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Rohtak News: विश्वविद्यालय अपने स्तर पर करें खर्च की व्यवस्था
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रोहतक। उच्च शिक्षा के निजीकरण की ओर सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग चंडीगढ़ की ओर से प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर दिया गया है। इसमें साफ कहा गया है कि विश्वविद्यालय अपने खर्च की व्यवस्था खुर्द करे। पत्र में खर्च निकालने के रास्ते भी सुझाए गए हैं।
यही नहीं, सरकार की ओर से किसी भी तरह की ग्रांट या फंड नहीं देने की बात भी कही गई है। ऐसे में विद्यार्थियों की मुश्किल बढ़ना तय है। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के शिक्षक संघ ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर घातक प्रहार करार दिया है।
मुख्यालय से जारी पत्र शनिवार को एमडीयू परिसर में चर्चा का विषय बना रहा। यहां शिक्षक, गैर शिक्षक व विद्यार्थी सभी आने वाले मुश्किल दिनों को लेकर चिंतित नजर आए। विवि को फंड नहीं मिलने व अपने स्तर पर निजी तौर पर इसकी व्यवस्था करना सभी के लिए परेशान करने वाला सवाल रहा। इसका सीधा मतलब शिक्षा का महंगा होने से लगाया जा रहा है। ऐसा हुआ तो आम आदमी अपने बच्चों को उच्च शिक्षा नहीं दिला पाएगा। साधन संपन्न व पूंजीपति घरानों के बच्चे की विवि कैंपस में नजर आएंगे। यही नहीं, विवि का लंबा चौड़ा स्टाफ की सिमट कर रह जाएगा। कर्मचारियों को वेतन तक के लाले पड़ना तय है।
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एमडीयू शिक्षकों का कहना है कि यह पत्र सरकार की मानसिकता को दर्शाता है। सरकार पब्लिक फंडेड एजुकेशन को बर्बाद करने पर तुली है। सरकार का यह कदम सरकारी विश्वविद्यालयों को पूंजीपतियों के हाथों में सौंपे की दिशा में बड़ा कदम है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों को सरकारी विश्वविद्यालयों में योग्य शिक्षकों से सस्ती और बढ़िया शिक्षा नहीं दिलवा जाएंगे। उनका कहना है कि सरकार करोड़ों रुपए हर साल टैक्स व सेस के रूप में इकट्ठा करती है। जब सामाजिक सरोकार की बात उठती है तो मेडिकल सुविधा और सस्ती व बढ़िया उच्च शिक्षा देने के नाम पर सरकार के दोहरे मापदंड सामने आते हैं। विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सरकार का यह घातक प्रहार है।
संघों की बैठक बुलाई जाएगी
शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. विकास सिवाच ने कहा कि हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन एवं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय शिक्षक संघ इस फैसले का पुरजोर विरोध करते हैं। आने वाले दिनों में सभी संघों की बैठक बुलाई जाएगी। यहीं अगली कार्रवाई पर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा।
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यही नहीं, सरकार की ओर से किसी भी तरह की ग्रांट या फंड नहीं देने की बात भी कही गई है। ऐसे में विद्यार्थियों की मुश्किल बढ़ना तय है। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के शिक्षक संघ ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर घातक प्रहार करार दिया है।
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मुख्यालय से जारी पत्र शनिवार को एमडीयू परिसर में चर्चा का विषय बना रहा। यहां शिक्षक, गैर शिक्षक व विद्यार्थी सभी आने वाले मुश्किल दिनों को लेकर चिंतित नजर आए। विवि को फंड नहीं मिलने व अपने स्तर पर निजी तौर पर इसकी व्यवस्था करना सभी के लिए परेशान करने वाला सवाल रहा। इसका सीधा मतलब शिक्षा का महंगा होने से लगाया जा रहा है। ऐसा हुआ तो आम आदमी अपने बच्चों को उच्च शिक्षा नहीं दिला पाएगा। साधन संपन्न व पूंजीपति घरानों के बच्चे की विवि कैंपस में नजर आएंगे। यही नहीं, विवि का लंबा चौड़ा स्टाफ की सिमट कर रह जाएगा। कर्मचारियों को वेतन तक के लाले पड़ना तय है।
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एमडीयू शिक्षकों का कहना है कि यह पत्र सरकार की मानसिकता को दर्शाता है। सरकार पब्लिक फंडेड एजुकेशन को बर्बाद करने पर तुली है। सरकार का यह कदम सरकारी विश्वविद्यालयों को पूंजीपतियों के हाथों में सौंपे की दिशा में बड़ा कदम है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों को सरकारी विश्वविद्यालयों में योग्य शिक्षकों से सस्ती और बढ़िया शिक्षा नहीं दिलवा जाएंगे। उनका कहना है कि सरकार करोड़ों रुपए हर साल टैक्स व सेस के रूप में इकट्ठा करती है। जब सामाजिक सरोकार की बात उठती है तो मेडिकल सुविधा और सस्ती व बढ़िया उच्च शिक्षा देने के नाम पर सरकार के दोहरे मापदंड सामने आते हैं। विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सरकार का यह घातक प्रहार है।
संघों की बैठक बुलाई जाएगी
शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. विकास सिवाच ने कहा कि हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन एवं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय शिक्षक संघ इस फैसले का पुरजोर विरोध करते हैं। आने वाले दिनों में सभी संघों की बैठक बुलाई जाएगी। यहीं अगली कार्रवाई पर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा।