकित्सा अधीक्षक यह दृश्य देख गुस्से में आ गईं। उन्होंने कहा कि ये क्या हो रहा है, टीका कक्ष में ड्यूटी पर क्यों कोई नहीं गया, मीडिया वाले सुबह से टीकाकक्ष की रिपोर्ट ले रहे हैं और तुम यहां आवारागर्दी करते हो। मरीज बिना टीका के वापस लौट रहे हैं, ऐसा नहीं चलेगा। एक दिन की सैलरी नहीं मिलेगी तुम लोगाें को। छह घंटे की ड्यूटी लेती है सरकार तुमसे, वो तो ठीक से कर लिया करो। अब ऐसी लापरवाही की तो विभागीय कार्रवाई करूंगी।
लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त
अस्पताल में फार्मासिस्ट की कमी तो है, लेकिन जब भी कोई छुट्टी पर होता है उसकी जगह दूसरे की ड्यूटी लगाई जाती है। बुधवार को भी फार्मासिस्ट के अलावा चार अनुबंध एनएचएम कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन किसी का टीका कक्ष में न होना घोर लापरवाही है, मरीजों को बिना टीकाकरण के वापस लौटना पड़ा इसका खेद है, भविष्य में इस प्रकार की कोई लापरवाही हुई तो संबंधित कर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अमर उजाला की टीम ने अच्छा किया जो सच्चाई सामने लेकर आए। आज की लापरवाही के जिम्मेदार कर्मियों का एक दिन का वेतन काटा जाएगा।
-डॉ. सुभाषिणी चिकित्सा अधीक्षक, सिरसा।