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रोडवेज में वैकल्पिक तौर पर रखे कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाया
Updated Sun, 04 Nov 2018 11:13 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। रोडवेज में हड़ताल के दौरान आउट सोर्सिंग पॉलिसी-वन के तहत नियुक्त किए गए करीब 260 चालक-परिचालकों को विभाग ने पुराने कर्मचारियों के हड़ताल से वापस लौटने पर नौकरी से हटा दिया है। हटाए गए कर्मचारियों ने रविवार को स्थानीय टाऊन पार्क में एकत्रित होकर रोष जताया। बैठक में कर्मचारियों ने निर्णय लिया कि अगर रोडवेज प्रशासन ने उनकी नियुक्ति को नियमित न किया तो वे अदालत की शरण लेंगे।
इस मौके पर शैलेंद्र, सुनील, सतेंद्र, नरेश, रमेश, गुरतेज सिंह, सतबीर सिंह, परविंद्र सिंह, रणजीत सिंह, कालूराम ने कहा कि हड़ताल के दौरान रोडवेज प्रशासन ने उन्हें ड्यूटी पर नियुक्त किया था। नियुक्ति के वक्त उन्हें विभाग की ओर से तीन महीने के अनुबंध की बात कही गई थी। लेकिन शनिवार को हड़ताली कर्मचारियों के आते ही उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि कठिन समय में उन्होंने सरकार का साथ दिया। भविष्य में फिर कभी दोबारा हड़ताल हुई तो ऐसे समय में सरकार का कौन साथ देगा। उन्होंने कहा कि कुछ तो कर्मचारी ऐसे थे, जो प्राइवेट नौकरी छोड़कर आए थे। ऐसे में दोनों ही जगह से उनकी नौकरी चली गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने हड़ताली चालक और परिचालकों को नौकरी पर दोबारा रखकर उन्हें तो दिवाली को तोहफा दे दिया पर उनकी दीवाली काली करने के साथ-साथ उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें न्याय न मिला तो वे अदालत की शरण में जाएंगे।
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सिरसा। रोडवेज में हड़ताल के दौरान आउट सोर्सिंग पॉलिसी-वन के तहत नियुक्त किए गए करीब 260 चालक-परिचालकों को विभाग ने पुराने कर्मचारियों के हड़ताल से वापस लौटने पर नौकरी से हटा दिया है। हटाए गए कर्मचारियों ने रविवार को स्थानीय टाऊन पार्क में एकत्रित होकर रोष जताया। बैठक में कर्मचारियों ने निर्णय लिया कि अगर रोडवेज प्रशासन ने उनकी नियुक्ति को नियमित न किया तो वे अदालत की शरण लेंगे।
इस मौके पर शैलेंद्र, सुनील, सतेंद्र, नरेश, रमेश, गुरतेज सिंह, सतबीर सिंह, परविंद्र सिंह, रणजीत सिंह, कालूराम ने कहा कि हड़ताल के दौरान रोडवेज प्रशासन ने उन्हें ड्यूटी पर नियुक्त किया था। नियुक्ति के वक्त उन्हें विभाग की ओर से तीन महीने के अनुबंध की बात कही गई थी। लेकिन शनिवार को हड़ताली कर्मचारियों के आते ही उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि कठिन समय में उन्होंने सरकार का साथ दिया। भविष्य में फिर कभी दोबारा हड़ताल हुई तो ऐसे समय में सरकार का कौन साथ देगा। उन्होंने कहा कि कुछ तो कर्मचारी ऐसे थे, जो प्राइवेट नौकरी छोड़कर आए थे। ऐसे में दोनों ही जगह से उनकी नौकरी चली गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने हड़ताली चालक और परिचालकों को नौकरी पर दोबारा रखकर उन्हें तो दिवाली को तोहफा दे दिया पर उनकी दीवाली काली करने के साथ-साथ उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें न्याय न मिला तो वे अदालत की शरण में जाएंगे।
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