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नगर निगम की जन्म व मृत्यु पंजीकरण ब्रांच में हंगामा, एएनएम सहित दो के खिलाफ केस दर्ज
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नगर निगम की जन्म व मृत्यु ब्रांच में दो दिन पहले उस समय हंगामा हो गया, जब एक मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर आवेदनकर्ता, एएनएम व निगम कर्मी आपस में उलझ गए। विवाद इस बात पर है कि महिला की मौत 20 अप्रैल 1999 को हुई या 21 अप्रैल 1999 को। क्योंकि दोनों कागजात पर एक ही एएनएम के हस्ताक्षर हैं। इस संबंध में नगर निगम के रजिस्ट्रार ने आर्य नगर थाने में आवेदनकर्ता व एएनएम के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
पुलिस को दी शिकायत में नगर निगम के जन्म व मृत्यु पंजीकरण ब्रांच के रजिस्ट्रार डॉ. उदयभान ने बताया कि कमला नगर निवासी कुलदीप सिंह ने किसी महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। जांच की तो फाइल अधूरी मिली। उसे बताया दिया था कि रिकॉर्ड में क्या आपत्ति थी। इतना ही नहीं, संबंधित एएनएम द्वारा दिया गया रिकॉर्ड भी स्पष्ट नहीं है। इस कारण ब्रांच की तरफ से एक अक्तूबर को फाइल अस्वीकृत कर दी गई। 18 अक्तूबर को रिकॉर्ड की जांच के लिए एएनएम को बुलाया गया था। उधर, से कुलदीप सिंह भी आ गया। आते ही ब्रांच के कर्मचारियों के साथ कहासुनी शुरू कर दी। इतना ही नहीं, एएनएम ने फोन करके दूसरी एएनएम को भी बुला लिया। मामले की सूचना पाकर वे मौके पर पहुंचे। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। निगम के रजिस्ट्रार की शिकायत पर बुधवार को आर्य नगर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।
श्मशान का रिकॉर्ड तक दे दिया, फिर भी तीन माह से कटवा रहे चक्कर
कमला नगर निवासी कुलदीप सिंह ने बताया कि उसकी मां का 20 अप्रैल 1999 को देहांत हो गया था। जबकि 21 अप्रैल 1999 को अंतिम संस्कार किया गया। उसकी मां के नाम एक मकान है, जिसे अब दो भाइयों व बहन के नाम करवाया जाना है। इसके लिए मां के मृत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। इसके लिए उसने तीन माह पहले लेट फीस भरकर आवेदन किया। निगम की तरफ से जो जरूरी कागजात थे, वे जमा करवा दिए गए। एएनएम से लिखवाकर लाया कि 20 अप्रैल 1999 को देहांत हुआ था। निगम की तरफ से आवेदन रद्द कर दिया गया। इसके बाद वैश्य संस्था के नजदीक स्थित प्राचीन शिव श्मशान भूमि संचालन समिति के हस्ताक्षर के साथ लिखवाकर दिया कि 21 अप्रैल 1999 को अंतिम संस्कार हुआ है। इसके बावजूद चक्कर कटवाए जा रहे हैं।
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निगम ने मेरी मां के मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन को रद्द कर दिया था। उसके बाद मैंने दोबारा आवेदन किया। सोमवार को एएनएम का फोन आया। उसे निगम की तरफ से ब्रांच में बुलाया गया था। इस दौरान मैं भी वहां चला गया। दो मिनट बाद वापस आ गया था। इसके बाद क्या हुआ, उसे पता नहीं है।
-कुलदीप सिंह, आवेदनकर्ता
