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ट्रंक वाली गली में बारिश के दौरान भरभराकर गिरा दो मंजिला मकान
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रेलवे रोड के ट्रंक वाली गली में बारिश के दौरान गिरा मकान। अमर उजाला
बारिश के दौरान बुधवार सुबह साढ़े 10 बजे रेलवे रोड की ट्रंक वाली गली में दो मंजिला मकान भरभरा कर गिर गया। गनीमत रही कि इस दौरान मकान में कोई नहीं था। घटना के दौरान एक बाइक मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गई। यदि बारिश थमी होती तो और बड़ा गंभीर हादसा हो सकता था। हादसे की जानकारी मिलते ही मौके पर नगर निगम के अफसर पहुंच गए और जांच पड़ताल की। इसके बाद उन्होंने उसी समय गत वर्ष के चिह्नित 45 जर्जर मकानों की सूची के अनुसार नोटिस भेजना शुरू कर दिया। उधर, बारिश की वजह से सेक्टर-एक में नीम का बड़ा पेड़ अचानक टूटकर गिर गया। हालांकि इससे कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई। दो मंजिला मकान के मालिक धर्मवीर ने बताया कि वह सोनीपत के सेक्टर-11 में रहते हैं। नगर निगम ने उनके मकान के जर्जर होने और इसे गिरवाने के संबंध में कोई नोटिस जारी नहीं किया था। बारिश के बाद मकान बनवाना चाहते थे, लेकिन अब यह बारिश के दौरान गिर गया। गनीमत है कि कोई अनहोनी नहीं हुई। पूर्व नगर निगम पार्षद नरोत्तम भटनागर ने बताया कि जर्जर मकानों का 2004 व 2014 में सर्वे किया गया था। इस दौरान जर्जर मकानों को धराशायी करने की फाइल मुख्यालय भेजी गई थी, लेकिन इन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यही नहीं अधिकारियों ने नए सिरे से सर्वे भी नहीं किया है कि कितने मकान नगर निगम में जर्जर अवस्था में है।
अफसर डालते रहे एक-दूसरे पर जिम्मेदारी
मकान गिरने के बाद निगम के अफसर मनजीत दहिया और योगराज छिक्कारा बुधवार को जर्जर मकानों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहे। अधिशासी अभियंता मनजीत दहिया का कहना था कि उन्हें क्षेत्र में जर्जर मकानों की संख्या के बारे में जानकारी ही नहीं है। नोटिस देने की कार्रवाई का ब्योरा अधिशासी अभियंता योगराज छिक्कारा के पास है। उधर, योगराज छिक्कारा का कहना है कि हेड क्वार्टर के अधिशासी अभियंता मनजीत दहिया हैं, उन्हीं के पास पूरा ब्योरा है। वहीं, निगम के ज्वाइंट कमिश्नर सुरेश कुमार ने जर्जर मकानों पर हुई कार्रवाई पर कहा कि यह मामला बिल्डिंग विभाग का है। इसलिए पूरी जानकारी एटीपी के पास है, जबकि एटीपी ने अधिशासी अभियंता मनजीत दहिया व अधिशासी अभियंता योगराज छिक्कारा का कार्यक्षेत्र बताया। इसके बाद ज्वाइंट कमिश्नर को हकीकत का पता चला। हालांकि अधिकारियों ने बताया कि नियमानुसार चिह्नित जर्जर मकान के मालिकों को बारिश से पहले नोटिस दिया जाता है ताकि समय से उनको गिराया जा सके। यदि कोई मकान नहीं गिराता है तो निगम कार्रवाई करता है।
नगर निगम की ओर से शहर के 45 जर्जर हो चुके मकानों के मालिकों को नोटिस भेजा जा रहा है। गत वर्ष भी इन लोगों को नोटिस दिया गया था। पिछले नोटिस के बाद निगम द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यह जांच के बाद ही बताया जा सकता है।
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-सुरेश कुमार, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम
