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#विसराः रोहतक में विसरा रिपोर्ट में हो रही लेट लतीफी पर व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए रखी जा रही नजर
Tue, 03 Dec 2019 10:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 03 Dec 2019 10:43 AM IST
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विसरा रिपोर्ट में सालों साल की देरी होने, रिपोर्ट न आने और न ही रिपोर्ट मंगवाने में पुलिस की दिलचस्पी रखने का मामला उजागर होने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। रोहतक डीएसपी मुख्यालय गोरखपाल राणा ने बताया कि विसरा रिपोर्ट आने में देरी होने, कागजी तौर पर प्रक्रिया चलने पर त्वरित अपडेट न मिलने और विसरा रिपोर्ट की तमाम अपडेट के लिए जिला पुलिस का बार कोडिंग@रोहतक रेंज व्हाट्सऐप ग्रुप संचालित है।
इस ग्रुप में रोहतक रेंज के आईजी, एसपी, डीएसपी, थाना प्रभारी, चौकी इंचार्ज सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। इस ग्रुप में किसी भी केस में विसरा जांच के लिए गए सैंपल को संबंधित पुलिसकर्मी अपडेट करता है और उसके बाद संबंधित अधिकारी समय-समय पर उस केस की अपडेशन लेते हैं। ऐसे में पुलिस की तरफ से कोई लेट लतीफी नहीं की जा रही है।
पांच जगहों पर भेजे जाते हैं सैंपल
रोहतक जिला में जिस भी मामले का सैंपल विसरा के लिए जाना होता है, उनकी जगह केस के हिसाब से सुनिश्चित है। आईपीसी की धारा 174 से संबंधित मामले, हत्या के मामले, दुष्कर्म आदि मामलों के लिए विसरा सैंपल रोहतक रेंज सुनारिया लैब में जाते हैं। फिंगरप्रिंट और हथियारों के नमूने मधुबन जाते हैं। मादक पदार्थों के नमूने मध्यप्रदेश लैब में जाते हैं। काला तेल से संबंधित नमूने दिल्ली की लैब में भेजे हैं। इसके अलावा मोबाइल के नमूने गुरुग्राम लैब में भेजे जाते हैं। ग्रुप में इन सभी जगहों पर भेजे गए नमूनों की समय समय पर अधिकारी जानकारी लेते हैं।
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विसरा जांच का समय-समय पर मांगा जाता है स्टेट्स
डीएसपी ने बताया कि जिस केस में विसरा जांच के लिए सैंपल जाना होता है, उस केस का पूरा स्टेट्स पुलिसकर्मी ग्रुप में डालते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि पुलिस ने किसी आरोपी को अफीम सहित गिरफ्तार किया है। ग्रुप में आरोपी की अफीम के साथ फोटो, जगह सहित पूरी जानकारी डाली जाती है। इसके बाद डीएसपी के आदेशों पर वह पुलिसकर्मी उस अफीम का रियलटी चेक करने के लिए विसरा जांच के लिए सैंपल लेता है। उस सैंपल की मात्रा भी ग्रुप में डाली जाती है।
सैंपल लेेने के बाद अफीम का विसरा जाचं के लिए लैब में सैंपल कब भेजा गया। इसकी भी जानकारी शेयर की जाती है। इसके बाद हर दूसरे या चौथे दिन वहां पर सैंपल पहुंचने की अपडेट से लेकर वर्तमान स्थिति को संबंधित अधिकारी पूछते हैं। ये पूरी प्रक्रिया सभी अधिकारियों की जानकारी में रहती है। विसरा रिपोर्ट में देरी होने पर उसके बारे में संबंधित पुलिसकर्मी और अधिकारी से उच्च स्तरीय अधिकारी कारण पूछते हैं।
डीएसपी ने माना, विसरा जांच रिपोर्ट आने में लग रहा समय
