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500 साल से धान की खेती हो रही है, खिलंजी वंश से लेकर अंग्रेजों तक ने पराली जलाने पर प्रतिबंध नहीं लगाया
Updated Sat, 27 Oct 2018 02:08 AM IST
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किसान बोले-पराली में आग लगाने के बाद व्हाट्सएप, फेसबुक पर फोटो अपलोड न करो, कर्मचारी गांव आए तो घेराव करो
सिरसा। सिरसा के किसानों ने शुक्रवार को पराली जलाने के लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में लघु सचिवालय के समक्ष प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने एसडीएम राहुल हुड्डा को ज्ञापन सौंपा। एसडीएम के साथ किसानों की 25 सदस्यीय कमेटी ने बात की। किसानों ने कहा कि एनजीटी ने जो शर्ते लगाई थी, वो उन्हें मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि पराली के लिए सरकार किसानों के साथ सींग मत फंसाए। सरहद पर जवान मरता हैं और खेत में किसान मरता है। किसान सरकार की गीदड़भभकी से डरने वाले नहीं है। किसान नेताओं ने किसानों से कहा कि पराली में आग लगाने के बाद वहाट्सएप, फेसबुक पर फोटो अपलोड न करो, कर्मचारी गांव आएं तो उनका घेराव करो। इस दौरान उनकी बात सुनने पहुंचे एसडीएम राहुल हुड्डा के सामने किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने 1509 बासमती का मूल्य 3500 रुपये प्रति क्विंटल करने करने की मांग की। किसानों ने कहा कि ये फसल अगेती तैयार हो जाती है। जिससे पानी की बचत होती है। ताकि किसान इसकी बिजाई ज्यादा करें। किसानों ने नहरी पानी की सप्लाई, 77 गांवों को बीमे की रकम देने अदा करने की मांगों पर भी बातचीत की। एसडीएम ने उनकी मांग सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
इससे पहले किसान सुबह 11 बजे से चौधरी देवीलाल पार्क में इकट्ठे हुए। किसानों रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। किसानों को गेट पर रोकने के लिए पुलिस पहले ही गेट पर तैनात थी। कामरेड किसान नेता स्वर्ण सिंह विर्क ने कहा कि 500 साल से धान की खेती हो रही है। खिलजी वंश से लेकर मुगल वंश और फिर अंग्रेजी शासनकाल में लार्ड क्लाइव के समय तक कभी धान की पराली जलाने पर प्रतिबंध नहीं लगा। लेकिन इस सरकार ने नादिरशाही हुक्म लागू कर दिया। इसके बाद एसडीएम राहुल हुड्डा आए। किसानों की 25 सदस्यीय कमेटी ने उन्हें ज्ञापन सौंपा। एसडीएम ने किसानों की 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के लिए कार्यालय में बुलाया। करीब 20 मिनट तक किसानों की एसडीएम से बातचीत हुई।
असी अफसरां नू कहां कि अखां मीट के चले जाओ
बाहर धरने पर किसान नेता पूर्ण सिंह ने कहा कि उनके गांव में बीते दिन कुछ कर्मचारी आए और कहने लगे कि गांव में किसी ने आग लगाई है। तब हम गांव के ही पांच से सात आदमी इकट्ठा हुए और हमने कहा कि तुसीं अखां मीट के वापस चले जाओ। जब भी कोई कर्मचारी या अधिकारी पराली के मुद्दे पर गांव में आता है तो कमेटी इकट्ठी होकर आए। कश्मीर सिंह करीवाला ने कहा कि ए आफत सरकार दे नाल आई हैं ते सरकार दे नाल ही जाएगी। देश में किसान 64 प्रतिशत रह गया। 1957 में 76 प्रतिशत था। करीवाला के सरपंच बूटा सिंह ने कहा कि व्हाट्सएप अप पर पराली जलाने की फोटो अपलोड न करो। यदि आग लगानी है तो 100 एकड़ में इकट्ठी लाओ, सेटेलाइट में कोई फोटो नहीं आती। हमारे बीच में से ही कुछ किसान सेटेलाइट बन जाते हैं और फोटो भेजते हैं। उन्होंने कहा कि 29 और 30 नवंबर को जंतर मंतर पर 206 किसान यूनियनें सरकार के खिलाफ दो दिन का प्रदर्शन करेंगी।
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109 किसानों ने जलाई पराली
राजस्व विभाग के रिकार्ड में अभी तक 109 किसानों ने पराली जलाई है। करीब 71 को नोटिस जारी हो हैं। इसमें से 41 किसानों को जुर्माना भरने का करीब एक लाख पांच हजार जुर्माने का नोटिस जारी हुआ है।
