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कंटेनमेंट जोन में फंसे मजदूर, कैसे करें रोटी का इंतजाम

Sun, 02 Aug 2020 01:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2020 01:51 AM IST
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Workers trapped in the containment zone, how to arrange for bread
रोजाना मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालने वाले मजदूर किसी पारिवारिक सदस्य के कोरोना पॉजिटिव आने के कारण कंटेनमेंट जोन में फंस गए हैं। जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है, उन्हें भी बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में वे रोटी का इंतजाम कैसे करें, यह गंभीर समस्या है।
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शुगर मिल कॉलोनी निवासी अनिल ने बताया कि कुछ दिन पहले वह और उनकी पत्नी पुष्पा मोहल्ले के बाकी लोगों की तरह पास स्थित हरि सिंह कॉलोनी डिस्पेंसरी में कोरोना टेस्ट के लिए गए। दस दिन बाद इलाके के किसी व्यक्ति को सेहत विभाग से फोन आया और उनका मोबाइल नंबर मांगा गया। फिर उनके मोबाइल पर फोन कर सूचित किया गया कि उनकी पत्नी की रिपोर्ट पॉजिटिव है। उसी दिन स्वास्थ्य कर्मी उनके घर के बाहर इस संबंधी पोस्टर भी लगा गए। उनकी गली में सात लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, सभी मजदूरी पेशा परिवार हैं। उसी दिन गली को सील कर आवाजाही बंद कर दी गई। वीरवार को उसी डिस्पेंसरी में उनकी पत्नी का दोबारा टेस्ट हुआ, जिसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। गली सील होने के बाद से उन्हें बाहर जाने की इजाजत नहीं है। वह एक ठेकेदार के पास मजदूरी करते हैं। लॉक डाउन के बाद आर्थिक स्थिति बिल्कुल बदतर हो गई है, काम का भी कोई ठिकाना नहीं है, कभी मिलता है, कभी नहीं। अब तो खाने के लाले पड़ गए हैं, बच्चों समेत परिवार का पेट कैसे पालें। अनिल ने कहा कि न तो कोविड सर्वे की कोई टीम उनके घर आई, ताकि उनका नाम डिस्ट्रेस राशन टोकन स्कीम में पड़ जाता। जिससे उन्हें भी मुफ्त राशन मिल जाता। उनका हरा कार्ड बनाया गया था, तब कहा गया था कि सर्वे के बाद बीपीएल कार्ड बनेगा, लेकिन वह भी अब तक नहीं बना। उधर, भवन निर्माण कामगार यूनियन के प्रधान संजीव सिंह ने कहा कि उस गली में सभी परिवारों का यही हाल है। हर कोई रोजाना मजदूरी कर ही अपने परिवार का पेट पालता है। कंटेनमेंट जोन बनने के बाद ये बाहर जाकर मजदूरी नहीं कर सकते। लंबे समय तक लॉकडाउन रहने के कारण इनकी बचत खत्म हो चुकी है। प्रशासन को इनकी मजबूरी समझते हुए इन्हें राशन उपलब्ध करवाना चाहिए।
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नियमानुसार दिहाड़ीदार मजदूरों को भी कंटेनमेंट जोन के चलते बाहर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। जिला प्रशासन ने लॉकडाउन के दौरान तो मुफ्त राशन बांटा था। लेकिन उसके बाद से इसका प्रावधान नहीं है। लेकिन इन परिवारों की हालत वाकई गंभीर और जायज है। कुछ न कुछ प्रयास करके इनकी मदद जरूरी की जाएगी।
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-वरुण सिंह, ड्यूटी मजिस्ट्रेट।
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