किसी भी तरह के मामले में विसरा रिपोर्ट आने का छह माह का समय न्यूनतम होता है, लेकिन इस प्रक्रिया में दो साल कम से कम लग रहा हैं। हाई प्रोफाइल मामलों में एसपी रैंक के अधिकारी की दखल के बाद रिपोर्ट मिलती है। एफएसएल जांच से जुड़े कई मामलों में डीओ लिखकर रिपोर्ट मांगी जा रही है।
- गौरखपाल राणा, डीएसपी मुख्यालय
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इस ग्रुप में रोहतक रेंज के आईजी, एसपी, डीएसपी, थाना प्रभारी, चौकी इंचार्ज सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। इस ग्रुप में किसी भी केस में विसरा जांच के लिए गए सैंपल को संबंधित पुलिसकर्मी अपडेट करता है और उसके बाद संबंधित अधिकारी समय-समय पर उस केस की अपडेशन लेते हैं। ऐसे में पुलिस की तरफ से कोई लेट लतीफी नहीं की जा रही है।
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पांच जगहों पर भेजे जाते हैं सैंपल
रोहतक जिला में जिस भी मामले का सैंपल विसरा के लिए जाना होता है, उनकी जगह केस के हिसाब से सुनिश्चित है। आईपीसी की धारा 174 से संबंधित मामले, हत्या के मामले, दुष्कर्म आदि मामलों के लिए विसरा सैंपल रोहतक रेंज सुनारिया लैब में जाते हैं। फिंगरप्रिंट और हथियारों के नमूने मधुबन जाते हैं। मादक पदार्थों के नमूने मध्यप्रदेश लैब में जाते हैं। काला तेल से संबंधित नमूने दिल्ली की लैब में भेजे हैं। इसके अलावा मोबाइल के नमूने गुरुग्राम लैब में भेजे जाते हैं। ग्रुप में इन सभी जगहों पर भेजे गए नमूनों की समय समय पर अधिकारी जानकारी लेते हैं।
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विसरा जांच का समय-समय पर मांगा जाता है स्टेट्स
डीएसपी ने बताया कि जिस केस में विसरा जांच के लिए सैंपल जाना होता है, उस केस का पूरा स्टेट्स पुलिसकर्मी ग्रुप में डालते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि पुलिस ने किसी आरोपी को अफीम सहित गिरफ्तार किया है। ग्रुप में आरोपी की अफीम के साथ फोटो, जगह सहित पूरी जानकारी डाली जाती है। इसके बाद डीएसपी के आदेशों पर वह पुलिसकर्मी उस अफीम का रियलटी चेक करने के लिए विसरा जांच के लिए सैंपल लेता है। उस सैंपल की मात्रा भी ग्रुप में डाली जाती है।
सैंपल लेेने के बाद अफीम का विसरा जाचं के लिए लैब में सैंपल कब भेजा गया। इसकी भी जानकारी शेयर की जाती है। इसके बाद हर दूसरे या चौथे दिन वहां पर सैंपल पहुंचने की अपडेट से लेकर वर्तमान स्थिति को संबंधित अधिकारी पूछते हैं। ये पूरी प्रक्रिया सभी अधिकारियों की जानकारी में रहती है। विसरा रिपोर्ट में देरी होने पर उसके बारे में संबंधित पुलिसकर्मी और अधिकारी से उच्च स्तरीय अधिकारी कारण पूछते हैं।
डीएसपी ने माना, विसरा जांच रिपोर्ट आने में लग रहा समय
किसी भी तरह के मामले में विसरा रिपोर्ट आने का छह माह का समय न्यूनतम होता है, लेकिन इस प्रक्रिया में दो साल कम से कम लग रहा हैं। हाई प्रोफाइल मामलों में एसपी रैंक के अधिकारी की दखल के बाद रिपोर्ट मिलती है। एफएसएल जांच से जुड़े कई मामलों में डीओ लिखकर रिपोर्ट मांगी जा रही है।
- गौरखपाल राणा, डीएसपी मुख्यालय