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पुलिस की कड़ी निगरानी के बावजूद देर रात तक चलते रहे पटाखे
Updated Sat, 21 Oct 2017 12:18 AM IST
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पुलिस की निगरानी के बावजूद देर रात तक चलते रहे पटाखे
ऐलनाबाद (ब्यूरो)। इस बार शाम साढे़ छह से रात्रि साढे़ नौ बजे तक ही पटाखे चलाने का न्यायालय द्वारा आदेश दिया गया था। न्यायालय के आदेशों की पालना को सुनिश्चित करने के लिए शहर में पुलिस गश्त तेज रही। बावजूद इसके लोग गलियों में देर रात तक पटाखे बजाते रहे। हालांकि गत वर्षों की भांति इस वर्ष काफी कम पटाखे बजाए गए क्योंकि पटाखे बेचने के लिए इस बार 20 की बजाय मात्र सात स्टॉलों को ही पटाखा लाइसेंस जारी किए गए और ये पटाखे की स्टालें शहर से तीन किलोमीटर दूर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय प्रांगण में लगाई गई। देर रात तक पटाखे चलने के बावजूद किसी तरह की आगजनी, लड़ाई झगड़ा या पटाखा जनित घटनाओं की कोई घटना नहीं हुई। नागरिक अस्पताल के सूत्रों के अनुसार पटाखा जनित रोगों से प्रभावित एक भी रोगी शुक्रवार दोपहर दो बजे तक अस्पताल में नहीं पहुंचा। इसी तरह पुलिस थाने में भी देर रात तक पटाखे छोड़ने का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है क्योंकि पुलिस के गश्ती वाहनों के निकलने के तुरंत बाद लोगबाग फिर से पटाखे छोड़ रहे थे।
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ऐलनाबाद (ब्यूरो)। इस बार शाम साढे़ छह से रात्रि साढे़ नौ बजे तक ही पटाखे चलाने का न्यायालय द्वारा आदेश दिया गया था। न्यायालय के आदेशों की पालना को सुनिश्चित करने के लिए शहर में पुलिस गश्त तेज रही। बावजूद इसके लोग गलियों में देर रात तक पटाखे बजाते रहे। हालांकि गत वर्षों की भांति इस वर्ष काफी कम पटाखे बजाए गए क्योंकि पटाखे बेचने के लिए इस बार 20 की बजाय मात्र सात स्टॉलों को ही पटाखा लाइसेंस जारी किए गए और ये पटाखे की स्टालें शहर से तीन किलोमीटर दूर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय प्रांगण में लगाई गई। देर रात तक पटाखे चलने के बावजूद किसी तरह की आगजनी, लड़ाई झगड़ा या पटाखा जनित घटनाओं की कोई घटना नहीं हुई। नागरिक अस्पताल के सूत्रों के अनुसार पटाखा जनित रोगों से प्रभावित एक भी रोगी शुक्रवार दोपहर दो बजे तक अस्पताल में नहीं पहुंचा। इसी तरह पुलिस थाने में भी देर रात तक पटाखे छोड़ने का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है क्योंकि पुलिस के गश्ती वाहनों के निकलने के तुरंत बाद लोगबाग फिर से पटाखे छोड़ रहे थे।