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Haryana: विद्यार्थी बने 'एकलव्य', बगैर गुरु कर रहे ज्ञान प्राप्त, प्रदेश के 355 स्कूलों में शिक्षक नहीं
Sat, 29 Jun 2024 08:34 PM IST
भूपेंद्र सिंह
विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sat, 29 Jun 2024 08:34 PM IST
सार
हरियाणा में 838 स्कूलों में महज एक-एक ही शिक्षक है। वहीं प्रदेश के सैकड़ों सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी एकलव्य बनकर बगैर गुरु के ही खुद से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यमुनानगर जिले में 107 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। रोहतक जिले में 10 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
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हरियाणा के 355 स्कूलों में शिक्षक नहीं
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरियाणा प्रदेश के 355 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थी एकलव्य बने हुए हैं। वह बिन द्रोणाचार्य ही अध्ययन कर रहे हैं। यही नहीं, 838 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक-एक ही शिक्षक हैं जबकि स्कूलों में आरटीई (राइट टू एजूकेशन) के तहत प्रत्येक 25 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना जरूरी है। इधर, प्रदेश के विभिन्न में 3520 पीआरटी शिक्षक व 2112 अतिथि (गेस्ट) अध्यापक अधिक (सरप्लस) हैं। स्कूलों में शिक्षकों का यह अभाव शिक्षण व्यवस्था को साफ दर्शा रहा है। इसके बावजूद सरकार व शिक्षा विभाग बेहतर शिक्षा का दावा करते नहीं थक रहे हैं।
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर कितना उन्नत है, यह शिक्षकों की संख्या से लगाया जा सकता है। शिक्षकों की संख्या से अलग शिक्षकों का स्कूलों में वितरण अपने आपमें बड़ा सवाल है। प्रदेश भर में एक ओर हजारों शिक्षक अतिरिक्त यानी सरप्लस हैं तो दूसरी ओर ऐसे भी स्कूल हैं, जहां विद्यार्थियों को शिक्षकों का इंतजार है।
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प्रदेश के जिन स्कूलों में शिक्षक सरप्लस हैं, वह शहर या आसपास के स्कूल ज्यादा हैं। देहात खासकर शहर से दूर सरकारी स्कूलों के हालात खराब हैं। यहां बच्चों को शिक्षकों का इंतजार है। यमुनानगर जिले में 107 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। यहां 142 स्कूलों एक-एक शिक्षक ज्ञान बांट रहे हैं। रोहतक में एक शिक्षक के भरोसे चलने वाले स्कूलों की संख्या 10 है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ाई व बेहतर परिणाम सवालों के घेरे में नजर आ रहे हैं।
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इन आंकड़ों से समझें स्कूलों में अध्यापकों की स्थिति
जिला पीआरटी सरप्लस गेस्ट टीचर्स सरप्लस शून्य शिक्षक एक शिक्षक
अंबाला 116 85 70 126
भिवानी 152 11 20 41
चरखी दादरी 43 03 00 00
फरीदाबाद 193 189 07 25
फतेहाबाद 212 159 10 32
गुरुग्राम 158 119 09 19
हिसार 188 12 06 20
झज्जर 68 00 03 22
जींद 132 42 00 13
कैथल 202 158 12 28
करनाल 284 258 20 36
कुरुक्षेत्र 218 115 33 55
महेंद्रगढ़ 151 001 04 74
नूंह 41 20 10 66
पलवल 285 242 04 25
पंचकूला 256 205 16 32
पानीपत 168 161 03 09
रेवाड़ी 67 14 04 11
रोहतक 74 07 00 10
सिरसा 220 129 10 43
साेनीपत 141 71 07 09
यमुनानगर 151 111 107 142
कुल 3520 2112 355 838
शिक्षा व्यवस्था लचर बनी हुई है। इसमें सुधार की सख्त जरूरत है। शिक्षकों का असमान वितरण है। कहीं शिक्षक अधिक हैं तो कहीं हैं ही नहीं। कोई पहुंचे के दम पर तो कोई पहचान के बूते घरों के आसपास बैठा है। यही वजह है कि अनेक स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं। आरटीई लागू करते हुए इसके तहत प्रत्येक स्कूल में मानक के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए। इसके बाद ही परिणाम पर जोर दिया जा सकता है। -रामराज कादयान, जिला प्रधान, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
शिक्षकों के सरप्लस को लेकर पत्र जारी हुआ है। इसमें जहां अतिरिक्त शिक्षक हैं, वहां से दूसरे स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। यह ऐसे स्कूल हैं, जहां शिक्षक नहीं हैं। रोहतक में ऐसा कोई स्कूल नहीं हैं, जहां शिक्षक नहीं हैं। जिले में दस ऐसे स्कूल हैं, जहां एक शिक्षक हैं। यहां जरूरत के हिसाब से और शिक्षक जल्द मिल जाएंगे। बेहतर व्यवस्था के लिए ही यह पत्र जारी किया गया है। -दिलजीत सिंह, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, रोहतक।