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Rohtak News: सेना को दूध की ताकत, महिलाओं को आत्मनिर्भरता का संबल दे रहा वीटा प्लांट

Mon, 01 Jun 2026 12:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Mon, 01 Jun 2026 12:44 AM IST
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Vita Plant is providing milk power to the army and self-reliance to women.
रोहतक । हरियाणा का दूध सेना के भरोसे पर ही नहीं, रोजगार की कसौटी पर भी खरा उतर रहा है। रोहतक स्थित सहकारी क्षेत्र के वीटा मिल्क प्लांट से हर दिन करीब 15,000 से 20,000 लीटर उच्च गुणवत्ता वाला दूध भारतीय सेना को उपलब्ध कराया जा रहा हे। यह प्लांट न केवल सेना की कसौटी पर खरा उतरा है, बल्कि 600 ग्राम समितियों और आधुनिक शीतलीकरण केंद्रों के नेटवर्क के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करते हुए अब पूरे प्रदेश में 2,000 नए वीटा मिल्क बूथ स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
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वीटा रोहतक के सीईओ सतीश कुमार गहलावत ने बताया कि रोहतक वीटा प्लांट की गुणवत्ता, विश्वसनीयता एवं उत्पादन क्षमता का ही प्रमाण है कि यहां से प्रतिदिन लगभग 15000 से 20000 लीटर दूध की आपूर्ति भारतीय सेना को भी की जाती है। दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ रोजगार सृजन में भी यह प्लांट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके मिल्क बूथों के माध्यम से अनेक युवाओं और परिवारों को स्वरोजगार प्राप्त हुआ है। वीटा गृहिणी जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने का कार्य भी किया जा रहा है।
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प्रदेश के दुग्ध क्षेत्र में रोहतक का यह प्लांट महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। वर्तमान में प्रतिदिन 100000 लीटर से अधिक दूध का प्रसंस्करण किया जा रहा है। सर्दियों में यही आवक 2 लाख तक पहुंच जाती है। इसका का कार्यक्षेत्र रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी, भिवानी, सोनीपत, महेंद्रगढ़, नारनौल एवं चरखी दादरी जिलों तक फैला हुआ है। वीटा की ओर से गाय एवं भैंस के दूध की अलग-अलग श्रेणियां, शुद्ध देसी घी व अन्य दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं। वीटा का देसी घी अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय है।
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भिवानी, नारनौल समेत पांच जगहों पर शीतलीकरण केंद्र :
दूध संग्रहण एवं गुणवत्ता के लिए भिवानी, सलेमपुर, मातनहेल, जाटूसाना एवं नारनौल में कुल 5 आधुनिक दुग्ध शीतलीकरण केंद्र संचालित किए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त दूध को वैज्ञानिक मानकों के अनुसार शीघ्र शीतल कर उसकी गुणवत्ता एवं ताजगी सुनिश्चित की जाती है।
प्लांट से जुड़ी 600 ग्राम समितियां :
वीटा के साथ अलग-अलग जिलों से 600 ग्राम समितियां जुड़ी हुई हैं। सर्दियों में इनकी संख्या दोगुनी तक हो जाती है। 100 से अधिक बल्क मिल्क कूलर यानी बीएमसी चैंबर बनाए हैं। जहां से दुग्ध को शीतलीकरण केंद्र भेजा जाता है। प्रदेश भर में 125 मिल्क बूथ भी स्थापित किए हैं।


समितियां खरीदती हैं पशुपालकों से दूध :
पशु पालकों से ग्राम समितियां दुग्ध खरीदती हैं। समितियां इसे बल्क मिल्क कूलर बीएमसी चैंबर को सौंपती है। फिर इसे शीतलीकरण केंद्र पर भेजा जाता है। यहां इसको ठंडा बनाए रखा जाता है। फिर इसे प्लांट पर भेजा जाता है। यहां प्रोसेस के बाद इससे अलग-अलग प्रकार के मिल्क प्रोडक्ट बनाए जाते हैं।
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