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अंगूठा लगाने पर मिलेगा सस्ती दर का राशन

Updated Sun, 04 Jun 2017 12:11 AM IST
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अंगूठा लगाने पर मिलेगा सस्ता राशन
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राशन वितरण का डाटा हुआ ऑनलाइन, पीओएस मशीनों को किया अपडेट
सिरसा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा अपने साफ्टवेयर को अपडेट किया गया है। अब उपभोक्ताओं को अंगूठा लगाने पर ही सस्ती दर का राशन हासिल हो पाएगा। विभाग का डाटा ऑनलाइन होने से उन्हीं उपभोक्ताओं को राशन जारी होगा, जिनके आधार नंबर लिंक हो चुके है। आधार लिंक से वंचित उपभोक्ता सस्ती दर का राशन हासिल नहीं कर पाएंगे। विभाग द्वारा वंचित उपभोक्ताओं के लिए आधार लिंक कराने के लिए 20 जून तक का समय दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि सिरसा जिला में राशन वितरण का कार्य कुछ माह पूर्व ऑनलाइन किया गया था। लेकिन तकनीकी खामी की वजह से यह कामयाब नहीं हो पाया। जिसके बाद विभाग की ओर से मैंयूली राशन वितरण की अनुमति दी गई थी। विभाग द्वारा अपने साफ्टवेयर को अपडेट किया गया है और खामियों को दूर किया गया है। अब एक जून से उपभोक्ताओं को अंगूठा लगाने पर ही राशन दिया जाएगा। लाभान्वित परिवार के हर सदस्य के आधार नंबर लिंक हाेंगे। आधार लिंक होने पर ही अंगूठा लगाकर राशन प्राप्त किया जा सकेगा। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक प्रमोद कुमार ने बताया कि काफी दिनों से डाटा ऑनलाइन करने की प्रक्रिया चल रही थी जो अब लगभग पूरी होने को है। उन्होंने बताया कि जुलाई माह से राशन केवल पीओएस मशीनों के तहत ही दिया जाएगा।


कमीशन को तरसते डिपो होल्डर
सरकार की ओर से डिपो होल्डरों पर राशन वितरण की अहम जिम्मेवारी सौंपी गई है लेकिन इन डिपो होल्डरों को दिए जाने वाले कमीशन की ओर सरकार ने चुप्पी साध रखीं है। पिछले 15 महीनों से डिपो होल्डर अपने कमीशन का इंतजार कर रहे है। डिपो संचालन के लिए किराया अदा करना होता है, इसके अलावा डिपो संचालन पर अन्य खर्च भी आते है। डिपो होल्डर अपनी बचत पूंजी भी इसमें खर्च चुके है लेकिन बार-बार की मांग के बावजूद उन्हें पिछले 15 माह से कमीशन की अदायगी नहीं की जा रही। अचरज की बात यह है कि विभाग के पास तीन माह से कमीशन की राशि की अदायगी के लिए पैसा भी पहुंच चुका है लेकिन इसे जारी नहीं किया जा रहा।

समस्याएं जिनका हल खोजना होगा
सरकार की राशन वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए जो कदम उठाए गए है। उनके क्रियान्वयन में आने वाली दिक्कतों को नजरअंदाज किया गया है। उपभोक्ता के फिंगर प्रिंट में पहले भी दिक्कत आई थी और अब भी दिक्कत आनी तय है। चूंकि खेती-बाड़ी और दिहाड़ी मजदूरी करने वालों के उंगलियों के निशान मैच नहीं करते। ऐसे में राशन वितरण में दिक्कत आई थी। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या रहती है, जिसका कोई उपाय नहीं खोजा गया है। सबसे बड़ी दिक्कत राशन की मात्रा को लेकर रहेगी। खाद्य एवं आपूूर्ति विभाग द्वारा डिपो होल्डरों को प्रति उपभोक्ता चार किलो 300 ग्राम गेहूं जारी की जाती है, जबकि मशीन के अनुसार उपभोक्ता को पांच किलो दर्शायी जाएगी। ऐसे में उपभोक्ता डिपू होल्डर से झगडे़गा।

गेहूं ही बचा
सरकार की ओर से सस्ती दर पर मिट्टी का तेल देना बंद कर दिया है। चीनी भी कई माह से नहीं दी जा रही। आशंका है कि सस्ती दर की दाल भी बंद की जाएगी। अब डिपू होल्डरों के जिम्मे केवल गेहूं का वितरण ही शेष रह जाएगा। जबकि राशन वितरण का कार्य कंप्यूटरीकृत करने, मशीनरी और साफ्टवेयर लगाने की प्रक्रिया पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे है।

डीबीटी है बेहतर विकल्प
सस्ती दर के राशन के लिए डीबीटीएल (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ऑफ एलपीजी) बेहतर विकल्प है। जिसमें सब्सिडी की राशि उपभोक्ता के खाते में जमा हो जाती है। उपभोक्ता को जिस प्रकार गैस सिलेंडर का बाजार भाव अदा करना होता है और सब्सिडी की राशि बैंक खाते में जमा हो जाती है, ठीक उसी प्रकार सरकार सस्ती दर पर पांच किलो गेहूं वितरण के लिए इतना बड़ा तामझाम चलाने की बजाए सब्सिडी की राशि उपभोक्ता के खाते में जमा करवा दें। ताकि उपभोक्ता अपनी मर्जी से बाजार भाव में गेहूं खरीदें सके ।

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