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Rohtak News: डेंटल कॉलेज में जल्द ही 3डी तकनीक से हो सकेगा इलाज
Sun, 18 Feb 2024 11:31 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 18 Feb 2024 11:31 PM IST
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18सीटीके33...पीजीआईडीएस में 3डी तकनीक विषय पर आयोजित वर्कशॉप में मौजूद शिक्षक व विद्यार्थी। स्र
रोहतक। अब वह दिन दूर नहीं जब बहुत जल्द मरीजों को पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज में 3डी तकनीक से इलाज उपलब्ध होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा मरीजों को यह होगा कि जहां पहले उन्हें करीब 6 चक्कर लगाने पड़ते थे वहीं उनका सिर्फ दो चक्कर में ही पूरा इलाज हो सकेगा।
यह कहना है पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के प्राचार्य डॉ. संजय तिवारी का। वे रविवार को पीजीआईडीएस में 3डी तकनीक विषय पर आयोजित वर्कशॉप में शिक्षकों व विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। प्राचार्य डॉ. संजय तिवारी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि विभागाध्यक्ष डॉ. अंबिका गुप्ता और डॉ. हरनीत सिंह ने यह वर्कशॉप आयोजित कराई है।
मुख्यातिथि ध्रुव चौधरी ने चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि 3डी एक अत्याधुनिक तकनीक है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि डॉक्टर तिवारी डेंटल कॉलेज में यह तकनीक बहुत जल्द शुरू कर देंगे। डॉ. अंबिका गुप्ता ने बताया कि सीबीसीटी मशीन कैसे जटिल से जटिल केस का भी आसानी से समाधान निकाल सकता है। व्याख्यान में डॉ. विक्रम खन्ना ने बताया कि किस पदार्थ से 3डी प्रिंटिंग निकाल सकते हैं।
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डॉ. हेमंत माथुर ने बताया कि 3डी प्रिंटिंग कैसे करते हैं किस सॉफ्टवेयर का हमें इस्तेमाल करना चाहिए। डॉ. अजय परिहार ने सीबीसीटी के फायदों के बारे में बताया। वहीं डॉ. चीना ने बताया कि इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस से विद्यार्थियों ने बहुत कुछ सीखा है, जिसका फायदा संस्थान में आने वाले मरीजों को मिलेगा। इस अवसर पर डॉक्टर शिखा तिवारी, डॉक्टर वीरेंद्र सिंह, डॉ. कमल, डॉक्टर सुमन, डॉक्टर मंजूनाथ, डॉक्टर आदर्श आदि उपस्थित रहे।
नई तकनीक से पैसे और समय दोनों की बचत : डॉ. हरनीत
डॉ. हरनीत सिंह ने बताया कि वर्तमान युग डिजिटल का है, नई तकनीक के इस्तेमाल से समय व पैसे दोनों की बचत होती है। वैसे ही दांत के क्षेत्र में भी क्रांति आई है। पहले से कम समय और कम खर्च में नए दांत या इलाज किया जाना संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि 3डी प्रिंटिंग से कैंसर के इलाज में भी बहुत मदद मिलेगी। वहीं अभी दांत को जोड़ने के लिए सामान्य तार का इस्तेमाल होता है। इन तार को लगाने के दौरान अक्सर दांत हिल जाते हैं। इसके अलावा पुराने तार को लगाने के दौरान खून का रिसाव भी हो जाता है जिससे संक्रमण होने का खतरा रहता है, जबकि 3डी प्रिंटिंग से तैयार यह तार आसानी से फिक्स हो जाता है।
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यह कहना है पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के प्राचार्य डॉ. संजय तिवारी का। वे रविवार को पीजीआईडीएस में 3डी तकनीक विषय पर आयोजित वर्कशॉप में शिक्षकों व विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। प्राचार्य डॉ. संजय तिवारी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि विभागाध्यक्ष डॉ. अंबिका गुप्ता और डॉ. हरनीत सिंह ने यह वर्कशॉप आयोजित कराई है।
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मुख्यातिथि ध्रुव चौधरी ने चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि 3डी एक अत्याधुनिक तकनीक है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि डॉक्टर तिवारी डेंटल कॉलेज में यह तकनीक बहुत जल्द शुरू कर देंगे। डॉ. अंबिका गुप्ता ने बताया कि सीबीसीटी मशीन कैसे जटिल से जटिल केस का भी आसानी से समाधान निकाल सकता है। व्याख्यान में डॉ. विक्रम खन्ना ने बताया कि किस पदार्थ से 3डी प्रिंटिंग निकाल सकते हैं।
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डॉ. हेमंत माथुर ने बताया कि 3डी प्रिंटिंग कैसे करते हैं किस सॉफ्टवेयर का हमें इस्तेमाल करना चाहिए। डॉ. अजय परिहार ने सीबीसीटी के फायदों के बारे में बताया। वहीं डॉ. चीना ने बताया कि इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस से विद्यार्थियों ने बहुत कुछ सीखा है, जिसका फायदा संस्थान में आने वाले मरीजों को मिलेगा। इस अवसर पर डॉक्टर शिखा तिवारी, डॉक्टर वीरेंद्र सिंह, डॉ. कमल, डॉक्टर सुमन, डॉक्टर मंजूनाथ, डॉक्टर आदर्श आदि उपस्थित रहे।
नई तकनीक से पैसे और समय दोनों की बचत : डॉ. हरनीत
डॉ. हरनीत सिंह ने बताया कि वर्तमान युग डिजिटल का है, नई तकनीक के इस्तेमाल से समय व पैसे दोनों की बचत होती है। वैसे ही दांत के क्षेत्र में भी क्रांति आई है। पहले से कम समय और कम खर्च में नए दांत या इलाज किया जाना संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि 3डी प्रिंटिंग से कैंसर के इलाज में भी बहुत मदद मिलेगी। वहीं अभी दांत को जोड़ने के लिए सामान्य तार का इस्तेमाल होता है। इन तार को लगाने के दौरान अक्सर दांत हिल जाते हैं। इसके अलावा पुराने तार को लगाने के दौरान खून का रिसाव भी हो जाता है जिससे संक्रमण होने का खतरा रहता है, जबकि 3डी प्रिंटिंग से तैयार यह तार आसानी से फिक्स हो जाता है।