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सरसों की बिक्री में देरी को लेकर किसानों ने जताया विरोध
Updated Tue, 10 Apr 2018 02:08 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चोपटा (सिरसा)।
सरसों की फसल बेचने के लिए चोपटा अनाजमंडी में पहुंचने वाले किसानों की समस्याएं बढ़ती ही जा रही है। हालांकि हैफेड के उच्चाधिकारियों ने किसानों को सरसों की बिक्री के लिए निर्धारित नियमों में कुछ बदलाव किया है फिर भी किसानों को परेशान होना पड़ रहा है।
सरसों बेचने आए किसान संतलाल, रामस्वरूप, अनिल, विनोद बैनीवाल, संदीप चाहरवाला का कहना है कि सरसों की खरीद केंद्र में अव्यवस्थाओं का आलम इस तरह का बना हुआ है कि किसानों की तीन-तीन दिन तक सरसों की खरीद नहीं हो पा रही है। सोमवार को उस वक्त किसानों ने हंगामा कर दिया जब हलका पटवारी व नायब तहसीलदार के द्वारा जारी परफोरमा के अलावा हैफेड के कर्मचारियों ने अपनी तरफ से रिटायर्ड पटवारी को जमाबंदी और परफोरमा को चेक करने के लिए लगा दिया। इस तरह की अव्यवस्था से खरीद केंद्र के सहायता केंद्र में किसानों की भीड़ हो गई। किसानों का कहना है कि जब हलका पटवारी ने किसान की सरसों की फसल का हिस्सा निकालकर रिपोर्ट बना दी तो फिर रिटायर्ड पटवारी से वेरिफिकेशन करवाना कहां की समझदारी है। किसानों की हंगामे की सूचना पाकर चोपटा के नायब तहसीलदार छैलूराम जाखड़ मौके पर पहुंचे व किसानों को समझाने का प्रयास किया वहीं हैफेड के उच्चाधिकारियों से फोन पर बात करते हलका पटवारी के द्वारा जारी प्रफोर्मे के आधार पर ही सरसों की खरीद के आदेश दिए। किसानों का कहना है कि दो दिन पूर्व हैफेड के उच्चाधिकारियों व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने सरसों की खरीद के लिए तोल और कंडे बढ़ाने का आश्वासन दिया था लेकिन बढ़ाए नहीं गए हैं। किसानों के मुताबिक आढ़तियों की तरफ से अपने कंडे व तोल लगाए गए हैं जो कि प्रति क्विंटल 50 रुपये अतिरिक्त लिए जा रहे हैं।
सरसों की बिक्री के लिए खसरा गिरदावरी की नकल जरूरी नहीं : डीएम
इस संबंध में जब हैफेड के डीएम संदीप पूनिया से बात की तो उन्होंने कहा कि सरसों की खरीद के लिए निर्धारित प्रोसेस में बदलाव किया गया है। अब किसानों को खसरा गिरदावरी की नकल की आवश्यकता नहीं है वहीं किसी परिवार में दो या दो से ज्यादा सदस्य सरसों की फसल बेचने आते हैं तो उनको जमाबंदी की नकल की फोटो प्रति मान्य की जा रही है। इसके अलावा सिंपल प्रफोर्मे पर हलका पटवारी और नायब तहसीलदार के हस्ताक्षर के उपरांत किसान अपनी सरसों बेच सकते हैं।
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चोपटा (सिरसा)।
सरसों की फसल बेचने के लिए चोपटा अनाजमंडी में पहुंचने वाले किसानों की समस्याएं बढ़ती ही जा रही है। हालांकि हैफेड के उच्चाधिकारियों ने किसानों को सरसों की बिक्री के लिए निर्धारित नियमों में कुछ बदलाव किया है फिर भी किसानों को परेशान होना पड़ रहा है।
सरसों बेचने आए किसान संतलाल, रामस्वरूप, अनिल, विनोद बैनीवाल, संदीप चाहरवाला का कहना है कि सरसों की खरीद केंद्र में अव्यवस्थाओं का आलम इस तरह का बना हुआ है कि किसानों की तीन-तीन दिन तक सरसों की खरीद नहीं हो पा रही है। सोमवार को उस वक्त किसानों ने हंगामा कर दिया जब हलका पटवारी व नायब तहसीलदार के द्वारा जारी परफोरमा के अलावा हैफेड के कर्मचारियों ने अपनी तरफ से रिटायर्ड पटवारी को जमाबंदी और परफोरमा को चेक करने के लिए लगा दिया। इस तरह की अव्यवस्था से खरीद केंद्र के सहायता केंद्र में किसानों की भीड़ हो गई। किसानों का कहना है कि जब हलका पटवारी ने किसान की सरसों की फसल का हिस्सा निकालकर रिपोर्ट बना दी तो फिर रिटायर्ड पटवारी से वेरिफिकेशन करवाना कहां की समझदारी है। किसानों की हंगामे की सूचना पाकर चोपटा के नायब तहसीलदार छैलूराम जाखड़ मौके पर पहुंचे व किसानों को समझाने का प्रयास किया वहीं हैफेड के उच्चाधिकारियों से फोन पर बात करते हलका पटवारी के द्वारा जारी प्रफोर्मे के आधार पर ही सरसों की खरीद के आदेश दिए। किसानों का कहना है कि दो दिन पूर्व हैफेड के उच्चाधिकारियों व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने सरसों की खरीद के लिए तोल और कंडे बढ़ाने का आश्वासन दिया था लेकिन बढ़ाए नहीं गए हैं। किसानों के मुताबिक आढ़तियों की तरफ से अपने कंडे व तोल लगाए गए हैं जो कि प्रति क्विंटल 50 रुपये अतिरिक्त लिए जा रहे हैं।
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सरसों की बिक्री के लिए खसरा गिरदावरी की नकल जरूरी नहीं : डीएम
इस संबंध में जब हैफेड के डीएम संदीप पूनिया से बात की तो उन्होंने कहा कि सरसों की खरीद के लिए निर्धारित प्रोसेस में बदलाव किया गया है। अब किसानों को खसरा गिरदावरी की नकल की आवश्यकता नहीं है वहीं किसी परिवार में दो या दो से ज्यादा सदस्य सरसों की फसल बेचने आते हैं तो उनको जमाबंदी की नकल की फोटो प्रति मान्य की जा रही है। इसके अलावा सिंपल प्रफोर्मे पर हलका पटवारी और नायब तहसीलदार के हस्ताक्षर के उपरांत किसान अपनी सरसों बेच सकते हैं।
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