जर्जर हुए मकानों को गिराने की जिम्मेदारी नगर निगम की
रोहतक। जर्जर मकानों को नोटिस देकर तुड़वाने की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है। इससे पहले निगम की टीम जर्जर मकानों का सर्वे करती है। संबंधित टीम मकान मालिकों को नोटिस जारी करती है। बारिश से पहले जर्जर मकानों को गिरवाने के लिए कहा जाता है। हालांकि नगर निगम अधिकारी अभी तक बारिश में जर्जर मकानों को गिराने के लिए गंभीर नहीं थे। यही वजह थी कि पहले किला रोड पर दुकान और अब ट्रंक वाली गली में मकान गिर गया।
नगर निगम क्षेत्र में सबसे अधिक जर्जर मकान पुराने शहर, गांधी कैंप व सेक्टर एरिया में है। पुराने शहर में कई मकान जर्जर स्थिति में हैं। इनकी मरम्मत तक नहीं कराई जा रही है। इसके अलावा यही स्थिति गांधी कैंप, जवाहर नगर, राम नगर आदि कॉलोनियों के कई मकानों की है। सेक्टर एरिया में पुराने हाउसिंग बोर्ड में कई मकान काफी पुराने हो चुके हैं। ये मकान खाली हैं या इनमें किरायेदार रहते हैं। सेक्टरवासियों का कहना है कि खाली प्लाटों में बारिश का पानी भर जाता है। इससे बराबर के मकानों की नींव बैठने लगती है। इसके चलते दीवार के गिरने का खतरा बना रहता है। इन प्लाट मालिकों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए
45 लोगों को दोबारा नोटिस भेजने की कार्रवाई शुरू
रेलवे रोड पर मकान गिरने की सूचना मिलने पर नगर निगम अधिकारियों में हलचल मची। अधिकारियों ने तुरंत गत वर्ष भेजे गए नोटिसों की फाइल से धूल हटवाई और आनन-फानन में 45 लोगों को दोबारा से नोटिस भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी। जबकि नए जर्जर मकानों की जानकारी तक निगम के पास नहीं है।
बंटवारा नहीं होने के कारण लोग जर्जर घरों में रहने को मजबूर
रेलवे रोड और किला रोड पर पुराने घरों का बंटवारा न होने के कारण लोग इनमें रहने को मजबूर हैं। इनके गिरने का भय हर समय बना रहता है। ऐसे मकान में रहने वालों के साथ आसपास रहने वाले और राहगीर भी खतरे में रहते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वो शहर के पुराने बाजारों और इलाकों का सर्वे करे। बड़ा बाजार, बाबरा, किला मोहल्ला, पेच पड़ाव, कायस्थान मोहल्ला, रेलवे रोड आदि का सर्वे करवा कर जर्जर भवन के मालिकों को नोटिस जारी करना चाहिए।
- हेमंत बख्शी, अध्यक्ष, रोहतक ट्रेडर्स एसोसिएशन
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अफसर डालते रहे एक-दूसरे पर जिम्मेदारी
मकान गिरने के बाद निगम के अफसर मनजीत दहिया और योगराज छिक्कारा बुधवार को जर्जर मकानों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहे। अधिशासी अभियंता मनजीत दहिया का कहना था कि उन्हें क्षेत्र में जर्जर मकानों की संख्या के बारे में जानकारी ही नहीं है। नोटिस देने की कार्रवाई का ब्योरा अधिशासी अभियंता योगराज छिक्कारा के पास है। उधर, योगराज छिक्कारा का कहना है कि हेड क्वार्टर के अधिशासी अभियंता मनजीत दहिया हैं, उन्हीं के पास पूरा ब्योरा है। वहीं, निगम के ज्वाइंट कमिश्नर सुरेश कुमार ने जर्जर मकानों पर हुई कार्रवाई पर कहा कि यह मामला बिल्डिंग विभाग का है। इसलिए पूरी जानकारी एटीपी के पास है, जबकि एटीपी ने अधिशासी अभियंता मनजीत दहिया व अधिशासी अभियंता योगराज छिक्कारा का कार्यक्षेत्र बताया। इसके बाद ज्वाइंट कमिश्नर को हकीकत का पता चला। हालांकि अधिकारियों ने बताया कि नियमानुसार चिह्नित जर्जर मकान के मालिकों को बारिश से पहले नोटिस दिया जाता है ताकि समय से उनको गिराया जा सके। यदि कोई मकान नहीं गिराता है तो निगम कार्रवाई करता है।
