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पिता के साथ खेतों में फावड़ा चलाने वाले अब देश के लिए चलाएंगे मुक्का
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 03 Sep 2015 02:26 AM IST
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पिता के साथ खेतों में फावड़ा चलाने वाले हाथ अब देश का नाम रोशन करने के लिए मुक्का चलाएंगे। दरअसल रूस में खेली जाने वाली वर्ल्ड जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में चयनित नौ बाक्सरों में से छह खिलाड़ी किसान परिवार से हैं।
रूस में होने वाली चैंपियनशिप में मणिपुर से वरुण सिंह, भिवानी से महेंद्र तंवर, भिवानी से सचिन, मणिपुर से एलेक्सजेंडर, उत्तराखंड से पवन गुररान, हिसार से नवीन बूरा, भिवानी से करण, दिल्ली से गौरव डबास, भिवानी से संदीप घणघस शामिल हैं।
इनमें से करीब छह बॉक्सर अपने पिता के साथ खेतों में किसानी करते हैं। इन खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और लगन की दम पर वर्ल्ड चैंपियनशिप में जगह बनाई। इनमें दिल्ली के बरवाला के रहने वाले गौरव के पिता कुलदीप किसान है तो हिसार में घिराय गांव के रहने वाले नवीन के पिता जयवीर भी खेती करते हैं।
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इसके अलावा भिवानी के महेन्द्र, करण, संदीप और सचिन भी कहते है कि वे भी अपने पिता के साथ खेतों में जाते हैं। खिलाड़ियों ने बताया कि हमेशा परिवार ने खेल के लिए साथ दिया। खेतों में काम के बाद जब समय मिलता तो वह अपने हुनर को निखारने के लिए लग जाते थे।
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रूस में होने वाली चैंपियनशिप में मणिपुर से वरुण सिंह, भिवानी से महेंद्र तंवर, भिवानी से सचिन, मणिपुर से एलेक्सजेंडर, उत्तराखंड से पवन गुररान, हिसार से नवीन बूरा, भिवानी से करण, दिल्ली से गौरव डबास, भिवानी से संदीप घणघस शामिल हैं।
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इनमें से करीब छह बॉक्सर अपने पिता के साथ खेतों में किसानी करते हैं। इन खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और लगन की दम पर वर्ल्ड चैंपियनशिप में जगह बनाई। इनमें दिल्ली के बरवाला के रहने वाले गौरव के पिता कुलदीप किसान है तो हिसार में घिराय गांव के रहने वाले नवीन के पिता जयवीर भी खेती करते हैं।
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इसके अलावा भिवानी के महेन्द्र, करण, संदीप और सचिन भी कहते है कि वे भी अपने पिता के साथ खेतों में जाते हैं। खिलाड़ियों ने बताया कि हमेशा परिवार ने खेल के लिए साथ दिया। खेतों में काम के बाद जब समय मिलता तो वह अपने हुनर को निखारने के लिए लग जाते थे।