मैंने किसानों की मांगें सुन लीं हैं। उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा
राहुल हुड्डा, एसडीएम, सिरसा
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सिरसा। सिरसा के किसानों ने शुक्रवार को पराली जलाने के लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में लघु सचिवालय के समक्ष प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने एसडीएम राहुल हुड्डा को ज्ञापन सौंपा। एसडीएम के साथ किसानों की 25 सदस्यीय कमेटी ने बात की। किसानों ने कहा कि एनजीटी ने जो शर्ते लगाई थी, वो उन्हें मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि पराली के लिए सरकार किसानों के साथ सींग मत फंसाए। सरहद पर जवान मरता हैं और खेत में किसान मरता है। किसान सरकार की गीदड़भभकी से डरने वाले नहीं है। किसान नेताओं ने किसानों से कहा कि पराली में आग लगाने के बाद वहाट्सएप, फेसबुक पर फोटो अपलोड न करो, कर्मचारी गांव आएं तो उनका घेराव करो। इस दौरान उनकी बात सुनने पहुंचे एसडीएम राहुल हुड्डा के सामने किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने 1509 बासमती का मूल्य 3500 रुपये प्रति क्विंटल करने करने की मांग की। किसानों ने कहा कि ये फसल अगेती तैयार हो जाती है। जिससे पानी की बचत होती है। ताकि किसान इसकी बिजाई ज्यादा करें। किसानों ने नहरी पानी की सप्लाई, 77 गांवों को बीमे की रकम देने अदा करने की मांगों पर भी बातचीत की। एसडीएम ने उनकी मांग सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
इससे पहले किसान सुबह 11 बजे से चौधरी देवीलाल पार्क में इकट्ठे हुए। किसानों रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। किसानों को गेट पर रोकने के लिए पुलिस पहले ही गेट पर तैनात थी। कामरेड किसान नेता स्वर्ण सिंह विर्क ने कहा कि 500 साल से धान की खेती हो रही है। खिलजी वंश से लेकर मुगल वंश और फिर अंग्रेजी शासनकाल में लार्ड क्लाइव के समय तक कभी धान की पराली जलाने पर प्रतिबंध नहीं लगा। लेकिन इस सरकार ने नादिरशाही हुक्म लागू कर दिया। इसके बाद एसडीएम राहुल हुड्डा आए। किसानों की 25 सदस्यीय कमेटी ने उन्हें ज्ञापन सौंपा। एसडीएम ने किसानों की 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के लिए कार्यालय में बुलाया। करीब 20 मिनट तक किसानों की एसडीएम से बातचीत हुई।
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असी अफसरां नू कहां कि अखां मीट के चले जाओ
बाहर धरने पर किसान नेता पूर्ण सिंह ने कहा कि उनके गांव में बीते दिन कुछ कर्मचारी आए और कहने लगे कि गांव में किसी ने आग लगाई है। तब हम गांव के ही पांच से सात आदमी इकट्ठा हुए और हमने कहा कि तुसीं अखां मीट के वापस चले जाओ। जब भी कोई कर्मचारी या अधिकारी पराली के मुद्दे पर गांव में आता है तो कमेटी इकट्ठी होकर आए। कश्मीर सिंह करीवाला ने कहा कि ए आफत सरकार दे नाल आई हैं ते सरकार दे नाल ही जाएगी। देश में किसान 64 प्रतिशत रह गया। 1957 में 76 प्रतिशत था। करीवाला के सरपंच बूटा सिंह ने कहा कि व्हाट्सएप अप पर पराली जलाने की फोटो अपलोड न करो। यदि आग लगानी है तो 100 एकड़ में इकट्ठी लाओ, सेटेलाइट में कोई फोटो नहीं आती। हमारे बीच में से ही कुछ किसान सेटेलाइट बन जाते हैं और फोटो भेजते हैं। उन्होंने कहा कि 29 और 30 नवंबर को जंतर मंतर पर 206 किसान यूनियनें सरकार के खिलाफ दो दिन का प्रदर्शन करेंगी।
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109 किसानों ने जलाई पराली
राजस्व विभाग के रिकार्ड में अभी तक 109 किसानों ने पराली जलाई है। करीब 71 को नोटिस जारी हो हैं। इसमें से 41 किसानों को जुर्माना भरने का करीब एक लाख पांच हजार जुर्माने का नोटिस जारी हुआ है।
मैंने किसानों की मांगें सुन लीं हैं। उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा
राहुल हुड्डा, एसडीएम, सिरसा