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नगर निगम की ओर से शहर के 45 जर्जर हो चुके मकानों के मालिकों को नोटिस भेजा जा रहा है। गत वर्ष भी इन लोगों को नोटिस दिया गया था। पिछले नोटिस के बाद निगम द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यह जांच के बाद ही बताया जा सकता है।
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-सुरेश कुमार, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम
जर्जर हुए मकानों को गिराने की जिम्मेदारी नगर निगम की
रोहतक। जर्जर मकानों को नोटिस देकर तुड़वाने की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है। इससे पहले निगम की टीम जर्जर मकानों का सर्वे करती है। संबंधित टीम मकान मालिकों को नोटिस जारी करती है। बारिश से पहले जर्जर मकानों को गिरवाने के लिए कहा जाता है। हालांकि नगर निगम अधिकारी अभी तक बारिश में जर्जर मकानों को गिराने के लिए गंभीर नहीं थे। यही वजह थी कि पहले किला रोड पर दुकान और अब ट्रंक वाली गली में मकान गिर गया।
नगर निगम क्षेत्र में सबसे अधिक जर्जर मकान पुराने शहर, गांधी कैंप व सेक्टर एरिया में है। पुराने शहर में कई मकान जर्जर स्थिति में हैं। इनकी मरम्मत तक नहीं कराई जा रही है। इसके अलावा यही स्थिति गांधी कैंप, जवाहर नगर, राम नगर आदि कॉलोनियों के कई मकानों की है। सेक्टर एरिया में पुराने हाउसिंग बोर्ड में कई मकान काफी पुराने हो चुके हैं। ये मकान खाली हैं या इनमें किरायेदार रहते हैं। सेक्टरवासियों का कहना है कि खाली प्लाटों में बारिश का पानी भर जाता है। इससे बराबर के मकानों की नींव बैठने लगती है। इसके चलते दीवार के गिरने का खतरा बना रहता है। इन प्लाट मालिकों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए
45 लोगों को दोबारा नोटिस भेजने की कार्रवाई शुरू
रेलवे रोड पर मकान गिरने की सूचना मिलने पर नगर निगम अधिकारियों में हलचल मची। अधिकारियों ने तुरंत गत वर्ष भेजे गए नोटिसों की फाइल से धूल हटवाई और आनन-फानन में 45 लोगों को दोबारा से नोटिस भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी। जबकि नए जर्जर मकानों की जानकारी तक निगम के पास नहीं है।
बंटवारा नहीं होने के कारण लोग जर्जर घरों में रहने को मजबूर
रेलवे रोड और किला रोड पर पुराने घरों का बंटवारा न होने के कारण लोग इनमें रहने को मजबूर हैं। इनके गिरने का भय हर समय बना रहता है। ऐसे मकान में रहने वालों के साथ आसपास रहने वाले और राहगीर भी खतरे में रहते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वो शहर के पुराने बाजारों और इलाकों का सर्वे करे। बड़ा बाजार, बाबरा, किला मोहल्ला, पेच पड़ाव, कायस्थान मोहल्ला, रेलवे रोड आदि का सर्वे करवा कर जर्जर भवन के मालिकों को नोटिस जारी करना चाहिए।
- हेमंत बख्शी, अध्यक्ष, रोहतक ट्रेडर्स एसोसिएशन