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सरपंचों को जब अधिकार ही नहीं देने थे तो चुनाव कराने की क्या जरूरत थी : दीपेंद्र हुड्डा

Mon, 28 Aug 2023 01:44 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 28 Aug 2023 01:44 AM IST
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When the rights were not to be given to the sarpanchs, then what was the need to hold elections: Deepender Hooda
मायना में आयोजित कार्यक्रम में मंच पर मौजूद सांसद दीपेंद हुड्डा व अन्य। स्रोत : पार्टी
रोहतक। जब सरपंचों को अधिकार ही नहीं देना था तो चुनाव कराने की क्या जरूरत थी। जिस प्रतिनिधि पर जनता ने भरोसा किया, उस पर सरकार को भराेसा नहीं है। ग्राम पंचायत के चुने हुए प्रतिनिधियों का अपमान जनता का भी अपमान है। यह बात राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने रविवार को कलानौर हलके के गांव मायना में सरपंच एसोसिएशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कही।
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दीपेंद्र ने कहा कि भाजपा सरकार पंचायतों को छोटी सरकार कहती थी। लेकिन जब चुने हुए सरपंच प्रदेश सरकार के दरवाजे पर अपनी मांग को लेकर चंडीगढ़ गये तो उनको अपमानित किया गया। उनके साथ बर्बरतापूर्ण दुर्व्यवहार किया गया। लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले पंच-सरपंचों पर भाजपा-जजपा सरकार ने बर्बरता से कहर ढाया है। बार-बार लोकतंत्र को लहूलुहान किया जा रहा है, इसके लिए प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने सरपंचों को आश्वस्त करते हुए कहा कि हरियाणा में कांग्रेस सरकार आने पर पंचायतों को सारे अधिकार वापस दिए जाएंगे, इससे गांव का विकास सुचारु रूप से किया जा सकेगा।
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उन्होंने पिछले दिनों लेह (लद्दाख) में शहीद भारतीय सेना के गनर अंकित (गद्दी खेड़ा, रोहतक) के घर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवारजनों से मिलकर उनका ढांढस बंधाया। पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार के समय पंचायतों को करोड़ों की ग्रांट दी जाती थी, इससे गांवों में विकास कार्यों की अलग ही चमक दिखायी देती थी। पंचकूला में सरपंचों के साथ जो हुआ वो शर्मनाक है। इस सरकार ने पंचों-सरपंचों की पगड़ी को भी उछालने का काम किया है। सरकार तानाशाही की सीमाओं को पार करती जा रही है। लेकिन सरकार समझ लें कि प्रजातंत्र में जनता की आवाज को लाठियों के जोर से दबाया नहीं जा सकता।
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