हरियाणा विधानसभा: अभय चौटाला ने डार्क जोन का मुद्दा उठाया, स्पीकर से बहस, सदन से नेम किया
हरियाणा विधानसभा के पहले दिन सीएम मनोहर लाल के द्वारा शोक प्रस्ताव पढ़ने के बाद सदन की कार्यवाही शुरू हुई थी। इस सत्र के लिए 52 विधायकों ने 339 तारांकित प्रश्न और 21 विधायकों ने 185 अतारांकित प्रश्न विधानसभा सचिवालय को भेजे हैं।
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हरियाणा विधानसभा बजट सत्र के दूसरे चरण के दूसरे दिन की कार्यवाही सुबह 11 बजे से शुरू हुई। इस सत्र के लिए 52 विधायकों ने 339 तारांकित प्रश्न और 21 विधायकों ने 185 अतारांकित प्रश्न विधानसभा सचिवालय को भेजे हैं। इन सभी के लिए ड्रॉ निकाला जा चुका है। साथ ही विधायकों से 71 ध्यानाकर्षण सूचनाएं, दो कार्य स्थगन प्रस्ताव, दो गैर सरकारी प्रस्ताव, दो अल्पावधि प्रस्ताव भी प्राप्त हुए हैं।
हरियाणा विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता और इनेलो विधायक अभय चौटाला में तीखी बहस हो गई। विधानसभा अध्यक्ष ारा बीच में टोकने से शुरू हुई तल्खी बाद में व्यक्तिगत आरोपों में बदल गई। अभय आपा खो बैठे और उन्होंने स्पीकर को यहां तक कह दिया कि जब भी मैं खड़ा होता हूं तो आपको तकलीफ होती है आप निष्पक्ष नहीं हो।
प्रशनकाल के दौरान अभय चौटाला ने प्रदेश में डार्क जोन में भू जल स्तर सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का ब्योरा मांगा। कृषि मंत्री जेपी दलाल ने सदन में जवाब रखा। ब्योरे को झूठ का पुलिंदा करार देते हुए चौटाला ने तालाबों के सौंदर्यकरण पर खर्च का ब्योरा मांगा। स्पीकर ने चौटाला को टोका और कहा वह डार्क जोन से संबंधित सप्लीमेंट्री सवाल करें, सौंदर्यीकरण का अलग से सवाल लगाना।
अभय चौटाला बोले, स्पलिमेंट्री ही पूछ रहे, अगर आपको सौंदर्यीकरण से तकलीफ है तो वह दूसरा सवाल पूछ लेते हैं। तकलीफ शब्द कहते ही स्पीकर भड़क गए और कहा कि तकलीफ आपको होती है। चौटाला ने आरोप लगाया कि वह मंत्री से सवाल करते हैं, लेकिन बीच में आप खुद आ जाते हैं और मंत्री का बचाव करते हैं। चौटाला ने सिलसिलेवार स्पीकर पर आरोप जडऩे शुरू किये और कहा कि जिस दिन आपका सवाल लगाऊंगा उस दिन आपको ज्यादा तकलीफ होगी।पलटवार में स्पीकर ने चौटाला से अपने शब्द वापस लेने के लिए कहा, तो अभय ने मना कर दिया। गरमाए माहौल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खड़े हुए और कहा कि यह अमर्यादित है, इस पर संज्ञान लिया जाए। स्पीकर ने चौटाला के व्यवहार को गलत करार देते हुए एक दिन के लिए निष्कासित कर दिया। स्पीकर ने सात बार चौटाला को नेम करने और बाहर जाने के निर्देश दिए।
दुष्यंत ने भी खोला चाचा के खिलाफ मोर्चा
भ्रष्टाचार को लेकर अभय चौटाला के आरोपों पर अक्सर नरम रहने वाले भतीजे डिप्टी सीएम भी इस मामले में कूद गए। दुष्यंत ने कहा कि सदन में इससे पहले कितनी बार सदस्य द्वारा असंसदीय भाषा का प्रयोग किया गया है। सदन की मर्यादा है, कोई तो लिमिट होनी चाहिए, सभी के साथ सदस्य का व्यवहार ठीक नहीं है। इसी बीच, बिजली मंत्री रणजीत चौटाला भी बोलने के लिए खड़े हुए, लेकिन स्पीकर ने उनको बैठा दिया।
गोगी बोले, मैं क्यूं उठूं
तनावपूर्ण हुए माहौल के बीच सदन में हंसी के फव्वारे भी छूटे। बाहर जाने के लिए चौटाला ने कहा कि वह बाहर कैसे जाएं मेरे सामने तो गोगी बैठे हैं। असंध से विधायक शमशेर गोगी को स्पीकर ने उठने के लिए कहा तो गोगी ने कहा कि वह क्यों उठें। स्पीकर ने फिर चौटाला को दूसरी तरफ से जाने के लिए कहा तो अभय ने कहा कि यहां तो सीढ़ी हैं। स्पीकर की अपील पर गोगी उठे तो चौटाला बाहर निकले। बैठते हुए गोगी ने कहा कि कहीं मुझे न बाहर निकाल देना। इस पर सभी हंस पड़े।
इन मुद्दों पर हुई चर्चा
- इनेलो विधायक अभय चौटाला ने डार्क जोन का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि गिरते भू जल स्तर के कारण कई गांवों में ट्यूबवेल का कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है। इस सवाल में एक और सवाल जोड़ने पर स्पीकर ने उन्हें टोका, जिसको लेकर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। इसके बाद स्पीकर ने उन्हें नेम कर सदन से बाहर कर दिया। इस दौरान सदन में स्पीकर के कहने पर मार्शल तक बुलाए गए।
- सदन के दूसरे दिन अतिथि शिक्षकों का मुद्दा विधायक धर्म सिंह छौक्कर ने उठाया। इसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने खट्टर ने बताया कि एचपीएससी का अपना पाठ्यक्रम है, सरकार का इसमें कोई इंटरफेयर नहीं है।
