डेरा सच्चा सौदा प्रकरण: 18-20-59

Rohtak Bureau Updated Tue, 07 Nov 2017 12:50 AM IST
सिरसा।
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पंचकूला सीबीआई अदालत की ओर से 25 अगस्त को दोषी करार दिए जाने के बाद सिरसा में हिंसा का तांडव करने वाले हजारों उपद्रवियों पूरा ब्योरा व घटनाक्रम की सारी दास्तां चालान कॉपी के रूप में अदालत ने 31 आरोपियों को सौंपी दी है। शहर थाना पुलिस की ओर से 42 उपद्रवियों के खिलाफ अदालत में आरोप तय करने के बाद सोमवार को इन आरोपियों की सीजेएम अदालत में पेशी थी, लेकिन 42 आरोपी उपद्रवियों में से केवल 31 ही अदालत समक्ष पेश हुए। अदालत ने इन आरोपियों को चालान कॉपी सौंप दी और अदालत में पेश नहीं होने वाले 11 आरोपी उपद्रवियों के खिलाफ अदालत ने प्रोडक्शन वारंट जारी कर दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
सिरसा में हुई हिंसा मामले में पुलिस ने 900 पेजों की चालान कॉपी अदालत में सौंपी है। पेश किए गए चालान में वो चौंकाने वाली बातें निकलकर सामने आई हैं, जिनका खुलासा पुलिस ने अभी तक नहीं किया था। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला खुलासा यह है कि 25 अगस्त की दोपहर सीबीआई कोर्ट द्वारा डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद सिरसा शहर की ओर हथियारों और पेट्रोल बम लेकर बढ़ रहे हजारों डेरा प्रेमियों को रोकने के लिए पुलिस ने केवल हवा में गोलियां चलाईं थी। पुलिस की फायरिंग में एक भी शख्स की मौत हिंसा के दिन नहीं हुई। पुलिस की गोली लगने से केवल मात्र एक उपद्रवी घायल हुआ। जिन छह लोगों की मौत गोली लगने से हुई वो गोली पुलिस की बंदूक से नहीं चली। पुलिस की ओर से पेश किए गए 900 पेजों की चालान में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है कि पुलिस फायरिंग में किसी की मौत हुई है। सिरसा पुलिस की ओर से साफ-साफ अदालत को बताया गया है कि पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ने और आत्मरक्षा के लिए हवा में गोली चलाई थीं। हिंसा में मरने वाले छह लोगों को पुलिस ने उपद्रवी माना है और उनके खिलाफ पुलिस पार्टी पर हमला करने का केस दर्ज किया है।

सरकार विरोधी नारे लगाकर का शहर की ओर बढ़ रहे थे पांच हजार डेरा प्रेमी
आरोपी उपद्रवियों को अदालत की ओर सौंपी चालान कॉपी में सिरसा पुलिस ने हिंसा के संबंध में ब्योरा दिया गया है कि 25 अगस्त को धारा 144 लागू थी। कीर्तिनगर चौकी इंचार्ज एएसआई शैलेंद्र कुमार जगदंबे पेपर मील पर तैनात थे। तहसीलदार रविंद्र को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर नाके पर तैनात थे। सीबीआई कोर्ट ने डेरा मुखी को दोषी करार दिया तो शाम करीब पांच बजे हजारों डेरा प्रेमी आगजनी करते हुए नाके पर आ पहुंचे। सरकार विरोधी नारे लगाते हुए डेरा प्रेमियों ने पुलिस पार्टी पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें सिपाही रमेश कुमार व हवलदार प्रहलाद को चोट आई। भीड़ में से कुछ व्यक्तियों ने जान से मारने की नियत से पुलिस पार्टी पर फायरिंग करने लगे। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने उपद्रवियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछार की, लेकिन उपद्रवियों की भीड़ तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को मारने पर उतारू हो गई। फिर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेशानुसार मौजूद अधिकारियों ने डेरा प्रेमियों पर हवाई फायरिंग करवाई, जिसमें कुछ डेरा प्रेमियों को भी चोटे आईं।

मृतकों पर दर्ज किया केस
26 अगस्त को कीर्तिनगर चौकी प्रभारी एएसआई शैलेंद्र कुमार जांच करने के लिए घटना स्थल पर गए तो मौके से पेट्रोल बम की बोतलें बरामद हुईं। इसके बाद एसआई वजीर सिंह सिविल अस्पताल पहुंचे और डेड हाउस में रखी गई मृतक वजीर चंद निवासी पीर कॉलोनी सिरसा, काला सिंह निवासी प्रीत नगर सिरसा, विनोद कुमार निवासी रेगर बस्ती, रोबिन निवासी बहबलपुर जींद के शव को अपने कब्जे में लिए। इसके बाद शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद एसआई गोपाल राम ने फतेहाबाद पहुंचकर मृतक साहिल निवासी रतिया और मीना रानी निवासी फतेहाबाद का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी की। मृतकों के खिलाफ पुलिस पर हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा डलाने का केस दर्ज किया गया।

पुलिस के 69 गवाह तय करेंगे हिंसा प्रकरण की रूपरेखा
हिंसा मामले में सिरसा पुलिस की ओर से 900 पेजों का चालान पेश किया गया है। पूरे प्रकरण में 69 लोगों को सरकारी गवाह बनाया गया है। इसमें पुलिस के ऑफिसर, कर्मचारी व अन्य लोग शामिल हैं। अब ये पूरा मामला इन 69 लोगों की गवाही पर आकर टिक गया है। अदालत में हिंसा मामले में सुनवाई तेज गती से चल रही है। ऐसे में जल्द ही गवाही का दौर अदालत में शुरू हो जाएगा। अब देखना ये कि इन गवाहों में से कितने अपने बयानों पर अडिग रहते हैं।

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