एक कागज पर मृत्यु की तिथि 20 अप्रैल 1999 तो दूसरे पर 21 अप्रैल 1999 लिखी है। दोनाें पर एएनएम के हस्ताक्षर हैं। कौन सी तिथि सही है, यह जांच करने के लिए एएनएम को बुलाया था। आवेदनकर्ता कुलदीप सिंह बिना बुलाए आ गए। बेवजह हंगामा खड़ा कर दिया। कर्मचारियों के साथ गलत व्यवहार किया। एएनएम ने कॉल करके दूसरी एएनएम को बुला लिया। सीसीटीवी फुटेज निकाल कर पुलिस को सौंपी जाएगी।
- डॉ. उदयभान, एमओ, नगर निगम
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पुलिस को दी शिकायत में नगर निगम के जन्म व मृत्यु पंजीकरण ब्रांच के रजिस्ट्रार डॉ. उदयभान ने बताया कि कमला नगर निवासी कुलदीप सिंह ने किसी महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। जांच की तो फाइल अधूरी मिली। उसे बताया दिया था कि रिकॉर्ड में क्या आपत्ति थी। इतना ही नहीं, संबंधित एएनएम द्वारा दिया गया रिकॉर्ड भी स्पष्ट नहीं है। इस कारण ब्रांच की तरफ से एक अक्तूबर को फाइल अस्वीकृत कर दी गई। 18 अक्तूबर को रिकॉर्ड की जांच के लिए एएनएम को बुलाया गया था। उधर, से कुलदीप सिंह भी आ गया। आते ही ब्रांच के कर्मचारियों के साथ कहासुनी शुरू कर दी। इतना ही नहीं, एएनएम ने फोन करके दूसरी एएनएम को भी बुला लिया। मामले की सूचना पाकर वे मौके पर पहुंचे। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। निगम के रजिस्ट्रार की शिकायत पर बुधवार को आर्य नगर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।
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श्मशान का रिकॉर्ड तक दे दिया, फिर भी तीन माह से कटवा रहे चक्कर
कमला नगर निवासी कुलदीप सिंह ने बताया कि उसकी मां का 20 अप्रैल 1999 को देहांत हो गया था। जबकि 21 अप्रैल 1999 को अंतिम संस्कार किया गया। उसकी मां के नाम एक मकान है, जिसे अब दो भाइयों व बहन के नाम करवाया जाना है। इसके लिए मां के मृत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। इसके लिए उसने तीन माह पहले लेट फीस भरकर आवेदन किया। निगम की तरफ से जो जरूरी कागजात थे, वे जमा करवा दिए गए। एएनएम से लिखवाकर लाया कि 20 अप्रैल 1999 को देहांत हुआ था। निगम की तरफ से आवेदन रद्द कर दिया गया। इसके बाद वैश्य संस्था के नजदीक स्थित प्राचीन शिव श्मशान भूमि संचालन समिति के हस्ताक्षर के साथ लिखवाकर दिया कि 21 अप्रैल 1999 को अंतिम संस्कार हुआ है। इसके बावजूद चक्कर कटवाए जा रहे हैं।
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निगम ने मेरी मां के मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन को रद्द कर दिया था। उसके बाद मैंने दोबारा आवेदन किया। सोमवार को एएनएम का फोन आया। उसे निगम की तरफ से ब्रांच में बुलाया गया था। इस दौरान मैं भी वहां चला गया। दो मिनट बाद वापस आ गया था। इसके बाद क्या हुआ, उसे पता नहीं है।
-कुलदीप सिंह, आवेदनकर्ता
एक कागज पर मृत्यु की तिथि 20 अप्रैल 1999 तो दूसरे पर 21 अप्रैल 1999 लिखी है। दोनाें पर एएनएम के हस्ताक्षर हैं। कौन सी तिथि सही है, यह जांच करने के लिए एएनएम को बुलाया था। आवेदनकर्ता कुलदीप सिंह बिना बुलाए आ गए। बेवजह हंगामा खड़ा कर दिया। कर्मचारियों के साथ गलत व्यवहार किया। एएनएम ने कॉल करके दूसरी एएनएम को बुला लिया। सीसीटीवी फुटेज निकाल कर पुलिस को सौंपी जाएगी।
- डॉ. उदयभान, एमओ, नगर निगम