- कांग्रेसी विधायक आफताब अहमद ने परिवार पहचान पत्र (PPP) बेरिफिकेशन के बाद 8 लाख 41 हजार को राशन बंद हो जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि गुलाबी राशन कार्ड बनाए जाने की क्या गाइड लाइन सरकार की ओर से निर्धारित की गई है। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने बेरिफिकेशन के बाद 12 लाख नए राशन कार्ड बनाए गए हैं, उन कार्डों को कैंसिल किया गया है जो सरकार के द्वारा निर्धारित आय से बाहर थे।
- सदन में कैथल जिले में गर्ल्स कॉलेज खोले जाने की मांग रखी गई। विधायक लीलाराम ने इसके अलावा और भी स्थानीय मुद्दे उठाए। विधायक के सवाल का जवाब शिक्षा मंत्री मूलचंद शर्मा ने देते हुए कहा कि विभाग इस पर काम कर रहा है। हालांकि इस विषय का प्रस्ताव अभी विभाग को नहीं मिला है।
- कांग्रेसी विधायक कुलदीप वत्स ने खेतों में बारिश का पानी भर जाने से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया। विपक्षी दल के विधायक का जवाब कृषि मंत्री जेपी दलाल ने दिया।
- कांग्रेसी विधायक शमशेर गोगी के सवाल के साथ ही प्रश्न काल समाप्त करने की स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने घोषणा की। इस पर कांग्रेसी विधायक नीरज शर्मा ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा स्पीकर से कहा कि आपकी और अभय चौटाला की हुई बहस के दौरान के समय को काटकर मेरा सवाल लगाया जाए।
शुक्रवार को पहले दिन सदन की कार्यवाही हंगामेदार रही थी। सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोपों से घिरे से मंत्री संदीप सिंह के पहुंचने पर सदन में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। पहले दिन CM मनोहर लाल के द्वारा शोक प्रस्ताव पढ़ने के बाद सदन की कार्यवाही शुरू हुई थी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी शोक प्रस्ताव पढ़े थे। दोनों नेताओं ने सदन में वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। सदन में अभिनेता सतीश कौशिक के निधन पर भी शोक प्रस्ताव रखा गया था।
पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली और विधायक के बीच तीखी बहस
गुहला चीका से जजपा के विधायक ईशवर सिंह ने अनुसूचित जातियों के लिए कंपोनेंट प्लान के तहत खर्च राशि के ब्यौरे को लेकर सदन में अपनी ही पार्टी के पंचायत मंत्री को घेर लिया। विधायक ने आरोप लगाया कि मंत्री ने सदन को गुमराह करने के लिए गलत आंकड़े पेश किए हैं। गुमराह करने के आरोपों से बौखलाए देवेंद्र बबली ने इसका विरोध जताया और कहा कि आप ऐसे कैसे कह सकते हैं। विधायक भी पीछे नहीं हटे। ईशवर सिंह ने मंत्री बबली को कहा कि जब सदन में ही मंत्री हमारी बात को ऐसे दबा रहे हैं तो बाहर क्या संदेश जाएगा।प्रशनकाल के दौरान विधायक ईशवर सिंह ने पंचायत मंत्री से अनुसूचित जाति के लोगों के लिए कंपोनेंट प्लान के तहत योजनाओं पर खर्च की गई राशि का प्रतिशत में ब्यौरा मांगा था। मंत्री ने सदन में आंकड़े रखे, लेकिन इस पर विधायक ने आपत्ति जताई और इसे अधूरी जानकारी कहा। विधायक ने कहा कि केंद्र से एससीएसटी लोगों के विकास के लिए जो पैसा आता है, वह पूरा नहीं लगा जा रहा है।
हर साल करोड़ों रुपये बचते हैं। इसलिए इस बजट को पूरा खर्च किया और पूरी तरह से उन बस्तियों में खर्च किया जाए, जहां अनुसूचित लोग रहते हैं। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि पूरी तरह से दबे कुचले लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा समेत अन्य कामों पर जो पैसा खर्च किया जाना चाहिए, उससे सड़कें और पुल बनाए जा रहे हैं और तर्क दिया रहा है कि यहां से एससी लोग भी गजरते हैं।
इसके बाद बजट पर चर्चा के दौरान भी ईशवर सिंह ने यह मुद्दा उठाया और गलत आंकड़े देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग रखी। मंत्री बबली जवाब देने के लिए खड़े हुए तो विधायक ने उनको टोक दिया कि आप बैठ जाएं, यहां भी हमारी बात को दबाओगे को बाहर क्या सदेंश जाएगा। विधायक ने सुझाव दिया कि उनको डाटा कुल खर्च का प्रतिशत नहीं बल्कि कुल अलाट पैसे का प्रतिशत चाहिए। अफसर गुमराह करते हैं, इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मंत्री ने जवाब कि वह इसका दोबारा से रिकार्ड देंगे।
जजपा विधायक की मांग पर कांग्रेसियों ने थपथपाई मेज
ईशवर सिंह ने गरीबों को 100-100 के गज के प्लाट देने की योजना को बंद करने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 2028 के बाद से जनसंख्या भी बढ़ी है, इस योजना को दोबारा शुरू किया जाए। इस पर कांग्रेसियों ने मेजें थपथपाई। क्योंकि यह योजना कांग्रेस के शासन काल में शुरू की गई थी। एससीएसटी लोगों को केस लड़ने के लिए वकील की फीस 21 हजार से एक लाख करने और हत्या और रेप के मामलों में मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग रखी।